एक छोटे से शहर का साधारण लड़का जिसके पास कुछ सपने, एक चाहत, चेहरे पर हंसी और कुछ कर गुजरने की ललक अल्हड़पन तो दुसरी तरफ गंभीरता कूट-कूट कर भरा पड़ा था | बचपन में नदी में जाकर डुबकी लगाना फिर रेत पर कलाकृतियाँ बनाने का शौक | कौन जानता था वह एक दिन इन्हीं कलाकृतियों में खुद को ढाल देगा | पिता से विरासत में मिली कला क्षेत्र में दो कदम आगे बढ़ते हुए आज सिनेमा जगत में अपना परचम लहरा रहा है यह बिहारी युवा अभिनेता विक्रांत चौहान |

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विक्रांत चौहान को विरासत में मिली थी अभिनय की कला

बिहार के नालंदा (Nalanda, Bihar) स्थित इस्लामपुर के रहने वाले युवा अभिनेता को अभिनय की कला अपने पिता उपेन्द्र सिंह से विरासत में मिली थी | विक्रांत चौहान (Actor, Vikrant Chauhan) की तमन्ना थी पटना आर्ट कॉलेज में दाखिला लेकर आगे पढाई करने की अफसोस सारे सपने धरे के धरे रह गए, पर अगर हिम्मत हो तो निराशा दूर भागती है और खुशियां दामन की तरफ एक कदम बढ़ाती है | अपने बड़े भाई विशाल सिंह के सुझाव पर 2008 में एनिमेशन का कोर्स कर, एनिमेशन की उच्च शिक्षा के लिए पुणे के रिलायंस बिग एम्स गये जहाँ थ्रीडी मॉडलिंग और पोस्ट प्रोडक्शन का काम भी सीखा | मुंबई की तरफ रुख करने से पहले ही परस्थितियों ने फिर से पटना लौटने पर विवश कर दिया  |

विक्रांत चौहान की फिल्मों की यात्रा 17 मिनट की फिल्म एंडलेस से शुरू हुई

विक्रांत चौहान (Actor, Vikrant Chauhan) के एक दोस्त अमित जी इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव ऑर्ट से थे | दोनों ने मिलकर कुछ अन्य मित्रों के साथ 17 मिनट की फिल्म एंडलेस बनाई | इसके बाद अभिजीत के निर्देशन में मेमोरेबल मॉमेंट नाम से एक और फिल्म बनाई | इसके बाद शिव कुमार के निर्देशन में बनी फिल्म गोपी के लिए विक्रांत (Actor, Vikrant Chauhan) को अवॉर्ड भी मिला |

जहाँ सिनेमा गीत-संगीत और संवाद के जरिये आजकल चल रही है ऐसे में विक्रांत ने एक ऐसी शॉर्ट फिल्म में काम किया जिसकी तारीफ हर कोई करता है | रुचीन चैनपुरी के निर्देशन और एजाज हुसैन के संपादन में बनी शॉर्ट फिल्म फिल्म नाइन ने लोगों के दिल में एक अलग प्रभाव छोड़ा है | सिनेमा के आलोचकों ने इस फिल्म की जमकर तारीफ़ की है | खासकर इस जमाने में डॉयलोग लेस फिल्म का निर्माण करना और उसमे बेहद ही संजीदा किरदार का अभिनय निभाना किसी कठिन कार्य से कम नहीं है | पञ्च तत्वों के आधार पर बनी यह फिल्म विक्रांत के लिए काफी मायने रखती है | जब इस फिल्म का निर्माण कार्य चल रहा था उस समय नोटबंदी के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा | जब इस फिल्म का फिल्मांकन करना था | अगली सुबह विक्रांत चौहान अपने शूटिंग पे जाने जाने वाले थे  अचानक विक्रांत चौहान के मां के देहांत की ख़बर विक्रांत चौहान मिली, वे फूट-फूट कर रोया, पर चाह के भी घर नही जा सके | क्योंकि निर्माता के पैसे, सेटअप का खर्च और पूरी यूनिट की काफी मेहनत लगी हुई थी” विक्रांत कहते हैं “थिएटर ने मुझे सिखलाया है “शो मस्ट गो ऑन”, “इस विपदा की घड़ी में पापा ने विक्रांत चौहान हौसला दिया अंतिम दृश्य को करते-करते विक्रांत चौहान रो रो रहे थे | लेकिन विक्रांत चौहान (Actor, Vikrant Chauhan) अपने प्रोफेशन और पिताजी का सपना साकार करना चाहते थे |

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इस फिल्म से मिली पहचान

विक्रांत चौहान (Abhineta, Vikrant Chauhan) को शार्ट फिल्म गोपी से पहचान मिली इस फिल्म को न सिर्फ तारीफ़ और प्रशंसा मिली, बल्कि इसका चयन इन्टरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी किया गया | कई जगह यह फिल्म समानित भी हो चुकी है | गोपी में अपने चरित्र को निभाते हुए अटखेलिया और अपने बुधुपन से लोगों को सीख और स्वच्छता का पाठ पढ़ा जाते हैं |

विक्रांत चौहान (Abhineta, Vikrant Chauhan) को अब तक दो सम्मान से नवाजा जा चुका है जिसमे बिहार (Bihar) कला श्री थियेटर में योगदान के लिए 2014 में जबकि दुसरा सम्मान 2017 में पाटलिपुत्रा सम्मान फिल्म और थियेटर में योगदान के लिए दिया जा चुका है.

सीएम नीतीश कुमार से मिली तारीफ

बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 13 अगस्त को उर्जा विभाग के साढ़े चौदह करोड़ सौ करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन, एवं लोकार्पण करने पहुंचे समारोह में बिजली चोरी बनी विज्ञापन में विक्रांत चौहान(Abhineta, Vikrant Chauhan) द्वारा निभाया गया किरदार की अभिनय को देख प्रसन्न हुए और तारीफ़ भी की |

विक्रांत चौहान (Abhineta, Vikrant Chauhan) आज भी अपनी मां को मिस करते हुए भावुक हो जाते हैं और कहते हैं,” मै आज भी अपनी मां (स्वर्गीय मनोरमा सिंह) की कही बात को याद करता हूं | वो कहा करती थीं कि, “आगे बढ़ने के लिए सीधी चढ़ना पड़ता है मै चाहे जहाँ रहूं कदम बढाता रहूँगा” आज भी मां बहुत याद आती हैं माँ के हाथों का खाना और प्यार मिस करता हूं |”

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar