स्वामी विवेकानंद का कहना था की 21 वीं सदी हिंदुस्तान की होगी और आज हिंदुस्तान विश्व का सबसे ज्यादा युवाओं वाला देश है जो अपने मेहनत के बदौलत पुरे देश दुनियां में अपने देश एवं प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं | दोस्तों आज हम चर्चा करेंगे बिहार मूल के एक युवा की जो अपनी लगातार मेहनत और लगन से अब अंतरिक्ष की ऊंचाई नापेंगे |उनका नाम है रजत कुमार सिंह |

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आईआईटी दिल्ली से मकैनिकल ट्रेड से एमटेक कर रहे रजत कुमार सिंह (Rajat Kumar Singh – Chhapra) ने अपने पहले ही प्रयास में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र इसरो की वैज्ञानिक चयन परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया| देशभर के करीब साढ़े तीन लाख युवाओं ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था | परिणाम का पता चलने के बाद बुद्धि विहार स्थित रजत के घर में खुशी की लहर दौड़ गई | परिवार के लोगों, दोस्तों और परिचितों ने घर पहुंचकर रजत का मुंह मीठा कराया |

परीक्षा में पहले ही प्रयास में यह शानदार सफलता हासिल की

रजत (Rajat Kumar Singh – Chhapra) मूल रूप से बिहार स्थित छपरा के सिताबदियारा निवासी हैं | उन्होंने अपनी शुरुआत पढ़ाई लाला टोला के उसी विद्यालय से की जहां लोकनायक जयप्रकाश नारायण भी शिक्षा हासिल कर चुके हैं | शनिवार को परीक्षा परिणाम घोषित होते ही रजत के मुरादाबाद स्थित बुद्धि विहार कॉलोनी में बधाई देने वालों का तांता लग गया | वहीं उनके गांव में उनके दादा और चाचा ने भी जमकर जश्न मनाया | रजत कुमार सिंह (Rajat Kumar Singh – Chhapra) के पिता अरुण कुमार सिंह निजी क्षेत्र की कंपनी गैलवेनो इंडिया में कार्यरत हैं | रजत कुमार सिंह (Rajat Kumar Singh – Chhapra) का परिवार मूल रूप से बिहार के छपरा जिले के गांव सिताबदियरा गांव का रहने वाला है |

मिशन की असफलता पर जवाब ने जीता दिल

इसरो की वैज्ञानिक चयन परीक्षा में मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग आदि के अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया | रजत कुमार सिंह (Rajat Kumar Singh – Chhapra) ने मैकेनिकल इंजीनियर के तौर पर यह परीक्षा दी | लिखित परीक्षा में अंतिम रूप से देशभर के तीन सौ अभ्यर्थियों को शॉर्ट लिस्ट किया गया | ये सभी 12 सदस्यीय इंटरव्यू बोर्ड से रूबरू हुए। पैंतालीस मिनट के इंटरव्यू का सबसे आखिरी सवाल रजत कुमार सिंह (Rajat Kumar Singh – Chhapra) के लिए सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णायक  साबित हुआ | रजत कुमार सिंह से इसरो के पिछले मिशन आईआरएनएसएस सी 38 की असफलता पर सवाल पूछा गया जिसके जवाब में मैंने बताया, भारत अब अपना जीपीएस तैयार कर रहा है |

अभी तक, अमेरिका का जीपीएस ही इस्तेमाल होता रहा है | इसके लिए सात सैटेलाइट भेजे जा चुके हैं, इनमें से एक का एटोमिक क्लॉक खराब हो गया था इसे ही उस मिशन में रिप्लेस किया गया था, जिसका हीट शील्ड नहीं खुल पाने से मिशन असफल हो गया | इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य इस जवाब से बहुत प्रभावित हुए | सभी पैंतीस अभ्यर्थियों में उन्होंने रजत को सबसे अव्वल पाया |

मंगलयान टू, मिशन आदित्य में चमकेगा रजत

इसरो में वैज्ञानिक के तौर पर रजत कुमार सिंह रॉकेट डिजाइन करके अंतरिक्ष में भेजने के प्रोजेक्टों में बड़ी भूमिका निभाएंगे। इसरो मार्च तक मंगलयान टू सैटेलाइट को लांच करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है | साथ ही मिशन आदित्य के अंतर्गत सूर्य पर अध्ययन की तैयारी में भी इसरो के वैज्ञानिकों की टीम जुट गई है |

पढ़ाई बस दिल में उतरनी चाहिए

जो भी छात्र इसरो की इस परीक्षा को क्वालिफाई करना चाहते हैं उन्हें बस यही ध्यान में रखने की जरूरत है कि जो भी पढ़ रहे हैं वह दिल में उतरना चाहिए | आपके नंबर चाहें 90 फीसदी हों या 70 फीसदी तकनीकी ज्ञान की मजबूती ज्यादा मायने रखती है | रजत अपनी सफलता का श्रेय अपने चाचा मनोज कुमार सिंह को देते हैं जिन्होंने पिता की अनुपस्थिति में रजत का हर कदम पर साथ दिया | रजत को अंतरिक्ष विज्ञान समझने के साथ ही वहां ट्रेनिंग करने का मौका भी मिलेगा | इस दौरान वह कई रिसर्च प्रॉजेक्ट से जुड़ेंगे। साथ ही रॉकेट डिजाइन और उसे अंतरिक्ष में भेजने में भूमिका निभाएंगे |

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