दोस्तों शायद ही कोई होगा जो अपने बचपन में रेत के ढेर पर  नहीं खेला होगा | मोहल्ले में पड़े रेत के ढेर से भगाए जाने तक हमलोग सड़क और गुफा बनाई, फिर घर जाकर कपड़ों से रेत को झार कर हटाया |  ये सब बढती उम्र के साथ छुट गया  पर कुछ लोगों ने बचपन के इस शौक को बढ़ते उम्र के साथ और निखारा और आज देश दुनिया में भारत का नाम रौशन कर रहे हैं | इनमे से पुरी के विश्व प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक को हम सभी जानते हैं | वैसे ही एक कलाकार बिहार के पूर्वी चंपारण में भी हैं, जिनका नाम है मधुरेंद्र कुमार | मधुरेंद्र कुमार बिहार, झारखंड और यूपी से लेकर नेपाल तक अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं | आज दर्जनों पुरस्कार इनकी झोली में हैं |

सैंड आर्टिस्ट (Sand Artist) 'मधुरेंद्र कुमार' (Madhurendra Kumar) - Jharkhand -Bihar Story is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

सुदर्शन पटनायक से मिली प्रेरणा

बिहार (Bihar) के पूर्वी चंपारण जिले के बनकटवा प्रखंड के बीजबनी निवासी शिव कुमार साह और गेना देवी के पुत्र मधुरेंद्र कुमार (Madhurendra Kumar) बचपन से ही मिट्टी से आकृति (Sand Artist) बनाने में रुचि रखते थे | लेकिन गरीबी के कारण अपने शौक को आगे नहीं बढ़ा सके | 2009 में मैट्रिक के बाद 2011 में जेएलएनएम कॉलेज घोड़ासहन से इंटर की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास की| इसी दौरान अखबारों में सुदर्शन पटनायक के बारे में पढ़ा तो मधुरेंद्र कुमार (Madhurendra Kumar) के अन्दर का सोया कलाकार जाग उठा | मधुरेंद्र कुमार बिना किसी गुरु के अपनी कला को कागज और रेत पर उकेरने लगे (Sand Artist) | गुजरते समय के साथ  मधुरेंद्र कुमार के कला को सराहना के साथ पहचान मिलने लगी | मधुरेंद्र कुमार (Madhurendra Kumar) वर्तमान में कला व शिल्प महाविद्यालय आरा से बीएफए (मूर्तिकला) की पढ़ाई के साथ कला का प्रदर्शन भी करते हैं |

मधुरेंद्र कुमार की समाज को समर्पित होती है

मधुरेंद्र कुमार (Madhurendra Kumar) की कलाकृतियां नशे के दुष्प्रभाव, नारी उत्पीडऩ और घरेलू हिंसा के अलावा मानव स्वास्थ्य, भारतीय नृत्य, देवी-देवताओं की प्रतिमा व ऐतिहासिक विरासतों को समर्पित होती हैं | देश के महान नेता, अभिनेता व समाज के पथ प्रदर्शकों की आकृति रेत पर बनाकर उनकी जयंती और पुण्यतिथि मनाते हैं |

बिहार के अलावा दुसरे राज्य में भी अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं

मधुरेंद्र कुमार (Madhurendra Kumar) ने विभिन्न विषयों पर बिहार (Bihar), झारखंड (Jharkhand) व उत्तर प्रदेश के अलावा नेपाल के कई शहरों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है | उन्होंने चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष में पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन में बापू और कस्तूरबा की सैंड प्रतिमा बनाकर अहिंसा और सत्याग्रह का संदेश दिया था | मधुरेंद्र कुमार को बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के गढ़ी माई मेला समेत कई अवसरों पर 30 से अधिक सम्मान मिल चुके हैं |

niraj kumar

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