दोस्तों जिस प्रकार सैनिक जान पर खेल कर हमारे देश की रक्षा करते हैं, ठीक उसी प्रकार एक चिकित्सक भी  हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं | प्रोफेसर और इंजीनियर की तरह हीं चिकित्सक  भी समाज में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं | पर कुछ चिकित्सक वैसे भी है जिन्हें उनके द्वारा किये गये अनूठे कार्य के वजह से एक अलग ही मुकाम हासिल करते है | हलाकि हमारे देश में एसे चिकित्सकों की संख्या बहुत कम है | इसी श्रेणी में एक नाम आता है बनारस के बीएचयू से रिटायर डॉ प्रोफ़ेसर टीके लहरी का जो आज भी लोगों का निशुल्क इलाज कर रहे हैं | 

प्रोफ़ेसर लहरी कोई आम सर्जन नहीं बल्कि 26 जनवरी 2016 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस प्रख्यात कार्डियोलाजिस्ट को सरकार पद्मश्री से भी नवाज चुकी है | टीके लहरी साहब की ख़ास बात यह है कि वह रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन से सिर्फ अपने भोजन के लिए पैसा लेते है और  शेष पैसा बीएचयू को दान दे देते है |

निःस्वार्थ भाव से करते हैं लोगों की सेवा

एक तरफ सरकारी डॉक्टर जहाँ रिटायर होने के बाद अपने निजी अस्पताल खोलकर करोड़ों में खेल रहे होते हैं, वहीँ बनारस के बीएचयू से रिटायर प्रोफ़ेसर टीके लहरी आज भी लोगों का निशुल्क इलाज कर रहे हैं | 2011 के बाद भी उनकी कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए उनकी सेवा इमेरिटस प्रोफेसर के तौर पर अब तक ली जा रही है | 75 साल की उम्र में भी प्रोफ़ेसर टीके लहरी इस समाज के लिए एक मिशाल बने हुए है | प्रोफ़ेसर टीके लहरी ने 1974 में लेक्चरर के रूप में बीएचयू में अपना करियर शुरू किया और आज वह बनारस में किसी देवदूत से कम नहीं हैं |जिस ख्वाब को संजोकर मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना की उस ख्वाब को प्रोफ़ेसर टीके लहरी आज भी जिन्दा रखे हुए हैं | प्रोफ़ेसर टीके लहरी की ख़ास बात यह है कि वह रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन से सिर्फ अपने भोजन के लिए पैसा लेते है | शेष पैसा बीएचयू को दान में दे देते है |

एक गाड़ी तक नहीं है इनके पास

एक तरफ जहां इनके पेशे से जुडे लोग दवा कंपनी और पैथालॉजी के सौजन्य से लक्जरी कार से दौडते नजर आते है, वहीँ प्रोफ़ेसर टीके लहरी के पास आज भी कोई वाहन नहीं है | प्रोफ़ेसर टीके लहरी आज भी मरीजों के लिए भगवान् से कम नहीं हैं | न किसी की सिफारिश ना ही अमीर-गरीब में कोई भेदभाव डॉ. टीके लहरी की यही खासियत है |रिटायर्ड होने के बाद भी मरीजों के लिए दिलोजान से लगे रहने वाले डॉ. टीके लहरी को ओपन हार्ट सर्जरी में महारत हासिल है | 1974 में बतौर लेक्चरर काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़े तो उन्होंने यहां से जैसे नाता ही जोड़ लिया है | 2003 में रिटायर्ड होने के बाद उनकी इन्हीं खासियतों को देखते हुए विश्वविद्यालय ने उन्हें इमेरिटस प्रोफेसर का दर्जा दिया, 2003 से वो 2011 तक यहां इमेरिटस प्रोफेसर रहे | इसके बाद भी उनकी कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए उनकी सेवा इमेरिटस प्रोफेसर के तौर पर अब तक ली जा रही है | 75 साल की उम्र में भी वक्त के इतने पक्के हैं कि उनके आने-जाने के समय से लोग अपनी घड़ियों का समय मिलाते हैं  |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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