हमारे समाज में बहुत कम लोग होते हैं जो यहाँ के करप्ट सिस्टम के खिलाफ खड़ा होते है पर आज हम बात करेंगे बिहार वैशाली की बेटी रितु जायसवाल जो, सीतामढ़ी की बहु और अरुण कुमार जो दिल्ली में 1995 बैच के आईएएस अधिकारी की पत्नी है |  रितु जायसवाल को नशा दिल्ली की Page 3 पार्टी का नहीं, गांव में कुछ कर गुजरने का है | इरादे बुलंद हैं, तभी दिल्ली छोड़कर फिर से बिहार आई ससुराल सीतामढ़ी के सोनबरसा प्रखंड के सिंहवाहिनी पंचायत से मुखिया का चुनाव लड़ी और जीत गई | अब रितु जायसवाल को आप कभी मोटरसाइकिल से फर्राटे भरते, ट्रेक्टर से खेत जोतते, बाढ़ के पानी में राहत पहुंचाते तो कभी करप्ट सिस्टम से लड़ते देखते हैं |

महिलाओं के लिए है प्रेरणा

रितु जायसवाल अपने गांव को बेहतर बनाने में वो सबकुछ किया जो संभव था | मुखिया का चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले रितु जायसवाल ने अपने पंचायत को खुले में शौच से मुक्ति दिलाई | राह कठिन थी, लेकिन रितु जायसवाल ने ये कर दिखाया है | अब भी पंचायत में रितु की स्वच्छता पार्टी के सदस्य सुबह-शाम गॉंव के बाहर निगरानी करते रहते हैं | कोई पकड़ में आया, तो पूरे परिवार का सरकारी दुकान से राशन बंद | अब तो वह बदमाशों को सरेशाम पीट देने वाली मुखिया रितु जायसवाल के रूप में भी पहचानी जाने लगी है |

शादी के 15 साल बाद आई थी ससुराल

1996 में रितु जायसवाल की शादी 1995 बैच के आईएएस (अलायड) अरुण कुमार से हुई थी | शादी के 15 साल तक जहां पति की पोस्टिंग होती थी रितु जायसवाल उनके साथ रहती थी | एक बार रितु जायसवाल ने पति से कहा कि शादी के इतने साल हो गए है, आज तक मैं ससुराल नहीं गई हूं | रितु जायसवाल की बात सुन कर घर के सभी लोग नरकटिया गांव जाने को तैयार हो गए | गांव पहुंचने से कुछ दूर पहले ही उनकी कार कीचड़ में फंस गई | कार निकालने की हर कोशिश बेकार होने पर सारे लोग  बैलगाड़ी पर सवार हुए और आगे बढ़े | कुछ दूर जाते ही बैलगाड़ी भी कीचड़ में फंस गई | इस घटना ने रितु जायसवाल को  क्षेत्र के विकास के लिए कुछ करने को प्रेरित किया |
फिर रितु जायसवाल गांव में हीं रह कर वहां की लड़कियों को पढ़ाने लगी | जिसके फलस्वरूप 2015 में नरकटिया गांव की 12 लड़कियां पहली बार मैट्रिक की परीक्षा पास की | उसके बाद 2016 में सिंहवाहिनी पंचायत से मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ी | उस चुनाव में रितु जायसवाल के खिलाफ 32 उम्मीदवार थे | लोगों ने कहा कि तुम हार जाओगी | तुम्हारे जाति के मात्र पांच परिवार के लोग हैं और वोट जाति के आधार पर हीं मिलता है | गाँव के लोगों का विश्वास उनपर था ,और वो चुनाव में जीत गई |

एक इंच भी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं थे ग्रामीण

किसी गाँव के विकास के लिए सबसे अहम् होता है गाँव में पक्की सड़क का निर्माण पर गांव की मुख्य सड़क बनाने के लिए कई बार टेंडर हुआ लेकिन कुछ असामाजिक तत्व अड़ंगा लगाने लगे, जिससे टेंडर कैंसिल हो गया | इस दौरान गांव के लोग सड़क के लिए अपनी एक-एक इंच जमीन छोड़ने को तैयार न थे |
रितु जायसवाल को लोगों को समझाने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी | रितु जायसवाल ने लोगो को  बताया कि अगर सड़क नहीं बनेगी तो गांव का विकास कैसे होगा | आप के बच्चे कैसे गांव से बाहर जाएंगे, आप खेती करते हैं उसको बाजार में बेचेंगे तो अधिक पैसा मिलेगा | गांव के बीमार लोग जब गांव से बाहर नहीं जाएंगे तो कैसे इलाज होगा | इन बातों का असर लोगों पर हुआ और वे एक-एक कर जमीन देने को तैयार हुए |

पंचायत हुआ खुले में शौच मुक्त
रितु जायसवाल के  सिंघवाहिनी पंचायत 2016 में खुले में शौच जाने से मुक्त हो गया था  | इस पंचायत में 7 टोले हैं | अब कई टोले में पीसीसी सड़क बन गई है | चापाकल नल और बिजली पहुंच गई है। 40 साल से मेरे पंचायत में सिर्फ कागज पर बिजलीकरण हुआ था, अब गांव में बिजली पहुंच गई है |

गांव की लड़कियों को सिखाया कम्प्यूटर

150-150 के ग्रुप बनाकर पंचायत के बच्चों को फ्री में पढ़ाया जा रहा है | पढ़ाने वाली गांव की ही लड़कियां हैं |
पहले रितु जायसवाल ने  लड़कियों को ट्रेंड किया था | अकेले लोगों को जागरूक करना संभव न था | इसके बाद कम्प्यूटर ट्रेनिंग दिलाई | ये सब बच्चों को कम्प्यूटर सिखा रही हैं | कई लड़कियां महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सिखा रही हैं | इसके लिए सरकार से लेकर एनजीओ तक का सहयोग लिया जा रहा है |
गौरतलब है कि रितू को उच्च शिक्षित मुखिया का अवार्ड भी मिल चुका है | इसके साथ ही उन्हें पंचायत के विकास के लिए भी कई अवार्ड मिले हैं |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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