आज समाज में बेटियां कितनी सुरक्षित है ये हम सभी भली-भांति जानते हैं | हर दिन बेटियों पर होने वाले अनैतिक घटनाओं से समाचार पत्र पटा रहता है | वैसे में जिन बच्चियों की आँख हीं भगवान ने छीन ली हो तब  वो बच्ची इस समाज में अपने-आप को कैसे सुरक्षित रख पायेगी |वैसे में जरूरत है की इस तरह की बच्चियां भी आत्म रक्षा के गुण सीखे | आज हम जिन बच्चियों की चर्चा करने जा रहे हैं, वो भी कुछ इसी तरह का कार्य कर रही हैं |

बांका कस्तूरबा विद्यालय (Banka Kasturba Vidayalay ) - Bihar Story is best online digital media platform for storytelling - Bihar|India Bihar Story is best online digital media platform for storytelling - Bihar|India

बांका कस्तूरबा विद्यालय की हैं ये बच्चियां

परमात्मा में ने भले ही इन मासूम बच्चियों की आंखें छीन ली हों लेकिन इनका मनोबल किसी से कम नहीं है |आंखों से भले ही उन्हें नहीं दिख रहा है लेकिन वे अपनी रक्षा के लिए कराटे का हुनर सीख रही हैं | ये बच्चियां कस्तूरबा विद्यालय बांका (Banka Kasturba Vidayalay, Bihar)  की हैं| इस स्कूल में पढ़ने वाली 10 छात्राएं इन दिनों कराटे का प्रशिक्षण ले रही हैं | इनके इस हुनर सीखने की ललक ऐसी है कि हर रविवार को वे प्रशिक्षक का बेसब्री से इंतजार करती हैं | बांका कस्तूरबा विद्यालय (Banka Kasturba Vidayalay, Bihar) की अधिकतर छात्राओं को कराटे की ट्रेनिंग दी जा रही है |

सिखने के प्रति काफी जुनूनी हैं ये बच्चियां

ये सारा श्रेय कराटे प्रशिक्षक निलेश को जाता है जिन्होंने ने स्कूल की 10 नेत्रहीन छात्राओं को कराटे सीखने के लिए प्रोत्साहित किया | निलेश के प्रयास ने रंग लाया तथा स्कूल की 10 नेत्रहीन छात्राएं कराटे सीखने को तैयार हो गईं | इन छात्राओं को हर रविवार को ट्रेनिंग दी जाती है | इन छात्राओं में कराटे के प्रति काफी जुनून है | निलेश को कराटे का प्रशिक्षण देने में थोड़ी परेशानी तो होती है लेकिन इनके सीखने की ललक से इन्हें सिखाने में काफी मजा आता है | उन्होंने बताया कि लड़कियों को आहट पर पंच मारने का प्रशिक्षण दिया जाता है | हालांकि प्रशिक्षण का प्राथमिक दौर चल रहा है लेकिन इन्हें कई प्रकार के गुर सिखाए जा चुके हैं | छात्राओं का कहना है कि “भले दुनिया नहीं दिख रही लेकिन हमलोग पढ़ाई के साथ-साथ कराटे सीखकर आत्मरक्षा तो कर ही सकते हैं |” इधर, नेत्रहीन छात्राओं के प्रभारी शिक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि इन नेत्रहीन लड़कियों को कराटे सिखाना नया प्रयोग है |

बांका कस्तूरबा विद्यालय (Banka Kasturba Vidayalay, Bihar) की ये छात्राएं भविष्य में अन्य नेत्रहीन छात्राओं के लिए प्रेरणा बन जाएंगी | उन्होंने कहा कि शायद बिहार का यह पहला जिला होगा जहां नेत्रहीन छात्राओं को कराटे का प्रशिक्षण दिया जा रहा है | मुकेश ने बताया कि इससे उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है|

niraj kumar

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