दोस्तों इस दुनिया में आसान काम तो हर कोई करता है, पर बहादुर वे लोग होते हैं जो लिक से हट कर कुछ कर गुजरते हैं | कुछ एसे ही शख्सियत के मालिक हैं युवा इंजीनियर साई प्रसन्ना रथ जो बिहार के समस्तीपुर जिले के पिछड़े गांव में बच्चों को कम्प्यूटर के जरिये शिक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं | ताकि ये गरीब बच्चे भी बेहतर तालीम हासिल कर दुनिया का कंधे से कंधा मिलाकर मुकाबला कर सकें|

Digital Education - Sai Prashanna Rath - Samastipur | Bihar Story is best online digital media platform for storytelling - Bihar|India

समाज के लिए कुछ बेहतर करना चाह रहे थे प्रसन्ना

साई प्रसन्ना रथ (Sai Prashanna Rath – Samastipur) जब इंजीनियरिंग की पढाई कर रहे थे, तब पढाई के दौरान हीं इनकी दिलचस्पी कम्प्यूटर शिक्षा (Digital Education) की ओर हो गया था | इस वजह से ये ऐसा कुछ करना चाहते थे जिससे बच्चों को शिक्षित करने में कम्प्यूटर जरिया बने | इसलिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होने एसबीआई फेलोशिप के लिये आवेदन किया और ये ‘आगा खां रूरल सर्पोट प्रोग्राम’ के तहत काम करने लिए बिहार के समस्तीपुर जिले में आ गये | यहां वो कई स्कूलों में गये लेकिन किसी भी स्कूल में कम्प्यूटर लैब नहीं थी | बहुत मुश्किल से एक स्कूल में साई प्रसन्ना रथ (Sai Prashanna Rath) को कम्प्यूटर मिले पर वो भी बेकार थे और काम नहीं कर रहे थे | तब उन्होने एक स्कूल में खिलौनों के जरिये विज्ञान को जोड़ने वाले अरविंद गुप्ता के वीडियो दिखाने शुरू किये | इन वीडियो में बताया गया था कि कैसे कबाड़ का हम बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और उनको अपने काम लायक बना सकते हैं | वहीं उनके कुछ वीडियो साइंस पर आधारित थे | इसके लिए साई प्रसन्ना रथ ने लैपटॉप और प्रोजेक्टर की मदद ली | इस तरह उन्होने इस कार्यक्रम को करीब ढ़ाई महीने तक चलाया | इस दौरान इन्होने देखा कि बच्चे काफी एक्टिव रहते थे और वो दूसरे बच्चों के साथ ग्रुप एक्टिविटी भी करते थे |

पर ये कम इतना आसान न था

बच्चों को शिक्षित कर रहे प्रसन्ना (Sai Prashanna Rath – Samastipur) ने देखा कि टीचर बच्चों को इस तरह की शिक्षा देने से बच रहे हैं, इसकी दो वजह थी कि एक तो इन अध्यापकों के लिये लैपटॉप सीखना मुश्किल काम था, वहीं दूसरी ओर कम्प्यूटर के प्रोग्राम अंग्रेजी में थे | तब पश्तात साई प्रसन्ना रथ (Sai Prashanna Rath) ने लोगों से चंदा के जरिये 50 हजार रुपये इकट्ठा किये और 5 पुराने लैपटॉप खरीदे | जिसके बाद उन्होने एक स्कूल में इन 5 लैपटॉप के साथ एक लैब शुरुआत की, इसमें वो बच्चों के साथ साथ शिक्षकों को भी कम्प्यूटर की शिक्षा देने लगे | धीरे-धीरे शिक्षक लोग  भी इनके तैयार प्रोजेक्ट में रूची लेने लगे | इस तरह वो बच्चों को डिजिटल तरीके से पढ़ाने का काम करने लगे | इसके बाद प्रसन्ना (Sai Prashanna Rath) ने बच्चों के लिए कई ई-बुक्स भी इन कम्प्यूटरों में डाउनलोड की | ताकि बच्चे के पसंद से जुड़ी ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाई जा सकें |

लैपटॉप भी चुरा ले गए चोर

सब ठीक-ठाक चल रहा था की इस बीच एक हादसा हो गया | इस साल जुलाई के पहले सप्ताह में उनके पांचों लैपटॉप और कुछ दूसरा कई सामान चोरी हो गया और महीनों की मेहनत एक ही झटके में बर्बाद हो गई | तब उन्होने महसूस किया कि अगर इस काम में उन्होने समाज के दूसरे लोगों को भी शामिल किया होता तो शायद ये चोरी नहीं होती, क्योंकि तब इस प्रोजेक्ट की सफलता में समाज की भी जिम्मेदारी बनती | इसलिये उन्होने तय किया कि वो एक बार फिर नये सिरे से कोशिश करेंगे और बच्चों को डिजिटल शिक्षा (Digital Education) दिलाने की कोशिश करेंगे | इसके लिए उन्होने गांव वालों के साथ बैठक की और उनसे कहा कि वो अगर चाहते हैं कि उनके बच्चे डिजिटल तरीके से पढ़ाई करें तो उन्हें भी पैसे से कुछ योगदान करना पड़ेगा | उनका मानना है कि इससे इलाके के लोग डिजिटल शिक्षा (Digital Education) के प्रति अपनी भी जिम्मेदारी समझेगें | इसके अलावा आगा खान फाउंडेशन भी उनके लिए फंड जुटाने में मदद कर रहा है |

आज भले ही उनको कुछ लोगों ने असफल करने की कोशिश की हो, लेकिन प्रसन्ना (Sai Prashanna Rath) जानते हैं कि गिरकर नहीं, लड़कर जीता जाता है और वो अपनी लड़ाई जारी रखे हुए हैं, ताकि आने वाला कल उन बच्चों के नाम हो जिनको वो डिजिटल शिक्षा (Digital Education) के जरिये जोड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं |

Niraj Kumar
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