श्रद्धा और आस्था का प्रतीक महथिन माई का मंदिर आरा-बक्सर रेल मार्ग पर बिहिया स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर पूरब रेल पटरी के किनारे स्थित है | सती शिरोमणि महथिन माई मंदिर के बारे में लोगो का कहना है कि यह मंदिर अत्याचार,अनाचार और कुकर्म पर सदाचार के विजय का प्रतिक है |

महथिन माई मंदिर (Mahtin Mai Mandir) - Bihar Story is best online digital media platform for storytelling - Bihar|India

सिकरिया गांव के श्रीधर महंथ की बेटी थी

माना जाता है कि उस इलाके का राजा दुराचारी था, वह उधर से गुजरने वाली नई-नवेली दुल्हनो की डोली पहले अपने पास मंगवा लेता था, जब सिकरिया गांव के श्रीधर महंथ की बेटी की डोली उस रस्ते से सोंन नदी के पास तुलसी हरीग्राम की ओर जा रही थी तो राजा के सैनिको ने डोली रोक ली और महल की ओर चलने को कहा, जिसका महथिन ने विरोध किया | जब सैनिको ने जबरदस्ती की तो महथिन ने क्रोधित हो कर राजवंश के नाश होने का शाप दे दिया.बताया जाता है की इस घटना के बाद महथिन की डोली में स्वतः आग लग गई और वह सती हो गई और घटना के बाद हरिहो वंश का भी नाश हा गया | वैसे तो इस महथिन माई मंदिर (Mahtin Mai Mandir) में हमेशा श्रद्धालुओं ताँता लगा रहता है पर  सप्ताह में दो दिन सोमवार एवं शुक्रवार को यहां विशेष मेला लगता है | यहां लोग अपनी-अपनी मन्नते मांगने दूर-दूर से आते है | देवी सती शिरोमणि महथिन माई (Mahtin Mai Mandir) को लेकर श्रद्धालु महिलाओं की धारणा है कि इनकी आराधना से सुहाग सुरक्षित रहता है |

यही कारण है कि यह महथिन माई मंदिर (Mahtin Mai Mandir) और महथिन माई सुहाग की देवी के रूप में इस क्षेत्र में विख्यात है | मंदिर के प्रवेश द्वार से अंदर परिसर में प्रवेश करते ही बायें तरफ शिव मंदिर तथा दाहिने तरफ राम जानकी मंदिर स्थित है | मुख्य मंदिर के गर्भ गृह में एक चबूतरा है जहां बराबर एक चौमुख दिया जलते रहता है | चबूतरे पर बीचोबीच दो गोलाकार पीतल का परत चढ़ाया हुआ महथिन मां का प्रतीक चिह्न है | इसी तरह का दो गोला मुख्य गोले के दायी और बायी ओर स्थित है। जिसके बारे में बताया जाता है कि दो मुरथ गोला महथिन माई और उनके बहन का प्रतीक चिह्न और दायें-बायें तरफ वाला गोला महथिन माई के दो परिचारिकाओं का स्मृति चिह्न है | इन्हीं प्रतीक चिह्नों के समक्ष विवश और मजबूर औरतें माथा टेकती है, मनौतियां मानती है, सुख और सपने संजोती है, कोख व सुहाग की रक्षा के लिए निवेदन करती है तथा मनोकामनापूर्ण होने पर चुनरी चढ़ाती है |

लोगों का कहना है कि वर्षो पूर्व यहां महुआ के पेड़ के नीचे खुले आकाश में मिट्टी का एक चबूतरा था जिस पर महथिन मां की पूजा की जाती थी | मंदिर कब बना और किसने बनवाया इसके समय और काल पर इतिहास में कुछ भी दर्ज नहीं है। हालांकि गर्भ गृह के प्रवेश द्वार पर दायें-बायें बोलचाल की भोजपुरी भाषा और टूटी-फूटी चौपाई दोहों के रूप में सती शिरोमणि महथिन माई के पुण्य प्रताप से संबंधित अनेक चमत्कारिक किससे अंकित है। शादी ब्याह के मौसम में नव विवाहिता जोड़े यहां ‘कंकन’ छुड़ाने आते है | इधर कुछ वर्षो से उक्त मंदिर शादी विवाह के महत्वपूर्ण स्थल के रूप में ख्याति प्राप्त कर चुका है। यहां प्रति वर्ष सैकड़ों जोड़े आते रहे है तथा महथिन माई को साक्षी मानकर दाम्पत्य सूत्र में बंधते हैं | कोई यहा मन्नत मांगने आता है तो कोई उसे पूरा होने पर चढ़ावे के लिए आता है| सती शिरोमणि महथिन माई मंदिर (Mahtin Mai Mandir) पर लोगो का विश्वाश हैं की इनके पूजा करने से सुहागिन का सुहाग हमेशा बना रहता है |