दोस्तों कुछ दिन पहले एक फिल्म आई थी ‘पैड मैन’ इस फिल्म में एक डायलॉग था की ‘औरत के लिए बीमारी से मर जाना शर्म के साथ जीने से बेहतर है’ | दोस्तों सच्चाई यह है की ये सिर्फ एक डायलॉग नहीं, बल्कि यह हमारे समाज की हकीकत को दर्शाता है | तभी तो  आज भी हमारे देश में मात्र 88% महिलाएं ही सैनिटरी नैपकिन्स का इस्तेमाल करती हैं | हमारे देश में माहवारी को लेकर जागरुकता का अभाव है, जो स्वास्थ्य से संबंधित कई समस्याओं कारण बन सकता है | इन सब समस्याओं से निजाद दिलाने का बीड़ा उठाया है मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले के रहनेवाले मंगेश झा ने | मंगेश आज के समय में झारखंड के रियल पैडमैन हैं |

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रियल पैड मैन हैं बिहार के मंगेश झा

मंगेश झा (Padman Hero, Mangesh Jha) ने  2009 में भुवनेश्वर से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की फिर कोलकाता के होटल ओबेराय ग्रैंड के अलावा रांची के होटल रेडिशन ब्लू में अच्छी सैलेरी पर काम कर रहे थे  मंगेश झा (Mangesh Jha) चाहते तो रॉयल लाइफ जी सकते थे | पर समाज में महिलाओं की दयनीय स्थिति को देख कर उन्होंने उनके लिए कुछ काम करने का ठाना | मंगेश झा खुद के पैसे सेनेटरी पैड (Sanitary Pad) बना कर झारखंड (Jharkhand) के जोन्हा इलाके की आदिवासी महिलाओं के बीच बांटते हैं | इतना ही नहीं वे ट्राइबल समुदाय की महिलाओं को कई तरह से सहयोग प्रदान कर उनके उत्थान की दिशा में काम भी कर रहे हैं | वैसे मंगेश झा (Mangesh Jha) के माता-पिता रांची में रहते थे | इस वजह से इनका झारखंड (Jharkhand) से काफी लगाव था | गांवों में महिलाओं की स्थिति देखकर मंगेश ने इस सेक्टर में काम करने का निर्णय लिया |

मंगेश झा कुछ इस तरह बने पैड मैन

मंगेश झा (Mangesh Jha) अपने काम के सिलसिले में जोन्हा क्षेत्र के गांवों में जाया करते थे | झारखंड (Jharkhand) के गांवों में महिलाएं मुसली की खेती करती थीं | लेकिन जब वे माहवारी के दौर में होती थीं, तो काम नहीं कर पाती थी| उनके लिए मुसली की खेती ही आय का मुख्य साधन था, लेकिन माहवारी के दौरान वह भी बंद हो जाता था | महिलाओं की ऐसी स्थिति ने मंगेश (Padman Hero) को काफी परेशान किया | एक दिन वे यही बात सोंचते  हुए घर आये | घर पर आकर अपनी मां से इस विषय पर बात की, फिर उनकी  मां ने पहली बार उन्हें सेनेटरी नैपकिन (Sanitary Pad) दिखा कर इसके बारे में जानकारी दी | उसी समय मंगेश ने अपनी मां को बताया कि वे इस क्षेत्र में ही काम करना चाहते हैं | मंगेश झा (Padman Hero, Mangesh Jha) की बात सुन कर पहले तो मां नाराज हुईं, फिर राजी हो गयी | सेनेटरी पैड (Sanitary Pad) को लेकर मां ने मंगेश (Padman Hero) को काफी सहयोग प्रदान किया | मंगेश मां के साथ मिलकर घर पर ही पैड (Sanitary Pad) बनाने लगे और इसे झारखंड (Jharkhand) के गांवों में जाकर बांटने लगे | इसके बाद दुकानों में जाकर सेनेटरी पैड (Sanitary Pad) के बारे में लंबा रिसर्च भी किया |

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मंगेश का प्रयास रंग लाई

मंगेश झा (Mangesh Jha) को अपने इस अनोखे मुहीम में दिक्कतें तो आई लेकिन जल्द हीं उनकी मेहनत रंग लाने लगी | जहाँ औरते माहवारी के दौरान पत्ता और राख का इस्तेमाल करती थी वहां अब सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करने लगी | सेनेटरी पैड (Sanitary Pad) का मुद्दा केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं है, यह पूरे समाज का मुद्दा है | और  इसके लिए हर किसी को आगे आना होगा आज महिला सशक्तीकरण के लिए साइकिल वितरण से ज्यादा पैड बांटने की जरूरत है| अगर आज के युवा सप्ताह में एक दिन अपना फ्री टाइम समाज के नाम कर  स्लम एरिया में लोगों को सेनेटरी नैपकीन के (Sanitary Pad) बारे में जागरूक करें तभी इस समस्या का समुचित समाधान होगा |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar