इस संसार में अपने लिए तो हर कोई जीता है, पर उस इन्सान का कद आम इन्सान आम के कद से उंचा हो जाता है जो दूसरों के लिए जीता हो और उसके कारण किसी के घर का चूल्हा जलता हो | दोस्तों आज हम बात करेंगे बिहार के गया जिले के बाराचटटी प्रखंड के सोभ बाजार की बहु पुष्पा कुमारी दूसरों की भलाई में अपना जीवन बिता रही है | पुष्पा कुमारी अपने क्षेत्र की बहु-बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने का जो सपना देखा था , उसे पिछले छः वर्ष से वर्तमान तक पूरी ईमानदारी के साथ निभाती चली आ रही हैं |

बहु-बेटियों को सिलाई-कढ़ाई व डिजाइनिंग सिखाकर आत्मनिर्भर बनाती है

किसी भी निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में पैसे की तंगी तो रहती हीं है वैसे में अगर घर की बहु-बेटियां अगर घर में होने वाले खर्च में अपने द्वारा कमाए गए पैसे से सहयोग करे तो उस परिवार में उनका कद भी बढ़ जाता है | वर्तमान समय में जब तक हम बेटियों को आत्मनिर्भर बना घर के खर्चे में दो पैसे का सहयोग नहीं कराएंगे, तब तक इस महंगाई के युग में एक व्यक्ति से परिवार की गुजर-बसर नहीं होने वाली है | इसीलिए पुष्पा कुमारी ने  ठाना कि अपने जैसे और भी बहु-बेटियों को सिलाई-कढ़ाई व डिजाइनिंग के कार्य सिखा उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए, जिससे उन्हें अपना रोजगार मिल सके, और अब पुष्पा कुमारी को  इस कार्य में अच्छी सफलता मिल रही है | इसी का नतीजा है कि इलाके में सुबह से शाम तक हाथों में प्लास्टिक के थैले थामे और उनमें कपड़ों के टुकड़े व सूई-धागे लेकर ग्रामीण महिलाएं आती-जाती दिख जाती है |

हर साल 336 बेटियों को बनाती हैं हुनरमंद

पुष्पा कुमारी हर महीने 30 बेटियों को उनकी इच्छा के अनुसार सिलाई, कढ़ाई और डिजाइनिंग का कार्य सिखाने का काम कर रही हैं। यहां सीखने वालीं सभी बहु-बेटियां गरीब परिवार की हैं, जो अपने बूते दो पैसे की आमदनी करना चाहती हैं | वह अपनी मेहनत से मिले पैसे से घर में आर्थिक सहयोग करने के साथ-साथ आगे की पढ़ाई कर कुछ करने का जज्बा भी रखती हैं |

सीखने की सामग्री खुद उपलब्ध कराती हैं

पुष्पा कुमारी के शालिनी सिलाई सेंटर में जो भी बहु-बेटियां सिलाई, कढ़ाई सीखने आती हैं, उनको पुष्पा कुमारी अपनी तरफ से सभी सामग्री सीखने के लिए उपलब्ध कराती है , सामग्री के एवज में वे प्रत्येक से हर माह मात्र 30 रुपये लेती हैं | अधिकांश महिलाएं एक माह में ही सिलाई का कार्य सीख लेती हैं | इनमें से अधिकांश बाराचट्टी के देहाती क्षेत्र की बेटिया हैं |

पुष्पा कुमारी ने शालिनी सिलाई सेंटर की शुरुआत 2011 में की थी

पुष्पा कुमारी ने वर्ष 2011 के अगस्त माह में सिलाई-कढ़ाई के प्रशिक्षण कार्य को प्रारंभ किया था | शुरू में तो काफी कम एक-दो महिलाएं ही सिखने के लिए तैयार हुई, पर धीरे-धीरे जब इसकी जानकारी होने लगी तो काफी संख्या में महिलाएं आने लगीं | आज इनकी संख्या में काफी इजाफा हो चुका है | वर्तमान में प्रतिदिन 39 बहु-बेटियां यहां प्रशिक्षण ले रहीं हैं | अब तो यहां प्रशिक्षण लेनी वालीं महिलाओं की संख्या एक हजार को भी पार कर चुकी है |

ससुराल के खर्च में कर रहीं हैं सहयोग

पुष्पा कुमारी के पास सिलाई-कढ़ाई सीखने वाली अधिकांश महिलाएं आज शादीशुदा हो गई हैं | शादी के बाद उन्होंने खुद का रोजगार स्थापित कर लिया और ससुराल के खर्च में सहयोग भी कर रही हैं | ससुराल के लोग भी उनकी ओर से आर्थिक मदद मिलने से काफी प्रभावित होते हैं | जब वह मायके आती हैं, तो बिना मुझसे मिले नहीं जातीं | जब वह बताती हैं कि वे लोग ससुराल के खर्च में सहयोग करती हैं, तो मुझे यह सुनकर काफी संतोष होता है | ऐसा हो भी क्यों न, आखिर यही मूल कमाई तो मेरी है |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar