ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में बिहार की एक बेटी ने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर खेलों की दुनिया में बिहार का भी मान बढ़ाया है |2010 में आयोजित जिस कॉमनवेल्थ खेल से पूर्व विदेश राज्य मंत्री दिग्विजय सिंह वापस नहीं लौट सके, उसी कॉमनवेल्थ खेल में उनकी बेटी श्रेयसी सिंह ने सोने पर निशाना साध  कर अपने पिता को सच्ची श्रद्धांजलि दी है | 

पिता व दादा का सपना किया पूरा

श्रेयसी सिंह बिहार के जमुई की रहनेवाली हैं, वह पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं. श्रेयसी सिंह इससे पहले भी कई पदक जीतकर देश और राज्य का नाम रोशन कर चुकी हैं. श्रेयसी की मां पुतुल कुमारी बांका की सांसद भी रही थीं. श्रेयसी राष्ट्रमंडल खेल में पदक जीतने वाली बिहार की अकेली खिलाड़ी हैं. सोना जीतने पर राष्ट्रपति ने ट्‌वीट कर उन्हें बधाई दी है. राष्ट्रपति ने ट्‌वीट किया-श्रेयसी सिंह को बधाई. पूरे देश को उनपर गर्व है.

अब लोग उस दिन को याद करने लगे जब श्रेयसी सिंह के दादा स्व. कुमार सुरेन्द्र सिंह और उनके पिता स्व.दिग्विजय सिंह ने जमुई ( गिद्धौर ) में एक शूटिंग रेंज बनाने का सपना देखा था | यह सपना उनके के जीवित रहते साकार तो नहीं हो सका, पर श्रेयसी सिंह के इस उपलब्धि से एक नै आस जगी है | फिलहाल, जमुई के साथ-साथ आज पूरा हिंदुस्तान श्रेयसी सिंह के इस उपलब्धि पर नाज है |

स्व.दिग्विजय सिंह को भी निशानेबाजी का था शौक

70 के दशक में जमुई में शूटिंग प्रतियोगिता आयोजित होती थी, और राज्य स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में गोमिया, मुंगेर, और जमुई का बोलबाला होता था |

जमुई के.के.एम कॉलेज के प्राध्यापक रहे प्रो. अख्तर आलम खान के अनुसार 1976 में के.के.एम कॉलेज में राज्यस्तरीय शूटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था | इसमें उनके द्वारा दस में दस अंक हासिल कर लेने के बाद श्रेयसी के दादा सुरेन्द्र सिंह ने कहा की अब प्रतियोगिता में करने के लिए कुछ बचा हीं क्या है अख्तर साहब विजेता हैं | बाद में कुमार सिंह जीवन पर्यंत नेशनल रायफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बने रहे |श्रेयसी के पिता स्व.दिग्विजय सिंह को भी निशानेबाजी का शौक था | उनकी बड़ी बहन भी निशानेबाजी करती है |

श्रेयसी के गाँव में एक साथ मनाई गई होली और दीपावली

लोग एकदूसरे को बधाइ देने लगें | जगह-जगह मिठाइयां बंटने लगी | लालकोठी पहुंची भीड़ ने जमकर अबीर और गुलाल उड़ाई | गिद्धौर स्थित एतिहासिक मिंटो टावर पर भी लोग उमड़ पड़े और एक दुसरे का मुंह मीठा करने लगे ये सिलसिला काफी देर तक चला साथ हीं लोग अबीर-गुलाल उड़ाकर और आतिशबाजी कर होली और दीपावली होने की अनुभूति कराने में मग्न थे

भगवान एसी बेटी सबको दे

जमुई के लोगों के प्रफुल्लित चेहरे से उनकी ख़ुशी साफ झलक रही थी | हर-एक की जुबान पर एक हीं बात थी की भगवान एसी बेटी सबको दे | श्रेयसी के 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने की खबर मिलते हीं जमुई में होली और दीपावली सा माहौल हो गया | श्रेयसी सिंह के गिद्धौर स्थित उनके पैतृक आवास लालकोठी पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई |श्रेयसी सिंह के चचेरे भाई राष्ट्रदीप सिंह ने कहा की श्रेयसी सिंह की जीत पुरे देश की जीत है, बिहार की बेटियों के मन-सम्मान की जीत है | श्रेयसी सिंह जैसी बहन पा कर हमे अपने भाग्य पर नाज है

शूटऑफ में आस्ट्रेलियन खिलाडी पर भारी पड़ी श्रेयसी सिंह

महिला डबल ट्रैप के फ़ाइनल में श्रेयसी सिंह और आस्ट्रेलिया की इमा कोक्स के बीच जोड़दार भिडंत देखने को मिली | चौथे राउंड के बाद श्रेयसी सिंह और इमा कोक्स 96-96 अंक के साथ संयुक्त रूप से बराबरी पर थी | इसके बाद स्वर्ण का फैसला करने के लिए शूटऑफ का सहारा लेना पड़ा | शूटऑफ में श्रेयसी सिंह आस्ट्रेलियन निशानेबाज़ इमा कोक्स पर भारी पड़ी और इस तरह श्रेयसी सिंह ने सोना अपने नाम कर इतिहास रच डाली |

राज्यवर्धन सिंह राठौर हैं श्रेयसी सिंह के आदर्श

एथेंस ओलंपिक के रजत पदक विजेता को अपना आदर्श मानने वाली श्रेयसी सिंह ने दिल्ली कॉमनवेल्थ खेल में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था पर पर वो सफल नहीं हो पाई थी | हलाकि ग्लास्गो में उन्होंने डबल ट्रैप में रजत पदक हासिल कर सुर्खिया बटोरी और फिर 2017 कॉमनवेल्थ खेल में भी रजत पदक अपने नाम किया था |

कामयाबी तुक्के में नहीं मिली है,श्रेयसी सिंह को

श्रेयसी सिंह को मिली स्वर्णिम सफलता पर आज पूरा देश गौरवान्वित है, पर ये सफलता श्रेयसी सिंह के एक दिन का नतीजा नहीं है | श्रेयसी सिंह कभी भी अपने पिता के रसूख का फायदा नहीं उठाई बल्कि अपने मेहनत के बल पर आज कामयाब हुई है | श्रेयसी सिंह को जब जमुई के गिद्धौर में नौवीं कक्षा में पढाई के दौरान शूटिंग के लिए आवश्यक सामान उपलब्ध कराया गया था, उसी समय, साथ में ये भी नसीहत दी गई थी की उसे अपने पिता के रसूख नहीं बल्कि अपने दम पर आगे बढ़ना होगा, दुसरे बच्चों की तरह मेहनत करनी होगी और उनसे प्रतिस्पर्धा करनी होगी | श्रेयसी सिंह ने एसा किया भी, पहले जिला फिर राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर सभी का ध्यान खिंचा और आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रतिभा का लोहा मनवा कर विश्वपटल पर अपने प्रदेश और देश का नाम रौशन किया |

मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने भी दी शुभकामनाएं

श्रेयसी सिंह द्वारा स्वर्णपदक जीतने पर बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार और राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी बधाई और शुभकामनाएं दी है तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना भी की है |

 

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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