एक बिहारी जिन्‍होंने अपनी कमजोरी को ही ताकत बना दिया, जिन्होंने साबित कर दिखाया की जब इरादे हों पक्के और मन में हो विश्वास तो इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है | शरीर का आधा हिस्सा लकवाग्रस्त होने के बाद भी रथौस गांव निवासी मो. शम्स आलम पैरा तैराकी सहित अन्य खेलों में नाम कमा रहे हैं। अब उनका चयन अमेरिकी सरकार के खेल विभाग और अमेरिका के टेनेसी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘ग्लोबल स्पोर्ट्स मेंटरिंग प्रोग्राम’ के लिए हुआ है | पांच हफ्ते के इस विशेष प्रेरणा, परामर्श और ट्रेनिंग में भाग लेने के लिए वे अमेरिका पहुंच गए हैं |

पारा तैराकी में कई सफलता अपने नाम किये

रथौस गांव निवासी मो. नसीर व शकीला खातून के पुत्र मो. शम्स आलम दिव्यांग होने के बाद भी पारा तैराकी के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए अब तक कई मेडल अपने नाम किये | वर्ष 2014 में मुंबई में इंडियन नेवी डे सेलिब्रेशन पर हिन्द  महासागर में एक घंटा चालीस मिनट में छह किलोमीटर की तैराकी कर कीर्तिमान स्थापित किया | 8 अप्रैल 2017 को गोवा के कैंडोलिम बीच में आयोजित उमोजा बीच फेस्टिवल के दौरान चार घंटे चार मिनट में आठ किलोमीटर की तैराकी कर अपना ही रेकॉर्ड तोड़ते हुए एक नया रेकार्ड बनाया | पारा तैराकी के लिए फ्लोरिडा यूनाइटेड स्टेट अमेरिका द्वारा खिताब हासिल करने वाले शम्स देश के विभिन्न हिस्सों में पारा तैराकी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल सहित कई पुरस्कार हासिल करने में कामयाब रहे हैं |

दिव्यांग शम्स ने हिम्मत नहीं हारी

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान रीढ़ के दर्द से परेशान मो. शम्स आलम का वर्ष 2010 में मुंबई के एक हास्पिटल में आपरेशन किया गया | आपरेशन सफल नहीं होने पर पांच माह बाद दूसरे अस्पताल में आपरेशन हुआ | इसके बाद भी मो. शम्स आलम की परेशानी दूर नहीं हो सकी और वर्ष 2012 में मुंबई के चिकित्सकों द्वारा विकलांग होने की बात बताई गई  | वर्ष 2010 के आपरेशन के बाद से ही शम्स की कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह काम करना बंद कर दिया | मो. शम्स आलम वर्ष 2010 से व्हीलचेयर के सहारे ही दिन गुजारने लगे | लेकिन, शम्स ने हिम्मत नहीं हारी और अब वे भारतीय पारा तैराकी टीम में शामिल होकर अपने गांव के साथ-साथ देश का नाम रोशन करना चाहते हैं |

कराटे में भी कर चुके हैं कमाल

शम्स पारा तैराकी के अलावा कराटे में भी कई पदक प्राप्त कर चुके हैं  | ब्लैक बेल्टर शम्स वर्ष 2010 से पूर्व कराटे प्रतियोगिता में जिला से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल 54 मेडल प्राप्त करने में कामयाब रहे |

जर्मनी में तैराकी का कौशल दिखाने को बेताब दिव्यांग शम्स

भारतीय पैरा तैराकी टीम में शामिल दिव्यांग शम्स आलम जर्मनी के बर्लिन में तैराकी का कौशल दिखाने को बेताब हैं | बर्लिन में 3 से 9 जुलाई तक सात दिवसीय व‌र्ल्ड सीरीज पारा स्वि¨मग चैंपियनशिप में भारत सहित विश्व के 70 देश के पारा तैराक शामिल होंगे | इस चैंपियनशिप में भारत की ओर से चयनित पांच पारा तैराकों में मधुबनी जिले के बिस्फी प्रखंड के रथौस गांव के 30 वर्षीय शम्स आलम के अलावा महाराष्ट्र के सुयश नारायण जादव, कंचन माला पांडेय, हरियाणा के स्वप्नील पाटिल, राजस्थान के किरण टाक शामिल हैं | साथ हीं मो. शम्स आलम वर्ष 2018 में होने वाले पारा एशियन गेम की तैयारी कर रहे हैं। इसमें मेडल लाकर देश का नाम रोशन करने की तमन्ना है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए कठिन परिश्रम से घबराना नहीं चाहिए। कड़ी मेहनत और परिजन के प्रोत्साहन के सहारे आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं।

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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