बच्चे हमारे देश के भविष्य हैं लेकिन इसे विडम्बना हीं कहेंगे की हमारे देश में आज भी कुछ बच्चे को किसी-न-किसी कारणवस भीख मांगना पड़ता है, और इससे भी बड़ी शर्मनाक बात यह है की हर कोई उनके हाथों में चंद सिक्के थमाकर चल देता है पर इस भीड़ भरे दुनिया में हर्ष कोठारी जैसे लाल भी है जो  उन भीख मांगने वाले बच्चों के तकलीफ को समझकर उनके हाथों से कटोरा लेकर कलम थमाने की पहल की है | हर्ष कोठारी ने इन बच्चों को पढ़ाने के लिये लाखों की नौकरी छोड़ी और हर हाथ कलम नाम की संस्था बनाई |

हर हाथ कलम संस्था (Har Haath Kalam) -Harsh Kothari -Jalandhar -Punjab -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

उनकी यह मुहिम रंग लाई लोग आते गए और कारवां बढ़ता गया।

‘हर हाथ में कलम’ के नाम से चलाते हैं मुहीम

जालंधर (Jalandhar, Punjab) के रहने वाले हर्ष कोठारी (Harsh Kothari) ने हर हाथ में कलम (Har Haath Kalam) थमाने के उद्देश्य से पटियाला के थापर इंजीनियरिंग कॉलेज के कुछ विद्यार्थियों के साथ मिलकर जुलाई 2014 में एक अनोखी मुहिम की शुरुवात की थी, जिसका नारा था  भीख हटाओ, देश बचाओ | ये इंजीनियरिंग छात्र अपनी-अपनी पढ़ाई पूरी कर जीवन में आगे बढ़ गए | हर्ष कोठारी (Harsh Kothari) भी इनमें शामिल थे | लेकिन उनके लिए आगे बढ़ने का मतलब कुछ और था | इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें देश की एक नामी ऑटोमोबाइल कंपनी में सात लाख रुपए सालाना के पैकेज पर पहली नौकरी (प्लेसमेंट) मिली थी, लेकिन आठ माह बाद उन्होंने वह नौकरी छोड़ अधूरे मिशन को पूरा करने का प्रण ले लिया |उस मुहिम को पुनः सक्रिय किया, नए-पुराने छात्रों को जोड़ा पूरी कार्ययोजना बनाई और काम को अंजाम देने में जुट गए | नौकरी छोड़ने के फैसले से उनके अभिभावक हैरान थे, लेकिन हर्ष के जज्बे को देख अब वे भी उनके मिशन को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग कर रहे हैं | आज  सैकड़ों इंजीनियरिंग छात्रों सहित पटियाला के सैकड़ों स्वयंसेवी इस मुहिम से जुड़ गए हैं |

लोगों के बीच जाकर करते हैं  जागरूक

हर्ष कोठारी (Harsh Kothari) और स्वयंसेवी शहर के विभिन्न बाजारों-चौराहों पर पहुंच लोगों को भीख न देने की सीख देते हैं। उन्हें भिक्षावृत्ति के खिलाफ जागरूक करते हैं | वे लोगों को समझाते हैं कि भीख देने का मतलब दान करना नहीं बल्कि उस व्यक्ति को और भी कमजोर बनाना है, जिसे आप भीख देकर प्रोत्साहित कर रहे हैं | यदि आप उसे शिक्षा या रोजगार के लिए प्रेरित कर सकें और इसके लिए उसकी कुछ मदद कर सकें तो बेहतर होगा।

हर हांथ कलम के माध्यम से संवार रहे हैं जिंदगी

हर्ष कोठारी (Harsh Kothari) का यह सराहनिए प्रयास रंग ला रहा है | आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ भीख मांगने को मजबूर हुए करीब 20 बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ा गया है | इनमें से एक लड़की संध्या अब दसवीं कक्षा में और सेम्युएल नौंवी कक्षा में पढ़ रहा है | अन्य 18 बच्चों की बेसिक तैयारी कराई जा रही है, जिन्हें अप्रैल से स्कूल भेजा जाएगा | इन बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ संगीत, नृत्य व चित्रकला में भी निपुण बनाया जा रहा है | समय-समय पर विभिन्ना समारोहों में उन्हें अपनेहुनर को प्रस्तुत करने का मौका दिलाया जाता है| प्रोत्साहन, पुरस्कार और प्रशंसा मिलने पर वे इन अभिरुचियों और पढ़ाई में मन लगाकर आगे बढ़ रहे हैं | इनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान लौट आया है | अब ये जीवन में कभी भी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना चाहेंगे। हर्ष ने बताया कि कुष्ठ आश्रम में रहने वाले कुछ कुष्ठ रोगियों को भी भिक्षावृत्ति से रोकने में सफलता मिली है। उनके बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार से आर्थिक सहायता मुहैया करा उन्हें भीख मांगने से रोका है।

अब बेटे को आइटीआइ में पढ़ा रहा दर्शन

दिव्यांग दर्शन (हाथों से लाचार) व उसकी पत्नी सुमित्रो, जिसकी दोनों टांगे पोलियोग्रस्त हैं, भीख मांगने को मजबूर थे | इन्हें थापर कॉलेज के पास ही एक रेहड़ी लगवा दी गई है, जिस पर वे भेलपूरी, चाट आदि बेच कर गुजर-बसर खुद करने लगे हैं| बेटे को आइटीआइ में पढ़ा रहे हैं|

अब भीख मांगने की जरूरत नहीं गणेश को

दिव्यांग गणेश, जिसकी एक टांग नहीं है, पहले खिलौने बेच कर गुजर करता था, लेकिन बेटी की शादी पर उसने सारी जमा-पूंजी लगा दी। हालात इतने बिगड़े कि भीख मांगने पर मजबूर हो गया| हर हाथ कलम के सदस्यों ने उससे बात की तो उसने पुनः खिलौने बेचने की इच्छा जताई। चार हजार रुपए के खिलौनों का बंदोबस्त कर उसका काम शुरू करवा दिया गया| अब गणेश भीख मांगने को मजबूर नहीं रहा। हर्ष कहते हैं कि सभी लोग इस काम में सहयोग कर रहे हैं |

niraj kumar

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