दोस्तों किसी ने ठीक हीं कहा है “हिम्मत-ए-मर्दा तो मदद-ए-खुदा”  ये पंक्तियां बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली अख्तरी बेगम पर बिलकुल सटीक बैठती है जिन्होंने काफी संघर्ष और विरोध का सामना करने के बाद शिक्षा हासिल की और अब दूसरों को भी शिक्षित करने का नेक काम कर रही हैं |

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पढ़ाई करने वाली अपने गाँव की पहली लड़की थी

अख्तरी बेगम (Akhtari Begum) अपने गांव की पहली लड़की थी, जो पढाई करने के लिये अपने गांव से बाहर गई थी | अख्तरी बेगम (Akhtari Begum) जिस ग्रामीण परिवेश और समुदाय से आती थीं वहां लड़कियों की स्कूली शिक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था | इस वजह से उन्होने दूसरी क्लास तक की पढ़ाई एक मदरसे में की | इसके बाद उनकी पढ़ाई रुक गई इसकी वजह थी घर की आर्थिक हालत जो अच्छी नहीं थी | इसलिए उन्होने सिलाई सीखी, सिलाई सीखने के बाद जब अख्तरी बेगम अपना काम शुरू करने के बारे में सोचा तो उनको इस बात का अहसास हुआ कि जब वो किसी की नाप लेंगी, तो उसे कैसे लिखेंगी |

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इसी सोच को ध्यान में रखने हुए उन्होने 13 साल की उम्र में एक बार फिर पढ़ने का फैसला लिया | इसके बाद जब उन्होने अपने घरवालों से दोबारा पढ़ाई शुरू करने के बारे में बात की, तो घरवालों ने उनका विरोध किया | घरवालों के इस फैसले के खिलाफ वो भूख हड़ताल पर बैठ गई,पर बेटी की जिद्द के आगे घरवालों को झुकना पड़ा | इसके बाद उन्होने शुरूआत के 6 महीने घर पर रहकर ही पढ़ाई की और ओपन स्कूल से 8वीं की परीक्षा दी | इसके बाद उनको एक स्कूल ने 9वीं क्लास में दाखिला दे दिया | इस बात का अख्तरी बेगम (Akhtari Begum) के गाँव वाले ने भी भरपूर विरोध किया, लेकिन अख्तरी बेगम के मजबूती के आगे उनकी एक न चली और अपनी पढाई जारी रखी | आज वही अख्तरी बेगम पोस्ट ग्रेजुएट हैं तथा अपने आस-पास के लगभग 25 गाँवो की लडकियों के लिए प्रेरणा की श्रोत है |

पिछड़े और दलित समुदाय की लड़कियों के बेहतरी के लिए ईजाद संगठन चला रही हैं

इतने संघर्ष के बाद अख्तरी बेगम (Akhtari Begum) ने तो अपनी पढाई पूरी कर ली अब वो अपनी जैसी दूसरी लड़कियों को ना केवल शिक्षित करने की कोशिश कर रहीं हैं, बल्कि उनको शिक्षा के साथ साथ कौशल प्रशिक्षण और खेलकूद की ट्रेनिंग भी दे रहीं हैं। पिछले 15 सालों से ईजाद नाम से संगठन चला रही अख्तरी बेगम मुस्लिम, पिछड़े और दलित समुदाय की लड़कियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का काम कर रही हैं |

अपना संगठन शुरू करने से पहले अख्तरी बेगम ने सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ‘नवभारत जागृति केंद्र’ से जुड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के लिए काम किया | अख्तरी बेगम शुरूआत से ही महिलाओं और बच्चों के लिए काम करना चाहती थीं | यही वजह रही कि जब उन्होने एनजीओ के काम को अच्छे से सीख लिया तो साल 2002 में उन्होने अपनी संस्था ईजाद की स्थापना बिहार के पटना शहर में की | अख्तरी बेगम ना सिर्फ अपनी ज़िंदगी में पढ़ने का कोई मौका छोड़ा, बल्कि दूसरी मुस्लिम और गरीब लड़कियों को वैसी दिक्कतों का सामना ना करना पड़े इसके लिये वो उनकी राह आसान बनाने में जुटी हैं | बिहार के पटना (Patna, Bihar) शहर में ‘ईजाद’ (Ejaad) नाम से अपना संगठन चलाने वाली अख्तरी बेगम 6 साल से लेकर 20 साल तक की लड़कियों को पढ़ाने का काम कर रही हैं |

जिस लड़की की पढ़ाई के खिलाफ कभी उसका सारा गांव एकजुट गया था, उसी लड़की की बदौलत आज आसपास के करीब 25 गांव की लड़कियों को पढ़ने का मौका मिल रहा है |

niraj kumar

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एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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