विकलांगता उनको अपने सपने पुरे करने से नहीं रोक पाती है , दिव्यांग होने के वावजूद जिंदगी को जीतने वाले इस  शख्स को कहते है ‘ दीपक कुमार ‘, | जिंदादिली से भरा हुआ यह इंसान खुद दोनों पैरों से दिव्यांग हैं पर मेहनत और इच्छा-शक्ति से दी मुसीबत को मात और छीन लाये है ज़िंदगी से उम्मीद और खुशियाँ और आज बन गये है दिव्यांगो के लिए  प्रेरणा |’ विकलांग अधिकार मंच बिहार‘ के सेक्रेटरी दीपक कुमार  |

विकलांग अधिकार मंच बिहार (Vikalang Adhikar Manch) - Deepak Kumar - Patna - Bihar Story is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India
बायें तरफ खड़े संस्था के सचिव दीपक कुमार

जिंदादिली से भरपूर एक वास्तविकता

एक दिव्यांग (Disable People) के जिंदगी में मुसीबत की कमी नहीं होती ,कई बार तो इतनी बड़ी मुसीबत आ पड़ती है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। शारीरिक विकलांगता के कारण कई लोग इन मुसीबतों से इतने परेशान और हताश हो जाते हैं कि उनकी ज़िंदगी से जोश, उम्मीद , विश्वास जैसे जज़बात ही गायब हो जाते हैं। लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि अगर इंसान के हौसले बुलंद हो और उसकी इच्छा शक्ति मजबूत, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी छोटी लगने लगती है।

पटना (Patna) से सटे फुलवारी शरीफ के  भुसौला दानापुर पोखर के रहने वाले दीपक कुमार (Deepak Kumar) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिसने अपने बुलंद हौसलों और मजबूद इच्छा शक्ति से ऐसी ही एक अकल्पनीय और बड़ी मुसीबत को मात देकर जीवन में कुछ कर गुजरने की ठानी |

दिव्यांगो (Disable People) के जीवन में आनेवाले समस्याओं को देखकर दीपक एवं उनके कुछ दिव्यांग दोस्तों ने वर्ष 2008 में विकलांग अधिकार मंच बिहार (Vikalang Adhikar Manch) की स्थापना की| इस संगठन के सारे सदस्य दिव्यांग हीं है| चूँकि जीवन में क्या-क्या परेशानियां हो सकती है ये कोई भुक्त भोगी हीं महसूस कर सकता है, दीपक कुमार (Deepak Kumar) खुद दोनों पैरों से दिव्यांग हैं और संस्था के सचिव भी हैं |

दिव्यांगो की कराते है शादी

दीपक (Deepak Kumar) बिहार स्टोरी (Bihar Story) टीम को बताते है की “विकलांग अधिकार मंच बिहार (Vikalang Adhikar Manch – Bihar) का मुख्य उद्धेश्य दिव्यांगो (Disable People) को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करना तथा उनको स्वरोजगार प्रदान करना तो हैं ही साथ हीं पिछले दो वर्षो से विकलांगो (Disable People) का विवाह भी करवा रहे हैं |

दिव्यांगो (Disable People) के मदद के लिए तो कुछ लोग सामने आते है पर एक दिव्यांग इन्सान का भी विवाह हो सकता है इसकी पहल अभी तक किसी ने नहीं की थी लेकिन दीपक कुमार (Deepak Kumar) विकलांग अधिकार मंच बिहार (Vikalang Adhikar Manch – Bihar) के माध्यम से इस अनूठी पहल की शुरुवात की |

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दीपक कुमार (Deepak Kumar) का कहना है कि “कार्य इतना आसन न था क्योकि इस सराहनीये कार्य में सबसे बड़ी बाधा विवाह करने के लिए तैयार दिव्यांग लड़के के परिजन  ही बन जाते थे” |  दीपक कुमार को उनलोगों को काफी समझाना पड़ता था कि ये दिव्यांग हुए तो क्या हुआ इनको भी सामान्य जीवन जीने का अधिकार है | ये भी शादी कर सामान्य मनुष्य की तरह जिन्दगी जी सकते हैं |

तत्पश्तात दीपक कुमार (Deepak Kumar) ने वर्ष 2016 में एक परिचय सम्मेलन का आयोजन किये ताकि लड़का लड़की आपस में मिल सके सम्मेलन के बाद वहाँ सात जोड़े शादी के लिए तैयार हुए | उन सातों जोड़ो की शादी विकलांग अधिकार मंच बिहार (Vikalang Adhikar Manch – Bihar) तत्वाधान में ट्रांसपोर्ट नगर पटना में संपन्न कराइ गई , जिसके मुख्य अतिथि तात्कालिक राज्यपाल रामनाथ कोविंद जी थे |

राज्यपाल महोदय ने भी बिहार विकलांग अधिकार मंच (Vikalang Adhikar Manch – Bihar) के इस अनूठे पहल की दिल से प्रशंसा की थी | फिर 2017 में नौ जोड़े की शादी करवाया गया |

2018 में 11 जोड़ों की होगी शादी

दीपक के अनुसार अब तक  2018 में 11 जोड़े को चिन्हित किया जा चूका है जिसकी शादी इसी वर्ष होगी | सबसे कमाल की बात ये है की इन शादियों में होने वाले खर्च में सरकार का कोई योगदान नहीं होता है | इसमें होने वाले खर्च को कार्पोरेट जगत के कुछ भले लोग उठाते हैं |  विकलांग अधिकार मंच बिहार दिव्यांग (Vikalang Adhikar Manch – Bihar) लोगो की शादियों के साथ-साथ घर-गृहस्थी के लिए बर्तन, जीविका के लिए सिलाई मशीन और जेवर का भी प्रबंध कराती है |

दीपक कुमार और कुमारी वैष्णवी मिलकर बढ़ा  रहे कारवां

2008 में दीपक कुमार और कुमारी वैष्णवी ने मिलकर जो ‘विकलांग अधिकार मंच बिहार’ की नींव  रखी वह आज पुरे बिहार में अपना सिक्का जमा रही है|  इनके संस्था के सक्रिय सदस्यों की संख्या ग्यारह हजार से भी अधिक है |

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किसी भी दिव्यांग के लिए ट्राईसाइकल कितना जरुरी होता है वो कोई दिव्यांग ही महसूस कर सकता है बचपन में जब दीपक  को ट्राईसाइकल की जरूरत हुई तब उनके पिता जी उनको अपने कांधे पर उठाकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते थे| काफी मुश्किलों के बाद उन्हें ट्राईसाइकल प्राप्त हुआ | तब उन्होंने तय किया की जो तकलीफ हमने झेली है कोशिश करूंगा की कोई भी दूसरा दिव्यांग इस तरह ऑफिसों के चक्कर न काटे |

बात सिर्फ ट्राईसाइकल की नहीं थी, सरकार द्वारा जो भी योजनायें दिव्यंगो को मिलती है उसकी जानकारी दिव्यंगो का देना और उसे हासिल करने के लिए मदद करने के लिए ही दीपक कुमार ने  विकलांग अधिकार मंच बिहार की स्थापना की थी | साथ हीं ये राष्ट्रीय विकलांग मंच से भी जुड़े हुए हैं |

दीपक कुमार (Deepak Kumar)  विकलांग अधिकार मंच बिहार (Vikalang Adhikar Manch – Bihar) के द्वारा दिव्यंगो के जीविकोपार्जन लिए निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र भी खोल रखे हैं |

दीपक कुमार का दुसरे दिव्यांगो की मदद करने का सिलसिला यही आ कर नहीं रुका इसके अलावा भी दीपक दिव्यांगो को खुद के खर्चे पर वैष्णो देवी के यात्रा पर और देश के प्रमुख दार्शनिक स्थानों के सैर पर भी ले जाते है |

ईश्वर से कामना है दीपक और वैष्णवी को दुनिया जीतने कि ताकत दे, उनके साहस को सलाम , बिहारस्टोरी की तरफ से  ढेर सारी शुभकामनाये !

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar