दोस्तों जिस तरह कोई कुम्हार गीली मिटटी से कोई भी बर्तन बना देता है ठीक उसी तरह हमारे बच्चें भी गीली मिटटी की तरह होते है, अब आप के ऊपर है की आप अपने बच्चों में अच्छे आदतों का श्रीजन कैसे करेंगे, जब वे अच्छी आदतों को सीखेंगे तभी उनका भविष्य उज्जवल होगा तथा जीवन के सफ़र में आने वाली बाधाओं को सहजता पूर्वक पार कर सकेगा | बच्चों की अच्छी आदतों में एक आदत बचपन से ही पैसे की बचत करना तथा संग्रह करना भी है | आज हम चर्चा करेंगे बच्चों के एक अनोखे बैंक के बारे में जो ग़रीब बच्चों की एक सामूहिक गुल्लक है जिसमें पटना के झुग्गी-झोपड़ी इलाक़ों के पाँच सौ से ज़्यादा बच्चे अपनी बचत के पाँच-दस रुपए जमा करते हैं और इन पैसों को किताब-क़लम के अलावा अपनी आकस्मिक ज़रूरतों के लिए इस्तेमाल करते हैं |

गुल्लक बच्चा बैंक' (Gullak Baccha Bank) -Patna -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

14 नवम्बर 2009 को हुआ था उद्घाटन

बच्चे जो फिजूलखर्ची द्वारा पैसे की बर्बादी करने की बुरी आदत से छुटकारा दिलाने के लिए हीं इस अनोखे बैंक की शुरुवात हुई थी | जहाँ बच्चे अपने द्वारा बचत किये गए न्यूनतम एक रूपए भी इस बैंक में जमा करा सकता है तथा जरुरत के हिसाब से निकाल सकता है | जैसे पंद्रह वर्षीय इंद्रजीत ने जब ‘बच्चा बैंक'(Gullak Baccha Bank) से दो सौ रुपये निकालकर बीमार माँ का इलाज करवाया तो उन्हें विश्वास हुआ कि अगर उन्होंने पैसे पैसे बचाकर खाते में नहीं जमा किए होते तो माँ का इलाज नहीं हो पाता |

‘बच्चा बैंक’, ग़रीब बच्चों की एक सामूहिक गुल्लक

‘बच्चा बैंक’, (Gullak Baccha Bank) ग़रीब बच्चों की एक सामूहिक गुल्लक है जिसमें पटना (Patna, Bihar) के स्लम बस्ती के पाँच सौ से ज़्यादा बच्चे अपनी बचत के पाँच-दस रुपए जमा करते हैं और इन पैसों को किताब- क़लम के अलावा अपनी आकस्मिक ज़रूरतों के लिए इस्तेमाल करते हैं | यह बैंक बिहार सरकार के मानव संसाधन विकास विभाग की संस्था बालभवन किलकारी के ज़रिए संचालित होता है | झुग्गी-झोपड़ी इलाक़ों के प्रतिभासंपन्न बच्चों की योग्यता को निखारने, उनमें बचत की आदत डालने तथा पैसे और संस्था के प्रबंधन के गुणों को विकसित करने के मक़सद के लिए ‘बच्चा बैंक’ की शुरूआत हुई थी |

बैंक का प्रबंधन और संचालन भी बच्चे ख़ुद करते हैं

बच्चा बैंक (Gullak Baccha Bank) की सबसे खास बात यह है की बच्चों के इस बैंक का प्रबंधन और संचालन भी बच्चे ख़ुद करते हैं, और जमा किए गए पैसों को स्थानीय भारतीय स्टेट बैंक के खाते में जमा कराया जाता है | ‘बच्चा बैंक'(Gullak Baccha Bank) के प्रबंधक 14 वर्षीय नवीन कुमार हैं | उन्हें बैंक से पाँच सौ रुपए तन्ख्वाह मिलती है | इसी उम्र की नेहा उपप्रंबधक की ज़िम्मेदारी निभाती हैं और उनका मेहनताना तीन सौ रुपए है |

नवीन कुमार को शुरू में काफी झिझक होती थी लेकिन इस काम में लगने के बाद जवाबदेही का एक एहसास पैदा हुआ है और नवीन कुमार आत्मविश्वास भी काफ़ी बढ़ गया | “हम एक टीम भावना से काम करते हैं और धीरे-धीरे महसूस होने लगा है कि हमारे अंदर नेतृत्व क्षमता विकसित हो रही है” |

हर बच्चे की अपनी पासबुक है जिसपर खाताधारी की तस्वीर और पता भी दर्ज हैं

खाते में पैसे जमा कराने आये सोलह वर्षीय गौतम कहते हैं, “ये रुपए (30 रुपये) मेरी माँ ने मुझे दिए हैं. चूँकि एक बार में ज़रूरत भर पैसे उनके पास भी नहीं होते इसलिए हम थोड़ा-थोड़ा जमा कर अपनी किताब, कापी वगैरह से बचा लेते हैं” |

niraj kumar
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