मित्रों कहा जाता है की बेटे भाग्य से तो बेटी का जन्म बड़े सौभाग्य से होता है पर ये बाते सिर्फ कहने मात्र के लिए ही है | सरकार द्वारा कन्या भूर्ण हत्या अबैध घोषित होने के बावजूद आज भी कई माता-पिता कोख में पल रहे अपनी बेटी को किसी लालची चिकित्सक के हांथो कोख में ही मर डालते हैं इस तरह के लोग हमारे समाज के लिए बदनुमा दाग की तरह है | दूसरी तरफ हमारे समाज में डॉ नीलम सिंह जैसी चिकित्सक भी हैं जो अपने अस्पताल में लड़की के जन्म लेने पर शगुन के तौर पर 1000 रूपए देती हैं |

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डॉ नीलम सिंह यादव हर रोज मनाती हैं महिला दिवस

बिहार के रोहतास (Rohtas, Bihar) जिले के डेहरी डालमियानगर शहर में एक महिला चिकित्सक (Female Doctor) हैं नाम है डॉक्टर नीलम सिंह यादव (Dr. Neelam Singh Yadav), वैसे तो पूरी दुनिया 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाती है लेकिन डॉ नीलम सिंह यादव (Dr. Neelam Singh Yadav) एकलौती महिला डॉक्टर (Female Doctor) है जिनके लिए सालों भर महिला दिवस है | डॉ नीलम सिंह यादव (Dr. Neelam Singh Yadav) अपने हॉस्पिटल में लड़की के जन्म लेने पर शगुन के तौर पर 1000 रूपए  देती हैं जी हां सुन कर भले ही आपको आश्चर्य हो लेकिन यह सत्य है |

बेटा-बेटी में अंतर ना करने के लिए अभियान भी चलाती हैं

अबतक हजारों महिलाओं का सुरक्षित प्रसव करवा चुकी, डॉ नीलम सिंह यादव (Dr. Neelam Singh Yadav) शहर की प्रतिष्ठित डॉक्टर हैं | महिला सशक्तिकरण (Female Empowerment) और बेटियों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से डॉ नीलम सिंह यादव ((Dr. Neelam Singh Yadav) हॉस्पिटल में किसी भी परिवार में लड़की जन्म लेने पर 1000 रूपए शगुन देती हीं है इसके अलावा वो  लड़कियों को पढ़ाने के लिए ,लड़का और लड़की में अंतर ना करने के लिए एक अभियान चला रही हैं | दक्षिण बिहार का यह क्षेत्र लड़का और लड़की में भेद करने में काफी बदनाम रहा है इसलिए लोगों की भलाई के लिए इस अनूठे कार्य को अंजाम दे रही हैं डॉक्टर साहिबा, ताकि समाज भी लड़का लड़की में भेद ना करें और समान रूप से बच्चों की परवरिश करें  |

वर्ष 2009 से ही जुटी हैं इस सामाजिक कार्य में

यह शुभ कार्य डॉक्टर नीलम साल 2009 से ही कर रही है इसके अलावा वह अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन के पटना प्रमंडल के अध्यक्ष के तौर पर भी कार्य कर रही हैं | जिसके कारण उन्होंने समय-समय पर कई महिलाओं को न्याय दिलवाया | मानव अधिकार के लिए काम करने के दौरान ही डॉक्टर नीलम महिलाओं की समस्याएं और बेटी से भेदभाव के बारे में ज्यादा जानकारी मिली | इस कारण वे ना सिर्फ बेटियों के जन्म पर शगुन देना शुरू किया बल्कि कमजोर वर्ग की लड़कियों को पढ़ने की भी सुविधा उपलब्ध करा रही हैं | डॉ. नीलम अपने इस पहल से ये संदेश देने की कोशिश करती हैं कि बेटी के पैदा होने पर निराश होने की जरूरत नहीं है | जरूरत है तो अपनी सोच बदलकर बेटों और बेटियों के भेद को खत्म करना और दोनों को आगे बढ़ने का समान अवसर देना है |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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