हम सभी जानते है की बच्चे हमारे देश के भविष्य हैं | वैसे में बच्चों को शुरुवात में ही गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और सही दिशा निर्देश मिलना अत्यंत आवश्यक है | अगर बच्चों को सही मार्गदर्शन और शिक्षा न मिले तो देश का भविष्य बनने के वजाए खुद का जीवन भी अन्धकारमय हो जायेगा | हमारे बच्चो के साथ एसा न हो इसके लिए बिहार के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर के क्षितिज आनंद और वत्सला यूथ लीडरशिप डेवलपमेन्ट प्रोग्राम’ के जरिए प्राथमिक शिक्षा में सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं |

यूथ लीडरशिप डेवलपमेन्ट प्रोग्राम’ (Youth Leadership Development Programme) -Kshitiz Aanand & Vatsala - Saharsa -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

पति पत्नी दोनों ने लिक से हट कर कुछ करने की ठानी

क्षितिज आनंद (Kshitiz Aanand) और वत्सला (Vatsala) दोनों पति-पत्नी है और बिहार के सहरसा (Saharsa, Bihar) जिले के सिमरी बख्तियारपुर के निवासी तथा प्रख्यात चिकित्सक डाक्टर आनंद भगत व रंजना भगत के पुत्र व पुत्रबधू हैं | उच्च शिक्षा प्राप्त कर जब ये दोनो परिणय सुत्र में बंधे तो समाज के लिए लिक से हट कर कुछ अलग और नया करने का आपस में निर्णय लिया, क्योंकि आज की दिशा हीन शिक्षा प्रणाली को देख कर क्षितिज आनंद  और वत्सला को लगा की इस शिक्षा से न तो देश का भला होगा और न हीं इन बच्चों का|

तब उन्होंने ने 201२ में हैप्पी होराइजंस ट्रस्ट नाम की गैर लाभकारी संस्था की नीव डाली जिसके तहत क्षितिज आनंद (Kshitiz Aanand) और वत्सला (Vatsala) गांवों के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता ‘यूथ लीडरशिप डेवलपमेन्ट प्रोग्राम’ (Youth Leadership Development Programme) के जरिए सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं |

फेलोशिप प्रोग्राम द्वारा बच्चों को बनाते हैं समर्थ

क्षितिज आनंद (Kshitiz Aanand) और वत्सला की यह संस्था यूथ लीडरशिप डेवलपमेन्ट (Youth Leadership Development) हाई स्कूल की लड़कियों को अपने फेलोशिप कार्यक्रम द्वारा और अधिक समर्थ बनाने की कोशिश करती है, इन कार्यक्रमों में स्टोरी टेलिंग, क्राफ्ट जैसी व्यापक गतिविधियों के कौशल विकास पर जोर दिया जाता है | इस तरह के कार्यक्रम शुरू करने के बारे में क्षितिज और वत्सला ने तब सोचा जब वे अपनी शादी के बाद पहली बार अपने जन्म स्थान बिहार के सहरसा (Saharsa, Bihar) जिले के सिमरी बख्तियारपुर में पहुंचे। यहां उन्हें इस क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा की खराब हालत का एहसास हुआ | हालांकि अचानक से पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता पर शुरुवात कहीं न कहीं से करनी हीं थी | इसलिए उन्होंने अपनी इस संस्था यूथ लीडरशिप डेवलपमेन्ट  (Youth Leadership Development) द्वारा बच्चों को इक्कठा किया| इसके लिए इन्होने सरकारी स्कूलों को चुना |

शिक्षा को दिलचस्प बनाने की कोशिश –

जब क्षितिज आनंद और वत्सला को लगा कि प्राथमिक स्तर की पढ़ाई सिर्फ किताबी पाठ्यक्रम में बंधकर रह गई है | मुश्किल से ही कोई और गतिविधि होती होगी जो बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को और दिलचस्प और सरल बनाती हो | अगर उनके पास कोई प्रेरणा नहीं होगी तो वो क्यों पढ़ना जारी रखेंगे?’ बाद वे दूसरे इलाके के कई और स्कूलों में गए और उन्होंने पाया कि स्थिति सभी जगहों पर लगभग एक जैसी ही है | वत्सला, जो कि खुद भी पत्रकारिता की पृष्ठभूमि से आती हैं, किस्सागोई (स्टोरी टेलिंग) करती हैं और दोनों मिलकर कोशिश करते हैं कि बच्चे इन स्कूलों में ऐसी गतिविधियों में भाग लें |
क्षितिज बताते हैं, ‘शुरुआत में बच्चे दिलचस्पी नहीं दिखाते थे। शायद इसलिए क्योंकि यह सब उनके लिए एकदम नया अनुभव है, लेकिन धीरे-धीरे हमलोग देख रहे हैं कि वे इस हिचकिचाहट से बाहर निकल रहे हैं।फिर से बच्चे सवाल पूछना शुरू कर देते हैं और फिर ज्यादा से ज्यादा कहानियां भी सुनना चाहते हैं |

बदलाव के लिए शुरुआत करना जरूरी है

इस पहल की शुरुआत क्षितिज और वत्सला (Vatsala) ने अकेले ही की थी लेकिन अब उनके साथ पूरी सक्रिय टीम है, जो बेंगलुरु, दिल्ली और बिहार (Bihar) तक काम करती है | दो बच्चों को चैंपियंस बनाने से शुरू हुई मुहीम पांच सालों में यह संख्या 16 तक पहुंच गई है | सबसे अच्छी बात यह है कि दो लोगों को प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने का प्रस्ताव भी मिला है। ऐसा उनके बच्चों के साथ जुड़ाव को देखते हुए किया गया | स्थानीय स्तर पर वे लोगों के प्रेरणा और रोल मॉडल बन गए हैं |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar

Latest posts by niraj kumar (see all)