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दुनिया में ऐसी कई बड़ी सर्च कंपनिया हैं जिनमे लोग काम करने के सपने देखते है, और कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने इस सपने को साकार भी किया है| अब इस सूचि में बिहार की राजधानी पटना खगौल की रहने वाली मधुमिता शर्मा का भी नाम जुड़ गया है| मधुमिता को दुनिया की सबसे बड़ी और नामचीन कंपनी गूगल ने काम करने के लिए बुलाया है| ख़ास बात तो यह हैं की दुनिया के बड़ी सर्च कंपनियों में शुमार गूगल ने मधुमिता को टेक्निकल सोल्यूशन इंजीनियर पद पर नौकरी के लिए एक करोड़ आठ लाख रुपये सालाना दिया गया है|

आसानी से  नहीं मिली ये सफलता

मधुमिता की यह सफलता इतनी भी आसान और सरल न थी| गूगल में नौकरी पाने के लिए उन्हें इंटरव्यू के सात राउंड क्लियर करने पड़े, जो कि नवंबर से जनवरी के बीच आयोजित किए गए थे| यह इंटरव्यू विदेश में लिया गया| यह ढाई महीने तक अलग-अलग देशों में ऑनलाइन इंटरव्यू होते थे| इसके लिए बैंगलूर में एक, सिडनी में दो, सिंगापुर में एक और स्विट्जरलैंड में तीन इंटरव्यू हुए| मधुमिता ने इंटरव्यू के लिए 6 से 7 महीने की कड़ी तैयारी की| मधुमिता ने अपने फेसबुक पे यह एक्सपीरियंस शेयर करते हुए लिखा “The hardest decision ever taken, when your dream asked for a biggest sacrifice to do. Moment to leave everything back here for a new beginning and experience.”

मधुमिता ने सोमवार को स्विट्ज़रलैंड में स्थित गूगल के हेड ऑफिस में टेक्निकल सोल्युशन इंजीनियर के तौर पर ज्वॉइन भी कर लिया है| मधुमिता को इससे पहले कई बड़े प्रतिष्ठित कंपनिया अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट और मर्सिडीज से भी उन्हें ऑफर मिले हैं जहाँ  उन्हें २३ लाख, २८ लाख पैकेज का ऑफर था। लेकिन मधुमिता ने गूगल ज्वाइन करने का ही पूरा मन बनाया हुआ था। मधुमिता की प्रारंभिक पढ़ाई पटना स्थित डीएवी स्कूल में हुई| इसके बाद राजस्थान के जयपुर स्थित आर्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीटेक किया है| मधुमिता अपने माता-पिता और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपनी प्रेरणा (आइकॉन) मानती है। मधुमिता के पिता सुरेंद्र शर्मा आरपीएफ में सहायक कमांडेंट पद पर है| साथ ही एक भाई इंजीनियर और एक बहन डॉक्टर है| मधुमिता की मां घरेलू महिला है|

मधुमिता जब अपनी सफलता पर पीछे मुड़कर देखती हैं तो इससे जुड़ी कई खट्टी मीठी यादें शेयर करने में उन्हें मजा आता है। वे बताती हैं कि जब उन्होंने इंजीनियर बनने की पहली बार इच्छा जाहिर की थी तो पिता ने कहा कि ये सब लड़कियों के लिए फील्ड नहीं है। बात में बेटी की रुचि को देखते हुए उन्होंने इंजीनियर बनने की इजाजत दे दी।

मधुमिता बिहार के छोटे कस्बे खगौल की रहने वाली और बड़े कॉलेजों में शिक्षा नहीं मिलने के बावजूद मधुमिता ने एक बड़ा पैकेज लेकर बिहार ही नहीं देश में बेटियों का मान बढ़ाया है| मधुमिता ने दिखा दिया की कम सुविधा में ज्यादा उप्लाब्दियों को भी पाया जा सकता है| मधुमिता की इस सफलता भरी कामयाबी को देख माता पिता और परिवारवालों के साथ साथ खगौलवासी भी काफी खुश हैं और जश्न मना रहा है|

Abhilasha Singh

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Editor at BiharStory.in
Abhilasha Singh as an editor in BiharStory.in, goal is to provide a compelling posts and upto date with a society and culture news.
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