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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले,ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है | ये पंक्तिया बिहार सारण जिले के पानापुर की बेटी सविता महतो पर बिल्कुल सटीक बैठती है जिनका नाम देश की सबसे प्रभावशाली यानी 100 महिला फेस 2018 में शामिल हुआ है | महिला सशक्तिकरण की दिशा में कार्य करने वाली वूमन इनोवेटर नामक संस्था द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में देश की लाखों महिलाओं ने आवेदन दिया था, जिसमें सविता का चयन हुआ | सविता महतो को 30 अप्रैल को दिल्ली में आयोजित समारोह में अवार्ड देकर सम्मानित किया गया है | 100 वुमेन में वह 10 वें नंबर पर रही।

बुलंद हौसले की मलिका है सविता महतो

पानापुर में जन्मी सविता महतो खुद के हौसले के दम पर दुनिया को दिखा दिया की इस पृथ्वी पर कुछ भी असंभव नहीं है | सविता महतो अब महिला सुरक्षा का संदेश लेकर साइकिल से दुनिया की यात्रा कर रही है साथ ही  सविता साइकिल यात्रा से महिलाओं पर हो रहे यौन हिंसा के खिलाफ पूरी दुनिया में आवाज भी उठा रही है जिसमे  महिला सुरक्षा व महिलाओं पर हो रहे यौन हिंसा के खिलाफ पूरी दुनिया में साइकिल से संदेश देगी | इस यात्रा में सविता पांच हजार किलो मीटर की यात्रा नेपाल में पूरी करेगी | सविता महतो इसके पहले भी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को लेकर देश के 29 राज्यों में 12,500 किलोमीटर का सफर किया था | इस दौरान वह स्कूल -कॉलेज में जाकर छात्र -छात्राओं से रूबरू होकर अपना संदेश दी थी  | उसके बाद वह नदी को बचाने एवं स्वच्छ रखने के लिए हरिद्वार से यात्रा प्रारंभ की थी |

अब एवरेस्ट फतह करना चाहती हैं सबिता

अब सविता का सपना एवरेस्ट फतह करना है लेकिन वह आर्थिक तंगी के कारण नहीं कर पा रही है, सविता कहती है कि बिहार सरकार इसे आर्थिक मदद करेंगी तो वह माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू करेगी|

कोलकाता में पिता हैं मछली के खुदरा  व्यापारी

सविता महतो के पिता कोलकाता में मछली बेचकर घर परिवार का पालन पोषण करते हैं | वहां पर्वत देखकर इसके बारे में जानने की इच्छा होती थी | प्लस टू के बाद कोलकाता विश्वविद्यालय में स्नातक में भूगोल विषय में नामांकन हो गया | पर्वत व पहाड़ के बारे में पढऩे से इसे नजदीक से देखने की इच्छा हुई तो मां व पिता जी से जिद करके मैंने हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान दार्जिलिंग में बेसिक कोर्स, उच्च स्तरीय कोर्स एवं साहसिक कोर्स किया |

कोर्स करने के बाद सविता पर्वतारोहण करना शुरू कर दिया | वर्ष 2014 मैने रेन पर्वत सिक्किम हिमालय पर जिसकी ऊंचाई 5030 मीटर है, चार दिन में चढ़ाई की | इसके बाद मेरा यह सिलसिला शुरू हो गया | मैंने अब तक सबसे ऊंची चढ़ाई गढ़वाल हिमालय के

niraj kumar

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एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar
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