गर्मी का मौसम आते हीं बच्चों के स्कुल में भी छुट्टी हो जाती है, फिर हर इन्सान इस भीषण गर्मी से राहत पाने के बारे में सोंचता है की कही घूम आयें | और जब बात घुमने की हो तो काश्मीर और शिमला से कम किसी की नजर ही नहीं जाती लेकिन वहां जाने के लिए भी एक मोटी रकम की जरुरत होगी | अगर आपके पास ज्यादा पैसे नहीं है पर आप किसी हिल स्टेशन पर हीं जाना चाहते हैं तो फ़िक्र की कोई बात नहीं है आपके बिहार (Bihar) में भी मौजूद है मिनी कश्मीर जहां लोग गर्मियों की छुट्टियां बिताने पहुंचते हैं।

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बिहार के नवादा जिले में स्थित है ये ‘मिनी काश्मीर’

बिहार के नवादा (Nawada, Bihar) जिले का ककोलत जलप्रपात (Kakolat Waterfall) जिसे प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से यहां का कश्मीर कहा जाता है। यह जलप्रपात (Kakolat Waterfall) सदियों से प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। नवादा जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर गोविंदपुर प्रखंड में स्थित ककोलत जलप्रपात (Kakolat Waterfall) का न केवल पुरातात्विक बल्कि पौराणिक महत्व भी है। प्रत्येक वर्ष 14 अप्रैल को यहां पांच दिवसीय ‘सतुआनी मेला’ लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।

कोल जाति के  निवास के कारण नाम पड़ा  ककोलत

जनश्रुतियों के अनुसार, वैशाखी के अवसर पर इस जलप्रपात (Kakolat Waterfall) में स्नान करने से सांप योनि में जन्म लेने से प्राणी को मुक्ति मिल जाती है। कहा जाता है कि त्रेता युग में एक राजा किसी ऋषि के श्राप से अजगर बनकर इस जलप्रपात के समीप रह रहा था, मार्कंडेय ऋषि ने उसे जलप्रपात में स्नान करने को कहा और उसे सांप योनि से मुक्ति मिल गई थी। इस क्षेत्र में कोल जाति के लोग निवास करते हैं। इस क्षेत्र का नाम ककोलत पड़ने का एक कारण यह भी हो सकता है।

यह गया और बिहारशरीफ के निकट, नवादा जिला मुख्यालय से 33 कि० मी० दक्षिण- पूरब में स्थित हैं। ककोलत जलप्रपात (Kakolat Waterfall) हज़ारीबाग़ कि पर्वत श्रेणी से बहती हुई लहबर पहाड़ी नदी लोहदंड पहाड़ी से 150 फीट कि ऊँचाई से गिर कर गहरे जलाशय व धरा का रूप लेती हैं। बिहार (Bihar) के सभी जलप्रपातों में इसकी विषेशता हैं कि इसे (कृत्रिम रूप से घेरकर ) पर्यटको के सुरक्षित स्नान को ध्यान में रखकर इसका विकास किया गया हैं ।

यहाँ गर्मी के दिनों में पहाड़ के भीतर से निकलने वाली जलधारा इतनी ठंडी रहती हैं कि वह भीषण गर्मी में भी गर्मी का अहसास नहीं होता। इस पानी में खाना इतना स्वादिस्ट होता हैं कि पर्यटक इसे वर्षो याद रखते है। ककोलत के बारे में मान्यता हैं कि अपने वनवास के क्रम में महाभारत कल में पांडवो ने यहाँ एक ऋषि के श्राप से त्रेतायुग में साँप बने राजा निगस को मुक्ति दी थी । माना जाता हैं कई यहाँ जो भी नहाता हैं उसे सर्पयोनी से मुक्ति मिल जाता हैं ।
ककोलत का जलप्रपात (Kakolat Waterfall) अपनी नैसर्गिक सौंदर्य के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं। ककोलत जलप्रपात पहुँचने के एक कि० मी० पहले से ही शीतलता का अनुभव होने लगता हैं । पटना – राँची सड़क मार्ग पर फतेहपुर मोड़ पर ककोलत द्वार बनाया गया हैं जिस पैर इतिहास अंकित हैं ।
मार्च से जुलाई तक यहाँ पर्यटको की भरी भीड़ रहती हैं । 14 अप्रैल से यहाँ चार दिवसीय मेला भी लगता हैं- जिसे बिसुआ मेला कहा जाता हैं, जिसमे बिहार तथा झारखण्ड राज्यो से हज़ारो लोग आकर शामिल होते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा ककोलत का पुरातात्विक महत्व भी हैं । ककोलत कि पहाड़ियो में पाषाणकालीन उपकरण मिले हैं । ककोलत के निकट वन विभाग का रेस्ट हाउस व इकतारा में जिला परिषद् का डाकबंगला हैं । देश के प्रमुख चार जल प्रपातों पैर भारत सरकार ने 03.10.2013 को 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया था, जिसमे ककोलत जलप्रपात (Kakolat Waterfall) सम्मिलित्त था।

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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