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पिछले कुछ सालों से लगातार कामयाबी हासिल करने वाले SEEtalks  मुंबई के तीसरे सालाना कार्यक्रम में महाराष्ट्र के लोगों की ख़ासी दिलचस्पी बिहार के  तीन ख़ास चेहरों में है  जो इस बार बिहार से शिरकत करने वाले हैं | दरअसल  SEEtalks  मुंबई में हर साल समाज के हर तबके से ऐसे लोगों की कहानियां चुनता है जो हमारे समाज में बदलाव लाने तथा प्रेरणात्मक  उदाहरण पेश करते है | 16 जून को आई०आई०टी० बॉम्बे में होने वाले SEEtalks में बिहार से आनंद कुमार ( सुपर 30 के संस्थापक ), रंजन मिस्त्री (बिहार के सबसे युवा सोशल इंटरप्रेन्योर और कैंपस वार्ता के संस्थापक ) और रितु जैसवाल ( सिंघ्वानी पंचायत की मुखिया) अपनी कहानी दुनिया के सामने रखने वाले है |

मुंबई में आयोजित इस सालाना जलसे में बिहारियों का दिखेगा जलवा

मशहूर शख्सियत हो या आम इंसान पर  किस्सा तो हर किसी का होता है | दुनिया में किस्से बहुत है पर वो किस्सा जो  अपना असर लोगों के दिलों -दिमाग पर अपनी छाप छोड़कर चली जाये  वही होता है दमदार किस्सा और उस किस्से को दमदार बनता है उसका नायक | नायक धरती पर असमान से नहीं उतरते बल्कि ये भी आपके और हमारे बीच से आने वाला एक आम इंसान ही होता है ।

SEEtalks (School of Entrepreneurial Exploration ) एक NGO  है जो समाज से जुड़े उन नायकों की कहानी अपने स्टेज से प्रसारित करती है | पिछले वर्षों में भी  इस शो में बिहार से  कुछ नाम जुड़े  और इस साल भी बिहार से उनलोगों का नाम जोड़ा गया है जो बिहार को एक नयी दिशा दे रहे  है |16 जून को आईआईटी मुंबई के प्रांगण में करीब 500 लोगों के सामने जब ये तीन बिहारी अपनी कहानियां बतायेंगे तो युवा श्रौताओं का प्रेरित होना शायद स्वभाविक होगा।  आइए जानते है इन बिहारियों के बारें में –

आनंद कुमार , सुपर 30 के संस्थापक

इनके नाम से कोई अनजान नही है , हर बच्चे–बच्चे की जुबान पर इनका नाम है और ये नाम इसलिए है क्योंकी   बिहार  की राजधानी पटना में सुपर-३० नामक आईआईटी कोचिंग संस्थान किसी के पैसे से नहीं बल्कि उनके सपनों की ताकत से चलता है , आनंद कुमार सुपर 30 के जन्मदाता एवं कर्ता-धर्ता है।

Super 30 आनंद जी का स्टार्ट किया हुआ एक प्रोग्राम है जिसके अंतर्गत वे हर साल पूरे बिहार से 30 ऐसे बच्चों को चुनते हैं जो प्रतिभाशाली तो हैं पर साथ ही इतने गरीब हैं कि उनके माता-पिता उनको ठीक से पढ़ा-लिखा नहीं सकते। आनंद जी एक परीक्षा के माध्यम से ऐसे बच्चों का चयन कर अपने साथ रखते हैं और उनकी पढाई-लिखाई से लेकर खाना-पीना रहना…हर एक चीज का खर्चा भी  खुद उठाते हैं।

आनंद कुमार भले ही असाधारण व्यक्तित्व हो  लेकिन उनकी सादगी ऐसी और काम ऐसा कि हर कोई हर मंच पर उनकी कहानियां सुनने को बेकरार रहता है। आनंद कुमार उन चुनिंदा लोगों में से एक हैं जिन्होंने इतना शोहरत पाने के बावजूद भी अपनी शख्सियत नहीं बदली। आज उनकी ज़िंदगी की कहानी पर सुपर 30 जैसे फिल्म में रितिक रोशन जैसा स्टार उनकी भूमिका निभा रहा है लेकिन बिहार की छवि को पूरी दुनिया में एक सकारात्मक आयाम देने वाले कुमार  से  SEEtalks के आयोजकों को काफी उम्मीदें हैं।

रंजन मिस्त्री , बिहार का सबसे युवा सोशल इंटरप्रेन्योर और ‘कैंपस वार्ता’ के संस्थापक

ये नाम बहुत नया है लेकिन बिहार की स्टार्टअप की गलियारों के लिए मिसाल है| वैसे इनके कारनामे तो बहुत है लेकिन इन्हें लोग ज्यदा इसलिए जानते है क्योंकी ये बिहार को एक नयी दिशा देने में लगे है | ये ऐसे नामो में से है जो जहाँ जाता है वहाँ अपने नाम की छाप छोड़ कर चले आते है  , लोग कितना भी इन्हें भूलने की कोशिश कर ले लेकिन इन्हें भूल नही पाते है और भूले भी तो कैसे इतनी कम उम्र में 3 स्टार्टअप , 1 स्टार्टअप इकोसिस्टम और 17 स्टार्टअप में फंडिंग मेम्बर जो ठहरे |

कभी पैसे की कमी कारण पढ़ाई नही कर पाए थे, लेकिन इन्होने हर सब्जेक्ट में महारत हासिल की है | कंप्यूटर साइंस, इकोनॉमिक्स, मास कम्युनिकेशन , कॉमर्स, ये यही तक सिमित नही है इनके 2 रिसर्च पेपर भी है एक साइकोलॉजी में जो काफी चर्चित है |

पिछले कई सालो में इनके कारण 15 गाँव में शिक्षा आई है|  बिहार के अलावा इनकी चर्चा दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे बड़े शहरो में काफी फेमस है |

रंजन का  कहना है कि अगर बिहार की तरकी करनी है तो इसका सिर्फ एक उपाय है इंटरप्रेन्योरशिप | जहाँ पर स्टार्टअप जॉब्स लायेगे वही इनमे से कुछ ऐसे स्टार्टअप आयेगे जो शिक्षा को सुधारेंगे | इसी क्रम में इन्होने “कैंपस वार्ता” की स्थापना की जिसका काम ये है ये कि ग्रामीण इलाके के स्कूल , कॉलेज और यूनिवर्सिटी को जोड़े और उनका डिजिटल प्रेजेंस करे और उसके बाद स्कूल और कॉलेज की शिक्षा में भी सुधार करे | अभी ये कॉलेज के अन्दर इंटरप्रेन्योर सेल बनाने की कोशिश कर रहे है , जिससे स्टूडेंट के बीच स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा |

रितु जायसवाल , बिहार की सबसे ज्यादा चर्चित मुखिया

रितू जायसवाल दिल्ली के IAS अरुण कुमार जायसवाल की पत्नी हैं। अब आप सोचिये जिस महिला का पति IAS अधिकारी हो उसका भला किसी सुविधाओं से रहित गाँव से क्या वास्ता होगा, लेकिन बिहार का सिंहवाहिनी पंचायत रितू  का ससुराल है। रितू  ने जब अपने गाँव की दुर्दशा देखी तो वो दिल्ली के चकाचौंध भरे सुविधायुक्त जीवन को अलविदा कह गाँव की कायाकल्प बदलने का संकल्प लिया।

आज के समय में सब सुख सुविधाओं को छोड़कर अपने गाँव की तरक़्क़ी के लिए रितू  ने जो किया है उसकी जितनी तारीफ़ की जाए कम है। ना जाने कितने ही विकास कार्यों को रितू  ने अंजाम दिया है। शायद रितू जायसवाल  जैसे लोगों का ही गाँवो को इंतजार है जो उनकी तस्वीर को बदले और उन्हें आज के युग से जोड़ दे।

रितू जायसवाल तो ख़ास से आम बन गयी और उनके प्रयासों से ग्राम पंचायत सिंहवाहिनी आम से खास बनती जा रही है। वर्तमान में रितू जायसवाल सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड की सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया है।

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