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ईश्वर का दिया हुआ सबसे बहुमूल्य उपहार हमारी आँखे ही तो है, आप में से शायद ही कोई होगा जो किसी दृष्टिहीन को देख कर सिहर न उठता हो पर वह सिहरन क्षणिक हीं होता है जैसे ही वो दृष्टिहीन आपके सामने से गुजर जाता है आप भी उसे भूल जाते हैं, पर मगध महिला कॉलेज (Magadh Mahila College) की पूर्व प्रोफ़ेसर व समाज सेविका (Social Worker)  स्व. डॉ रत्ना शर्मा (Late Dr. Ratna Sharma) एवं किसान नवल किशोर ठाकुर (Naval Kishore Thakur) ने उस दर्द को आत्मसात करके कुछ ऐसा किया कि लोग उन्हें दिल से सलाम करते है, और लाखों लोगों की दुआओं में भी है |

Late Dr. Ratna Sharma & Naval Kishore Thakur founded Antarjyoti Balika Vidyalay for visually challenged girls in Patna | BiharStory-No.1 Digital Media House

एक प्रयास ने किया कमाल

कहते हैं कि हौसलों में अगर जान हो तो आसमां का कद भी छोटा पड़ जाता है। ऐसा ही हौसला शायद देखा गया होगा मगध महिला कॉलेज (Magadh Mahila College) की पूर्व प्रोफ़ेसर व समाज सेविका (Social Worker) स्वर्गीय डॉ रत्ना शर्मा (Late Dr. Ratna Sharma) के पास जो हमारे बिच तो नहीं है पर उनका कृत्य लाखों -करोड़ो लोगों के सामने है | कहा जात है कि 90 के दशक में वो एक बार ट्रेन से कही सफ़र कर रही थी और इसी दरम्यान एक अंधी लड़की को भीख मांगता देख उनका ह्रदय पसीज उठा और वही वो साहसिक पल था जिसमें उन्होंने ऐसा कुछ करने की ठानी जिसने हजारों नेत्रहीन बच्चियों की जिंदगी संवार दी |

उनके इस कार्य में उस समय सहयोग दिया मुजफरपुर (Muzzafarpur, Bihar)  के ही किसान नवल किशोर ठाकुर (Naval Kishore Thakur) ने जो अपने गांव में नेत्रहीन बालिकाओं को असहाय देखकर काफी दुखी थे और अपने गांव व परिवार का मोह छोड़कर नेत्रहीन बच्चियों के लिए कुछ करने को तत्पर हो थे | आज इन दोनों के प्रयासों का ही नतीजा है कि बिहार (Bihar) में कई नेत्रहीन बालिकाएं अपने भविष्य को संवार रही हैं और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आदर्श जीवन जी रही हैं |

2 जून 1993 में पड़ी विद्यालय की नीव

नेत्रहीन बालिकाओं के दुःख और दर्द से आहत होकर मगध महिला कॉलेज (Magadh Mahila College) की हिन्दी प्रोफसेर स्व. डॉ रत्ना शर्मा (Late Dr. Ratna Sharma) ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर 2 जून 1993 में बिहार नेत्रहीन परिषद की स्थापना की और अध्यक्ष बनी । उनकी इस पहल में बिहार कैडर के पहले आईजी एमके सिन्हा व कल्याणपुर की शिव माधवी देवी व मुजफ्फरपुर (Muzzafarpur, Bihar) के किसान नवल किशोर ठाकुर (Naval Kishore Thakur) भी शामिल हो गए। इसके बाद वर्ष 1994 में नेत्रहीन परिषद की ओर से अंतर्ज्योति बालिका विद्यालय (Antarjyoti Balika Vidyalay) की स्थापना की गई।

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पिछले 25 सालों से नेत्रहीन लड़कियों के उत्थान के लिए कार्य कर रहे किसान नवल किशोर ठाकुर (Naval Kishore Thakur) इन दोनों के जज़्बे से आज ‘बिहार नेत्रहीन परिषद’ (Bihar Netraheen Parishad) के अंतर्गत चलने वाला अंतर्ज्योति बालिका विद्यालय (Antarjyoti Balika Vidyalay) सूबे का इकलौता ऐसा विद्यालय बन चुका है जहां नेत्रहीन बालिकाओं को शिक्षा और रहने व खाने-पीने की सुविधा नि:शुल्क दी जा रही है | आज यहां उत्तरप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों की बालिकाएं भी शिक्षा ग्रहण कर रही हैं |

छात्राएं अपने मन की आँखों से ही पढ़ के दे रही मिसाल

जाहिर है आंखों में भले ही रोशनी न हो लेकिन अपनी प्रतिभा के जरिए सूबे का नाम रोशन करने की चाहत इनके अंदर आसमान छू रहा है। 

यहां नेत्रहीन बच्चियों ने यह साबित कर दिया है कि चाहे पीर पर्वत सी ही क्यों न हो लेकिन गंगा तो वो निकाल कर ही रहेंगी।गौरतलब है कि 2004 में यहां से 10वीं उत्तीर्ण करने वाली रेखा आज भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में अच्छे पद पर कार्य कर रही है। वहीं 2006 बैच की पूनम भी पटना स्थित एक सरकारी बैंक में नौकरी कर रही हैं। वहीं कई नेत्रहीन छात्राएं बीएड कर शिक्षिका बन चुकी हैं। इतना ही नहीं यहां से पढ़ाई करने वाली कई नेत्रहीन छात्राएं 10वीं की परीक्षा में पूरे बिहार (Bihar) में टॉप कर चुकी हैं।

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नवल किशोर (Naval Kishore Thakur) कहते हैं ‘‘हमने तो बस नेत्रहीन बालिकाओं के उत्थान के लिए एक विद्यालय की नींव रखी, फिर तो लोग खुद जुड़ते चले गए और कारवां आगे बढ़ता गया | हमने अंतर्ज्योति बालिका विद्यालय (Antarjyoti Balika Vidyalay) की शुरुआत 1994 में पटना (Patna, Bihar) के कदमकुआं इलाके में किराए के दो कमरों के साथ की थी, तब यहां 27 नेत्रहीन लड़कियों ने नामांकन किया था | राजधानी के कुम्हरार क्षेत्र में बने विद्यालय में वर्तमान  में 100 से भी ज्यादा नेत्रहीन बालिकाओं को शिक्षा के साथ-साथ रहन-सहन आदि की सुविधाएं दे रहे हैं |

लोगों के सहयोग से चलता है ये अनोखा विद्यालय

किराए के दो कमरों के साथ शुरू हुए अंतर्ज्योति बालिका विद्यालय (Antarjyoti Balika Vidyalay) के पास आज अपना भवन है | पटना सिटी के दीवान मोहल्ले के कुवंर रूप नारायण ट्रस्ट ने भवन के लिए ज़मीन दी थी | निर्माण कार्य व अन्य संसाधनों के लिए राशि शहर के नामी गिरामी डॉक्टर जैसे नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ रंजन अखौरी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ आरएण सिंह, डॉ अजीत सिंह समेत अन्य क्षेत्रों के लोगों ने मुहैया कराई |

यहां अलमारी, डेस्क, किताब-कॉपी, पंखे, टीवी समेत अन्य ज़रूरी सामान आम लोगों द्वारा मुहैया कराया जाता है। ऐसा नहीं है कि विद्यालय चलाने में सिर्फ समृद्ध घरों के व्यक्ति ही अपना सहयोग देते हैं। बल्कि मध्यम वर्ग व निम्न तबके के लोग भी अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग देते हैं। जैसे कोई 5 किलोग्राम नमक दे देता है, तो कोई कभी सब्जी पहुंचा जाता है। कुल मिलाकर यह एक ऐसा विद्यालय है जो समाज के लोगों के सहयोग से चल रहा है जहां नेत्रहीन बालिकाओं के अंधकारमय जीवन में रोशनी लाने का प्रयास किया जाता है।

ब्रेंल लिपि के माध्यम से होती है पढाई

10वीं तक की नेत्रहीन छात्राओं को ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ाया जाता है | उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ गीत-संगीत, खेल-कूद इत्यादि की भी ट्रेनिंग दी जाती है | छात्राओं को गणित और विज्ञान की जगह संगीत या होम साइंस पढ़ने की आज़ादी होती है | यहां महिला टीचरों की व्यवस्था है जो छात्राओं को अच्छी तरह से समझती हैं | यहां हॉस्टल की नि:शुल्क व्यवस्था है जहां छात्राओं को सुबह से लेकर रात तक चार बार खाना दिया जाता है | छात्राओं के मनोरंजन के लिए टेलीविज़न व खेल-कूद का सामान मौजूद है | नेत्रहीन छात्राओं को यहां कंप्यूटर और अंग्रेजी की शिक्षा भी दी जाती है |

विद्यालय के प्राचार्य नंदा सहाय कहते हैं “इस विद्यालय (Antarjyoti Balika Vidyalay) की ख़ासियत है कि यह विद्यालय जन सहयोग से चल रहा है। हम लोगों के सहयोग से नेत्रहीन बालिकाओं की सेवा कर रहे हैं। मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे इसी तरह अपना सहयोग देते रहें ताकि इन नेत्रहीन बालिकाओं का भविष्य उज्ज्वल बनाया जा सके। हमारी सरकार से भी अपील है कि वह भी इस ख़ास पहल में हमारी मदद करें।”

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar
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