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दुनिया के हर माता पिता का सपना होता है की उनके बच्चे दुनिया में मेरा नाम रौशन करे | इसके लिए माता पिता हर तरह से अपने बच्चे का साथ देने के लिए सदैव तैयार भी रहते हैं, पर आज जिस पिता पुत्री की बात करने जा रहा हूँ यहाँ एक पिता अपनी बेटी का साथ देने से कहीं बढ़ कर किया और दुनिया की सबसे उंची चोटी माउन्ट एवरेस्ट पर दोनों ने मिलकर तिरंगा फहराया और अपना नाम इतिहास में दर्ज करवा लिया | जी हाँ हम बात कर रहे हैं हरियाणा के गुरुग्राम के रहने वाले अजित बजाज और दीया बजाज की |  

अजित बजाज बचपन से हीं पर्वतारोहण और स्कीइंग करते थे

बचपन से हीं पर्वतारोहण और स्कीइंग करने वाले अजित बजाज ने अपनी बेटी दीया को बाल्यावस्था से ही जोखिम भरे अभियानों में अपने साथ रखा इस पिता पुत्री की जोड़ी ने साथ में मिलकर कई कीर्तिमान अपने नाम किये | अजित बजाज का मानना है की बेटी को किसी भी मामले में बेटों से कम मत आंकिये बेटियों को प्यार के साथ- साथ हौसला दे तो वो कुछ भी कर गुजरेगी |

दीया बजाज ने भी अपने पिता का हाथ मजबूत की

अपने पिता अजित बजाज से प्रेरणा लेकर दीया बजाज ने नेहरु इंस्टीटयूट ऑफ़ माउंटेनियरिंग से पहले बेसिक कोर्स और फिर एडवांस कोर्स किया | फिर दीया ने यूरोप की सबसे उंची चोटी माउन्ट एल्बरुस पर फतह किया | माउन्ट एवरेस्ट पर फतह करने से पहले वो अपने पिता के साथ एवरेस्ट पर चढ़ाई का अभ्यास फ़्रांस, लद्दाख और नेपाल में किया, और अंतिम चरण में एवरेस्ट पर चढ़ाई शुरू की और सफलता हासिल की |

बचपन से ही निडर थी

दिया बजाज अपने पिता की तरह हीं बचपन से ही उसके अन्दर हिचक और घरबराहट नाम की कोई चीज नहीं थी | पर्वतारोहण के दौरान कैम्प लगाने से लेकर खाना बनाने तक के हर काम में दीया को मजा आता था |इस दौरान कई बार तूफान भी आए पर वह तनिक भी नहीं घबराई, वहां परिस्थितियां अचानक बदलती है पर वो हर मुश्किल में शांत और गंभीर बनी रहती है यही उसकी सबसे बड़ी खूबी है |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar
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