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‘दुनिया से जानेवाले, जाने चले जाते हैं कहाँ, कैसे ढूंढे कोई उनको, नहीं कदमों के भी निशां’ मित्रों जीवन गतिशील है वो किसी के लिए नहीं रूकती रोज हजारो लोग मृत्यु को प्राप्त होते हैं पर इन हजारों में से कुछ-एक एसे भी होते हैं जो पुरे देश को रुला देते हैं, जी हाँ हम बात कर रहे हैं  तारक मेहता का उल्टा चश्मा के ‘डॉ. हाथी’ यानि एक्टर ‘कवि कुमार आजाद’ जो अब हमारे बीच नहीं रहे | ‘कवि कुमार आजाद’ लंबे समय से इस शो में जुड़े हुए थे। शो में उनका किरदार काफी पसंद किया जा रहा था | डॉ. हाथी के अचानक निधन से पूरे टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर है |

बिहार सासाराम के मूल निवासी थे ‘कवि कुमार आज़ाद’

बिहार के सासाराम के रहने वाले कवि कुमार बचपन से एक्टर बनना चाहते थे | उन्हें कविताएं लिखने का बहुत शौक था लेकिन उनके घर वाले उनके एक्टर बनने के खिलाफ थे लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए वो घर से भाग मुंबई आ गये थे तारक मेहता में डॉ. हाथी का किरदार भी उन्हें अचानक मिल गया था | स्ट्रगल के दौरान उन्हें एक प्रोडक्शन हाउस से कॉल आया | फोन में उनसे कहा कि आपको हमारे बॉस ने बुलाया है। डॉ. हाथी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जैसे ही मैं केबिन के अंदर गया तो उन्होंने देखते ही डॉक्टर हाथी के रोल के लिए मुझे सेलेक्ट कर लिया था |

डॉ. हाथी अपनी गाड़ी में हमेशा गिटार रखते थे हालांकि उन्हें गिटार बजाना नहीं आता था लेकिन उनका एक दोस्त अक्सर डॉ. हाथी के कहने पर गिटार बजाता था | कभी-कभी वह अपने दोस्तों के साथ मरीन ड्राइव पर जाते थे और गिटार बजाकर गाने गाते थे |

 

niraj kumar

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एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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