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इस दुनियां की सबसे पवित्र और नाजुक रिश्ते की अगर बात की जाये तो वह है शादी जहाँ दो अनजान लोग जीवन भर एक दुसरे का साथ निभाने की कसमें खाते हैं | पर हमारे समाज में व्याप्त दहेज़ प्रथा के कारण ये पवित्र बंधन कही-न-कही कलंकित हो रहा है | आज शादी एक व्यापार का रूप ले लिया है जहाँ लड़को की बोली लगती है | शदियों से चली आ रही इस कु प्रथा के प्रति आज के युवा काफी जागरूक हो रहे हैं और समय-समय पर इसका उदाहरण भी देखने को मिल जाता है | आज हम जिनकी चर्चा करने जा रहे है वो भी इन उदाहरणों में से एक हैं

अमरनाथ कुमार और रानी कुमारी की अनोखी शादी

पालीगंज के जरखा निवासी अर्जुन भगत के पुत्र अमरनाथ कुमार को जब पता चला की दहेज़ में पैसे न मिलने के कारण उनके पिता उनकी शादी बिहटा निवासी स्व सूरज पाल की (22) वर्षीय पुत्री रानी कुमारी से नहीं करा रहे हैं तब अमरनाथ कुमार ने अपने पिता के खिलाफ साहसिक एवं सराहनिए निर्णय लेते हुए खुद दुल्हन के घर पहुँच कर शादी करने का प्रस्ताव रखा जिसके बाद लड़की सहित उसके घर वालों ने दोनों की शादी हिन्दू रीति रिवाज से मंदिर में करा दी | मंदिर के पुजारी  ने बताया कि लड़के के पिता की गैर मौजूदगी में यह विवाह संपन्न हुआ है।

परिणयसूत्र में बंधे अमरनाथ और रानी ने कहा कि दहेज की प्रथा सामाजिक, आर्थिक, नैतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से अत्यन्त हानिकारक और घोर निंदनीय है | इसके कारण गरीब घर की सुयोग्य कन्याएं, साधन सम्पन्न परिवारों के पास नहीं पहुँच पा रही है | जिस पिता के पास कई कन्याएं होती हैं, वह अत्याधिक चिंतित रहता है | गलत तरीके से बेटी को दहेज देने के लिए पैसे इक्‍ट्ठा करता है | इस पर भी यदि धन जुटाने में सफलता न मिली तो कई बार बड़ी लोमहर्षक, हृदयद्रावक घटनाएं घटित हो जाती हैं |

आज हमारे समाज में बहुत सारे अमरनाथ कुमार की जरुरत है, तभी हमें दहेज़ जैसी कुप्रथा से मुक्ति मिल सकती है

niraj kumar

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एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar
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