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इस धरती पर अपने लिए जिये तो क्या खाक जिये, कभी दूसरों के लिए भी जी कर देखो दिल को कितना सकून मिलता है | अगर विश्वाश नहीं है तो बिहार में मां जानकी की धरती सीतामढ़ी जा कर देखो जहाँ निः स्वार्थ भाव से प्रभावती झा नि:शक्त बच्चों के बीच मां बनकर उन्हें ममता की छांव प्रदान कर रही है |

तेईस वर्षो से कर रही हैं नि:शक्त बच्चों की मदद

जिला मुख्यालय डुमरा के कैलाशपुरी वार्ड 10 में एक छोटे से मकान में करीब 23 वर्षों से सर्वोदय विकलांग विद्यालय के माध्यम से नि:शक्त बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर रही है | प्रभावती के प्रयास से अब तक 22 नि:शक्त युवक सरकारी सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं | जबकि दर्जनों नि:शक्त गैर सरकारी सेवाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं | प्रभावती बचपन से ही ईशू मसीह, महात्मा गांधी, मदर टेरेसा व अपने पिता शिक्षक सूर्यदेव मिश्र के विचारों से प्रभावित थीं | बचपन से ही वह नि:शक्त बच्चों को देख रो पड़ती थी। उसकी सेवा करने बेचैन हो उठती थी |

दिव्यांगो की स्थिति को देख मदद करने की ठानी

जिले के नानपुर थाना क्षेत्र के खड़का बसंत निवासी सूर्यदेव मिश्र की आठ संतानों में तीसरी संतान प्रभावती झा की शादी वर्ष 1974 में मधुबनी जिले के बिस्फी प्रखंड के अहियारी चौठा निवासी कालीशचंद्र झा के साथ हुई | पुत्र प्रभाष के जन्म के कुछ साल बाद वह अपने जेठ के पास मोतिहारी में चली गई | वहीं पुत्र को टयूशन पढ़ाने के लिए आने वाले विकलांग शिक्षक रामपुकार ठाकुर से प्रभावती का परिचय हुआ | मोतिहारी में विकलांगो की ज्यादा संख्या होने पर प्रभावती रामपुकार ठाकुर को ताना देती थी | इस दौरान रामपुकार ठाकुर ने प्रभावती को सबसे ज्यादा विकलांग सीतामढ़ी में होने का सबूत दिया, तो वह विचलित हो उठी | वह अपने जिले के विकलांगों की सेवा का संकल्प ले वर्ष 1993 में सीतामढ़ी आ गई |

पुश्तैनी जमीन व जेवरात को बेच कर कैलाशपुरी में जमीन खरीद एक घर बनाया

अब प्रभावती झा रोड पर भीख मांगने वाले नि:शक्त बच्चों को गोद लेकर ममता की छांव देने लगी | उन्हें शिक्षा देकर उसे बेहतर जिन्दगी देने में जुट गई | उसकी सेवा से प्रभावित होकर अमेरिका की एक संस्था ने वर्ष 2012 में डेढ़ लाख व 2013 में 5 लाख की और हैदराबाद की एक संस्था ने 3 लाख आर्थिक सहायता दी | प्रभावती झा ने इन पैसों से स्कूल भवन बनाया | स्कूल में अनुदान के रूप में आने वाले रूपयों के खर्च के लिए प्राचार्य प्रभावती झा, सचिव रामपुकार ठाकुर समेत सात लोगों की कमेटी बनाई गई है | बीए पास प्रभावती अपने मेहनत का कोई शुल्क नही लेती है |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar
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