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सैकड़ों साल से भारत और दुनिया भर में बाल मजदूरी की कुप्रथा चली आ रही है, जो आज भी बरकरार है | आज आजादी मिलने के इतने वर्ष के बाद भी करोड़ों बच्चे विभिन्न रेलवे प्लेटफार्मों, होटलों, कल-कारखानों, ईंट-भट्ठा, खेत-खलिहानों, खादानों, दुकानों और घरों में अपना बचपन और भविष्य बेचने को मजबूर हैं | जो सपना गाँधी और आम्बेडकर जसे महापुरुषों ने हिंदुस्तान के लिए देखा था वो कहीं-न-कहीं धूमिल पड़ती जा रही है | आज  शायद हीं कोई इन्सान होगा जिसकी नजर इन मासूमों पर जाती हो | पर आज के इस अवसरवादी युग में भी  बिहार के एक शिक्षक दंपत्ति गाँधी और आम्बेडकर के सपने को साकार करने में तन-मन और धन से बेसहारा बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं|

Ajit Kumar & Shabnam Madhukar (अजीत कुमार | शबनम मधुकर) -Barauni -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India

रेलवे प्लेटफार्म पर चलाते हैं मुहीम

शिक्षक अजीत कुमार (Ajit Kumar) एवं उसकी पत्नी शबनम मधुकर (Shabnam Madhukar) बरौनी (Barauni) रेलवे प्लेटफार्म पर मुफलिसी की जिंदगी गुजार रहे सैकड़ों अनाथ, बेसहारा,आश्रयहीन बच्चों के बीच शिक्षा (Educating Poor) का अलख जगा रहे हैं तथा उन बच्चों के बीच ज्ञान की असीम शक्ति को पहुंचाने के काम में लगे हैं, जिनकी जिंदगी में शायद कभी शिक्षा व ज्ञान की रोशनी पहुंचने की उम्मीद नहीं थी |

बरौनी (Barauni) के शोकहारा निवासी पेशे से शिक्षक अजीत कुमार (Ajit Kumar) एवं उसकी पत्नी शबनम मधुकर (Shabnam Madhukar) ने फरवरी 2013 में अपने मित्र प्रशांत के सहयोग से बरौनी (Barauni) जंक्शन रेलवे प्लेटफार्म के खाली पड़े शेड (टी.पी.टी) में अनाथ बेसहारा बच्चों का एक अनोखा विद्यालय शुरू किया। सामान्य स्कूलों की तरह अब बच्चे भी रोज स्कूल में पढ़ाई से पहले प्रार्थना तथा योगा करते हैं और फिर शुरू होती है गीत, संगीत, पहेली, मुख अभिनय, चित्र, तालियां और चुटकियों जैसे रोचक गतिविधियों के द्वारा भाषा और गणित की पढ़ाई (Educating Poor) |

खुद का भी बचपन बरौनी रेलवे स्टेशन पर हीं गुजरा था

अजीत (Ajit Kumar) का बचपन अपने पिता सीताराम पोद्दार के साथ बरौनी (Barauni) रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते हुए गुजरा। अपने इरादे के मजबूत और धुन के पक्के अजीत शुरू से पढ़-लिखकर शिक्षक बनना चाहते थे | वर्ष 2003 में जीडी कॉलेज बेगूसराय से स्नातक की पढ़ाई पूरी कर वर्ष 2004 में उत्क्रमित मध्य विद्यालय रेलवे, बरौनी में भाषा एवं गणित शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए |

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अपने संघर्ष के दिनों में इन्होंने रेलवे प्लेटफार्म पर मुफलिसी की जिन्दगी गुजार रहे सैकड़ों अनाथ, बेसहारा, आश्रयहीन बाल श्रमिक बच्चों की जिंदगी को काफी करीब से देखा एवं उनके दर्द को महसूस किया जो पढ़ने-लिखने व खेलने की उम्र में अशिक्षा, भूख, कुपोषण और नशे की गिरफ्त में पड़कर उम्र से पहले ही अपना जीवन और बचपन खो देते हैं | ऐसे गुमराह हो रहे लाखों बच्चों को शिक्षा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने को ही शिक्षक अजीत ने अपने जीवन का लक्ष्य बनाया |

हर जगह गुहार लगाई पर निराशा हीं हिस्से में आई

प्लेटफार्म पर रहने वाले इन बेसहारा बच्चों की शिक्षा और बाल अधिकार को लेकर पहले तो इन्होंने कई स्थानीय विद्यालयों के अलावा संबंधित सभी आलाधिकारियों सहित प्रधानमंत्री कार्यालय एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक का दरवाजा खटखटाया, परंतु इन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन अजीत और शबनम (Ajit Kumar & Shabnam Madhukar) ने हार नहीं मानी और स्वयं ही ऐसे बच्चों को शिक्षित और नशामुक्त कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का निश्चय किया | अब शिक्षक दंपत्ति के जीवन का एक मात्र लक्ष्य है कि न सिर्फ बरौनी (Barauni) जंक्शन बल्कि वे तमाम बच्चे जो बालश्रम के रास्ते पर चलते हुए अपना जीवन और बचपन खो रहे हैं, के बचपन को बचाया जा सके | साथ हीं सरकार, विभाग के साथ-साथ समाज को भी आइना दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि ये बच्चे भी हमारे समाज का एक अंग हैं, ये बच्चे भी भारत के नागरिक हैं | इन्हें भी वह सभी अधिकार है जो भारतीय संविधान के अनुसार एक आम नागरिक या बच्चों को प्राप्त है |

यदि यह जानते हुए भी हम इन्हें शिक्षा एवं बाल अधिकार से वंचित रखते हैं या इनके अधिकार को नजर अंदाज करते हैं तो यह न सिर्फ बाल अधिकार/मानवाधिकार का हनन है बल्कि बालश्रम एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है |

अंत में एक सवाल समाज के लिए

दोस्तों देश के आज़ादी के 72 साल बाद भी क्या ये बच्चे आज़ाद हैं | क्या इन्हें वो आज़ादी मिली जो आज़ाद भारत मे आम लोगों को मिली है | आखिर कौन है ऐसे बच्चों की गुमराह हो रही ज़िन्दगी और खो रहे बचपन का जिम्मेवार ? क्या ऐसी ही आज़ाद भारत का सपना देखा था राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, चाचा नेहरू और संविधान निर्माता डॉ. बी आर अम्बेडकर जैसे संबिधान निर्माताओं ने ?

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar
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