नर सेवा ही तो नारायण सेवा है , भारत माँ के उन बच्चों , गरीब और असहाय के लिए जो रात को भूखे पेट सोते है  साक्षात्  अन्नपूर्णा देवी ने ही तो पटना की दो देवियों को साईं की रसोई के जरिए इस कार्य में लगाया है ताकि  कोई भूखा न सो सके | पटना में अमृता सिंह (Amrita Singh) और पल्लवी सिन्हा (Pallavi Sinha), अशोक वर्मा (Ashok Verma)  जी के सहयोग से दो माह पहले खुलने वाली साईं की रसोई (Sai Ki Rasoi) अब वास्तव में भगवान् की रसोई बन चुकी है |

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अपने लिए तो सभी जीते हैं, दूसरों की मदद करने के लिए कम ही लोग आगे आते हैं, लेकिन पटना (Patna) की अमृता (Amrita Singh) और पल्लवी जी (Pallavi Sinha) के साथ अशोक कुमार वर्मा (Ashok Kumar Verma) ने उस दर्द को महसूस किया जो हर 6 से  8 घंटे पर बिना दस्तक दिए पेट में कॉल बेल बजाती है और तब वो गरीब क्या करे जिसके नसीब में अन्न का दाना ही न लिखा हो …

भात -भात कहते कहते भूख से मर गयी वो बच्ची रोती ,

ओ पगले ! तू क्या जाने ‘भूख ‘ की तड़प  क्या होती ?

बीस करोड़ भूखे यहाँ , जा तू  दे पहले उनको रोटी |

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इस दर्द को , इस भूख की असहनीय पीड़ा को महसूस कर तीनों ने  गरीब लोगों की सेवा करने का बीड़ा उठाया और खोला “साईं की रसोई ” (Sai ki Rasoi) । पटना में अमृता सिंह (Amrita Singh) और पल्लवी सिन्हा (Pallavi Sinha) के अगुआई में चल रहे साईं की रसोई (Sai ki Rasoi) के लोगों के बढ़ते प्यार और विश्वास को देख इनकी टीम ने  भूख के खिलाफ इस मुहीम का विस्तार किया |

साई की रसोई वाली  नेकी की हांड़ी अब  PMCH में भी

पहले सिर्फ कंकडबाग के भूतनाथ रोड पर ही लगता था साईं की रसोई (Sai ki Rasoi) लेकिन भूख की समस्या बड़ी होने के कारण अमृता सिंह और पल्लवी सिन्हा ने सोंचा की सिर्फ एक जगह साईं की रसोई (Sai ki Rasoi) लगाने से बात नहीं बनेगी फिर उन्होंने साईं की रसोई (Sai ki Rasoi) का विस्तार करते हुए दूसरा पड़ाव पी.एम.सी.एच (P.M.C.H) को चुना, जहाँ पुरे बिहार से हजारो मरीज इलाज कराने आते हैं | अगर बीमारी गंभीर होती है |

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मरीज के साथ आने वाले परिजनों को भोजन के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, वैसे में अमृता सिंह और पल्लवी सिन्हा पी.एम.सी.एच (P.M.C.H) में साईं की रसोई (Sai ki Rasoi) की शुरुवात करके बहुत पूण्य का कार्य की हैं , अब लोग पी.एम.सी.एच में भी साईं की रसोई (Sai ki Rasoi) का लाभ ले पाएंगे|

साई की रसोई में पांच रूपए में मिलता है भोजन

पी.एम.सी.एच में भी साईं की रसोई (Sai ki Rasoi) से कोई भी मात्र पांच रूपए दे कर एक प्लेट गुणवत्तापूर्ण भोजन प्राप्त कर सकता है | अमृता सिंह (Amrita Singh) और पल्लवी सिन्हा (Pallavi Sinha) ने इस सराहनीये कार्य को साईं की रसोई (Sai ki Rasoi) के 64वें दिन के पड़ाव के शुभ अवसर पर किया |हर रविवार फ़िलहाल संध्या चार बजे से छह बजे तक लोग साईं की रसोई से भोजन प्राप्त कर सकते है, आगे की योजना सितम्बर महीने से यह सेवा हर दिन के लिए रहेगी |

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