हर व्यक्ति की ख्वाहिश रहती है रिटायरमेंट के बाद अपनी बची हुई जिंदगी अपने परिवार के साथ आराम से  बीताये, पर इस पृथ्वी पर कुछ एसे फ़रिश्ते भी है जो अपनी ज़िन्दगी दूसरों के नाम कर देते हैं | आज हम जिनकी चर्चा करने जा रहे हैं वो भी कुछ इसी तरह की शक्शियत की मालकिन हैं जो रिटायरमेंट के बाद आराम से ना बैठकर गरीबों के भविष्य को उज्जवल बनाने का नेक कार्य कर रही हैं |

Snehlata Hodda -Gaurav Foundation for Human & Social Development -Gurgaon - BiharStory - Best Website for news & social story

स्नेहलता हुड्डा बन गई गौरव माँ

स्नेहलता हुड्डा (Snehlata Hodda) ने ‘गौरव फाउंडेशन फॉर ह्यूमन ऐंड सोशल डेवलेपमेंट’ (Gaurav Foundation for Human & Social Development)  नाम से एक एनजीओ बनाने से अपने इस सपने की शुरुआत की थी, आज उन्हें लोग गौरव मां के नाम से भी जानते हैं | स्नेहलता हुड्डा (Snehlata Hodda) गरीबों की बस्ती में जाकर लोगों को समझाती हैं कि बच्चों को काम पर न भेजकर पढ़ने भेजो | उन्होंने जब यह स्कूल की शुरू किया, तब यहाँ सिर्फ 20 बच्चे थे, लेकिन आज यहाँ लगभग 200 बच्चे पढ़ने आते हैं, उनका यह स्कूल वैसे तो उनकी पेंशन के पैसों से चलता है, लेकिन कुछ अच्छे लोगों से उन्हें मदद भी मिल जाती है | कई लोग बच्चों के लिए कॉपी-किताबें आदि दान करते हैं | गौरव माँ ने बताया कि कम पैसों के कारण उन्हें मुश्किल तो होती है, लेकिन अगर दिल सच्चा हो तो पर्वतों को भी हिलाया जा सकता है |

पढने वालों में ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर और रिक्शा चलाने वालों के बच्चे होते हैं

गुड़गांव (Gurgaon) के सेक्टर 43 में स्थित एक स्कूल में दिहाड़ी मजदूर और रिक्शा चलाने वाले गरीबों के बच्चे पढ़ने आते हैं | इस स्कूल की शुरुआत साल 2005 में स्नेहलता हुड्डा (Snehlata Hodda) द्वारा की गई | अब उनकी उम्र 74 साल है और वो पहले दिल्ली (Delhi) के एक सरकारी स्कूल में अध्यापिका थीं. स्कूल से रिटायर होने  के बाद उन्होंने गरीब बच्चों के लिए यह स्कूल खोल दिया |

शांतिनिकेतन से मिली थी प्रेरणा

रबींद्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित प्रसिद्ध संस्थान शांतिनिकेतन से गौरव मां को प्रेरणा मिलती है | वे चाहती हैं, कि गौरव निकेतन (Gaurav Foundation for Human & Social Development) के बच्चे भी सफलता के शिखर तक पहुंचें | गौरव माँ (Snehlata Hodda) के इस स्कूल में कोई भी आकर बच्चों को नई चीजें सिखा सकता है | गर्मी की छुट्टियों में यहाँ कुछ वालंटियर्स को भी बुलाया जाता है|

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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