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मधुबनी जिला अंतर्गत मधेपुर गाँव का का यह युवा न सिर्फ अपनी पढाई और प्रतियोगिता की तैयारी करता है बल्कि अपना  बेशकीमती समय से कुछ हिस्सा निकाल कर गरीब और जरूरतमंद बच्चों के जीवन में ज्ञान की रौशनी फ़ैलाने का भी कार्य करता  हैं | जी हाँ ! हम बात कर रहे है “मुरली झा ” की जो  गायत्री परिवार के प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ बिहार द्वारा संचालित बाल संस्कार शाला के सक्रिय कार्यकर्त्ता है तथा अब तक लगभग दो हज़ार बच्चों के भविष्य तराशने में उनका सफल योगदान भी रहा है |

Murli jha -balsanskarshaala

बच्चों को शिक्षित और संस्कारवान बनाती ‘बाल संस्कार शाला’

ज्ञान हम पुस्तकों में ढूंढ़ते हैं, लेकिन ज्ञान वहां है नहीं। पुस्तकों में केवल जानकारियां हैं। जानकारी पाकर आप अच्छे अंक तो प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन जीवन की परीक्षा में अच्छे अंक पाने के लिए किताबों के ज्ञान की नहीं वरन ऋषियों द्वारा तैयार की गई संस्कार परंपरा को अपनाना पड़ेगा। बाल संस्कार शाला के बुनयादी और संस्कारयुक्त शिक्षा को  मुरली जैसे युवा आज गाँव -गाँव में पंहुचा रहे है |  मुरली झा बताते है कि  बालकों को संस्कारवान बनाने के मुख्यतः तीन माध्यम रहें हैं पहला परिवार(माता- पिता), दूसरा पाठशाला (शिक्षक) और तीसरा हमारा  समाज।

बचपन से ही रही उनकी समाजसेवा की भावना

मुरली झा का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ , इनके पिता बरुण कुमार झा स्वस्थ विभाग में कर्मचारी है | गाँव से माध्यमिक शिक्षा लेने के बाद, बाद की पढाई तथा एम् ० कॉम ०  दरभंगा के L.N.M.U से किया | मुरली जी को उन बच्चों की स्थिति देखकर बहुत पीड़ा होती थी जो साधन और पैसे के आभाव में अपनी पढाई नहीं कर पाते थे |

इसी दौरान जब पटना में उनके एक मित्र द्वारा ही उन्हें  बालसंस्कारशाला के बारे में पता चला तो  2013 में  उनका जुडाव इस संस्था से हुआ  | तब से लेकर आज तक  मुरली झा गायत्री परिवार के प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ बिहार द्वारा संचालित संस्कार शाला के सक्रिय सिपाही हैं |

मुरली झा भी चाहते तो अन्य छात्रों की तरह अपना बचा हुआ समय पार्क या अर्थहीन घूमते हुए बिता सकते थे पर उन्हें एसा करना गवारा न था वो बचपन से ही महसूस करते थे की हमारे समाज में बहुत सारे प्रतिभा पैसे तथा अच्छे मार्गदर्शन के बिना दम तोड़ देते हैं, जिसको आसमान की बुलंदी को छूना चाहिए था वो गुमनामी के अंधेरों में कहीं खो जाते हैं | मुरली झा उन तमाम बच्चों के लिए एक उम्मीद, एक राह बनकर उनका मार्गदर्शन कर रहे है  |

मुरली गाँव में चला रहे बाल संस्कार शाला

पटना बायपास के नजदीक ही चैनपुर गाँव में मुरली झा बाल संस्कार शाला चलते है जहाँ सैकड़ों बच्चों को मुफ्त शिक्षा देते है | मुरली बताते है कि जब उन्होंने यह काम गाँव में शुरू किया तो लोग उनके माँ को जाकर कहते थे कि आपका लड़का गायत्री परिवार से जुड़ गया है कहीं बाबा न बन जाये , लोग ताने देते थे पर उनको कभी फर्क नहीं पड़ा और अपने धुन में लगे रहे और समाजसेवा के इस जूनून के चलते आज उनको समाज में अलग पहचान मिला है |

मुरली झा बताते है कि बाल संस्कार शाला से न केवल बाल पीढ़ी संस्कारित होगी बल्कि उन बालकों के माध्यम से उनके परिवार का वातावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आज उनके पास लगभग 200 लड़कों की टीम है जो उनके इस नेक कार्य में सहयोग कर रहे है | 

पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा दी जाती है

इस संस्कार शाला में वैसे बच्चे पढने आते हैं जिनके माता-पिता पढ़ाने में सक्षम नहीं होते हैं, साथ ही समय-समय पर इन बच्चों को समाज के भले लोगों द्वारा पठन-पाठन के लिए जरुरी सामग्री भी उपलब्ध कराइ जाती है| यहाँ पढ़ाने वाले भी अधिकतर छात्र ही होते हैं जो अपना खाली समय इन गरीब बच्चों के जीवन में ज्ञान की धारा बहा रहे है | सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की ऐसा करने के लिए इन युवाओ को संस्था द्वारा न तो किसी तरह का वेतन दिया जाता है और न ही कोई सुविधा दी जाती है |

पटना में ही 30 जगहों पर चलता है बाल संस्कार शाला

ये अनोखा पाठशाला बिहार की राजधानी पटना में वर्तमान समय में 30 जगहों पर चल रही है जैसे पटना जंक्शन के प्लेटफ़ॉर्म संख्या एक, तथा राजेंद्रनगर टर्मिनल के प्लेटफ़ॉर्म संख्या एक पर रोजाना संध्या 4:00 से 6:00 तक रोजाना चलती है  इसके अलावा ये संस्कर्ब शाला  पटना शहर से सटे गाँवो में भी रोजाना संध्या 4:00 से 6:00 तक चलाया जाता है |

 

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar
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