बच्चों को खिलौनों से कितना लगाव रहता है, ये बात किसी से छिपी नहीं है | खिलौना देखते हीं बच्चों के आँखों में आई गजब की चमक बहुत कुछ बयां कर जाती हैं | पर हमारे देश में वैसे भी परिवार मौजूद हैं जो दो वक्त की रोटी बहुत मुश्किल से जुटा पाते हैं वैसे में वो अपने बच्चों के लिए खिलौने कहाँ से लाये | इस समस्या का अनूठा समाधान निकाले हैं उत्तरप्रदेश के . ‘सर्च फाउंडेशन’ के संस्थापक सर्वेश अस्थाना ने, उनके इस पहल का मकसद ही है की बच्चों में बचपना जीवित रहे और वे खिलौने से खेल सकें |

 ‘सर्च फाउंडेशन’ के सौजन्य से चलता है यह अनोखा बैंक

‘सर्च फाउंडेशन’ (Search Foundation) ने लखनऊ (Lucknow) में खिलौना बैंक (Khilauna Bank) की स्थापना की है। यह बैंक पुराने खिलौनों को एकत्र करता है और उन्हें गरीब बच्चों में बांटता है | इसके संयोजक हैं वरिष्ठ व्यंग्यकार सर्वेश अस्थाना (Sarvesh Asthana) | ‘सर्च फाउंडेशन’ (Search Foundation) द्वारा बच्चों को खिलौने के साथ-साथ गर्म कपड़े जूते-मोजे भी दी जाती हैं |

पत्थरों से बच्चों को खेलते देख आई प्रेरणा

सर्वेश अस्थाना (Sarvesh Asthana) के मन में खिलौना बैंक (Khilauna Bank) का कॉन्सेट मजदूरों के बच्चों को ईंट पत्थर से खेलता देख आया | फिर सर्वेश अस्थाना (Sarvesh Asthana) ने वॉट्सएप और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से अपील की कि वह जश्न-ए-अजाद अभियान के तहत एक हजार खिलौने बांटने के लिए उन्हें दें | उनके पास अपेक्षा से कहीं ज्यादा खिलौने आए तो उन्होंने लखनऊ ही नहीं हरदोई, बहराइच, बदायूं में 4800 खिलौने एक सप्ताह तक बांटे | बाद में अभियान की सफलता को देखते हुए उसमें कपड़े और जूते-मोजे को भी जोड़ लिया गया। आज लखनऊ (Lucknow) ही नहीं देश भर में खिलौनों और कपड़े का कलेक्शन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सर्च फाउंडेशन (Search Foundation) की मदद से गोमतीनगर के सी 54 विभूति खंड में ऑफिस खोला गया है |

niraj kumar

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