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हिन्‍दू धर्म को मानने वाली महिलाओं में तीज का विशेष महत्‍व है | इस दिन गौरी-शंकर की पूजा का विधान है | मान्‍यता है कि  इस व्रत को करने से सुहागिन महिला के पति की उम्र लंबी होती है जबकि कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है | यह त्‍योहार मुख्‍य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश में मनाया जाता है | कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इस व्रत को गौरी हब्‍बा के नाम से जाना जाता है |

हरतालिका तीज का महत्‍व

सभी चार तीजों में हरतालिका तीज का विशेष महत्‍व है, हरतालिका दो शब्‍दों से मिलकर बना है- हरत और आलिका, हरत का मतलब है ‘अपहरण’ और आलिका यानी ‘सहेली’ |  प्राचीन मान्‍यता के अनुसार मां पार्वती की सहेली उन्‍हें घने जंगल में ले जाकर छिपा देती हैं ताकि उनके पिता भगवान विष्‍णु से उनका विवाह न करा पाएं | सुहागिन महिलाओं की हरतालिका तीज में गहरी आस्‍था है, महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं | मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से सुहागिन स्त्रियों को शिव-पार्वती अखंड सौभाग्‍य का वरदान देते हैं, वहीं कुंवारी लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्‍त‍ि होती है |

हरतालिका तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त

तृतीया तिथि प्रारंभ: 11 सितंबर 2018 को शाम 6 बजकर 4 मिनट |
तृतीया तिथि समाप्‍त: 12 सितंबर 2018 को शाम 4 बजकर 7 मिनट |
प्रात: काल हरतालिका पूजा मुहूर्त: 12 सितंबर 2018 की सुबह 6 बजकर 15 मिनट से सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक |

हरतालिका तीज को करने के नियम

हरतालिका तीज का व्रत अत्‍यंत कठिन माना जाता है, यह निर्जला व्रत है यानी कि व्रत के पारण से पहले पानी की एक बूंद भी ग्रहण करना वर्जित है | व्रत के दिन सुबह-सवेरे स्‍नान करने के बाद “उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये” मंत्र का उच्‍चारण करते हुए व्रत का संकल्‍प लिया जाता है |
– इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्‍याएं रखती हैं | लेकिन एक बार व्रत रखने के बाद जीवन भर इस व्रत को रखना पड़ता है |
– अगर महिला ज्‍यादा बीमार है तो उसके बदले घर की अन्‍य महिला या फिर पति भी इस व्रत को रख सकता है |
– इस व्रत में सोने की मनाही है, यहां तक कि रात को भी सोना वर्जित है | रात के वक्‍त भजन-कीर्तन किया जाता है, मान्‍यता है कि इस दिन व्रत करने वाली महिला अगर रात को सो जाए तो वह अगले जन्‍म में अजगर बनती है |
– मान्‍यता है कि अगर व्रत करने वाली महिला इस दिन गलती से भी कुछ खा-पी ले तो वह अगले जन्‍म में बंदर बनती है |
– मान्‍यता है कि अगर व्रत करने वाली महिला इस दिन दूध पी ले तो वह अगले जन्‍म में सर्प योनि में पैदा होती है |

हरतालिका तीज की पूजन सामग्री

हरतालिका व्रत से एक दिन पहले ही पूजा की सामग्री जुटा लें: गीली मिट्टी, बेल पत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल और फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनेऊ, वस्‍त्र, मौसमी फल-फूल, नारियल, कलश, अबीर, चंदन, घी, कपूर, कुमकुम, दीपक, दही, चीनी, दूध और शहद |

मां पार्वती की सुहाग सामग्री: मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, सुहाग पिटारी

तीज से जुड़ी धार्मिक मान्यता

तीज का त्योहार मनाने के पीछे यह धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए इस व्रत का पालन और अराधना की थी। इसी के परिणामस्वरूप भगवान शिव ने मां पार्वती के तप से प्रसन्न होकर पत्नी के रुप में उन्हें स्वीकार किया था। सौ वर्षों के तप के बाद मां पार्वती ने श्रावण शुक्ल तृतीया के इसी दिन भगवान शिव को पति के रूप में पाया था। इसी शुभ दिन सुहागिनी और अविवाहित लड़कियां व्रत रखती और पूजा अर्चना करती हैं ताकि पति के रूप में उन्हें शिव के गुण मिल सकें।

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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