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दोस्तों अगर किसी गरीब को कैंसर हो जाये तो उसका बचना नामुमकिन हो जाता है, कारण वो गरीब व्यक्ति कैंसर के इलाज का खर्च वहन नहीं कर सकता | ऐसे में एक डॉक्टर है स्वप्नील माने जो गरीब कैंसर मरीजों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं  | डॉ स्वप्नील माने एक कैंसर विशेषग्य हैं और गरीबों के लिए कैंसर का फ्री इलाज कर रहे हैं |

खुद गाँव में जा कर करते है जाँच

स्वप्नील माने स्वं महाराष्ट्र के गावों में जाकर लोगो को जागरूक करते हैं और उनका मुफ्त में चेकअप भी करते हैं | अगर मरीज को कैंसर होता है तो उसका अपने अस्पताल में मुफ्त इलाज भी करते है | इस सराहनीये कार्य को स्वप्नील माने 9 वर्षों से कर रहे हैं और इन 9 वर्षों में इन्होंने 25 कैंसर जागरूकता कैम्प और 29 कैंसर शोधक कैम्प लगा चुके हैं |

खुद के अस्पताल में करते है इलाज

डॉ माने एक कैंसर विशेज्ञ हैं महाराष्ट्र के अहमदनगर में अपना अस्पताल चला रहे हैं | इसी गांव में डॉ माने मेडिकल फाउंडेशन एवंम रिसर्च सेंटर भी चला रहे हैं |उनके अस्पताल में 25 बेड हैं और यहां कैंसर का फ्री इलाज होता है। डॉ माने ने बताया उनके कैंपों में अभी तक 1120 मरीजों का कैंसर ठीक हुआ और इन सब को लास्ट स्टेज कैंसर था। डॉ स्वप्नील माने अपनी टीमफाउंडेशन ने इन सब को अपने अस्पताल लाए और इनका मुफ्त इलाज किया।

अपने पडोसी से मिली प्रेरणा

गोडसे काका स्वप्निल के पडोसी हुआ करते थे | वो मजदूरी का काम करते थे, जिससे दिन में वे 50-60 रुपये ही कमा पाते थे | पर अब बिमारी के कारण वे इतना भी नहीं कमा पा रहे थे | स्वप्निल ने अपनी छोटी सी उम्र में ही गोडसे काका को हर रोज़ मरते हुये देखा था, गोडसे काकू को हर पल रोते हुए देखा था |

“आई, बड़ा होकर मैं डॉक्टर बनूँगा और मुफ्त में इलाज करके गरीबो की सेवा करूँगा” –स्वप्निल ने माँ से किया था वादा |

एक दिन स्वप्निल को पता चला कि सिर्फ 50000 रूपए न होने के कारण गोडसे काका लंग कैंसर का इलाज नहीं कर सके और आखिर इस जानलेवा बिमारी ने एक दिन उनकी जान ले ही ली। इस घटना से छोटे से स्वप्निल के मन पर बहुत गहरा असर पडा और उसने निश्चय किया कि वो बड़ा होकर कैंसर का डॉक्टर बनकर गरीब रोगियों का मुफ्त में इलाज करेंगा।

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar
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