कहते हैं जिनका कोई नहीं होता उनकी सहायता के लिए भी ईश्वर किसी न किसी को नियुक्त करता है | भिलाई शहर में 1980 से काम कर रही जन सेवा दल की सबसे अलग दास्तां हैं | जिन सड़ी-गली लावारिस लाशों को कोई छूने तक को तैयार नहीं होता, उनका यह संस्था विधि विधान से अंतिम संस्कार करवाती है और पदाधिकारी हर दो माह में एकत्र हुए फूलों को हरिद्वार जाकर गंगा में प्रवाहित करते हैं | संस्था अब तक 8000 लाशों को मुक्ति दे चुकी है |

स्वं पुलिस बुलाती है अंतिम संस्कार के लिए

पहले नगर निगम अंतिम संस्कार करती थी, लेकिन वो मुर्दाघर से लाश लेकर सिर्फ जला देते थे | लाशों का सही विधि से अंतिम संस्कार नहीं होता था, इसलिए 1981 से संस्था ने लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कराने का बीड़ा उठाया | तब से शहर में कोई भी लावारिस लाश मिले तो पुलिस उन्हें ही बुलाती है |

बिना कोई स्वार्थ के करते हैं भलाई कार्य

करीब 8 हजार लाशों को मुक्ति देने वाली यह संस्था और भी कई भलाई के काम कर रही है | जैसे-मानसिक रोगी व घायल मिले लावारिस का अस्पताल में इलाज कराना और उसके बाद उन्हें घर तक छोड़ना, हर माह 400 विधवाओं को 10 किलो गेहूं व 5 किलो चावल देना और  सिविल अस्पताल  में मरीजों व उनके परिजनों को सुबह नाश्ता, दोपहर-शाम को खाना देना इनके सेवा हैं |

पहल तीन बुजुर्गों ने किया था

3 बुजुर्ग लाला टेकचंद, लाला रामचंद्र, लाला चंद्रभान इसको चलाते थे | शुरुआत में मरीजों को सिर्फ चाय व ब्रेड देते थे। फिर धीरे-धीरे इसका कारवां बढ़ता चला गया और अब गरीब परिवार की मदद को संस्था हमेशा आगे खड़ी मिलती है | वर्तमान में संस्था को प्रधान कैलाश ग्रोवर, उप प्रधान किशन मनचंदा, सचिव चमनलाल गुलाटी आदि सदस्य संभाल रहे हैं | सचिव गुलाटी ने बताया कि विशुद्धानंद की प्रेरणा से सबसे पहले यह संस्था करनाल में शुरू हुई थी | 1980 में करनाल प्रधान बलदेव राज ने पानीपत में इस संस्था को शुरू कराया था | तब कई बच्चों को रोशनी दिलाई |

उप प्रधान किशन मनचंदा ने बताया कि जन सेवा दल की ओर से साल में दो बार ब्लड कैंप व एक बार नेत्र जांच शिविर लगाया जाता है | 7 सालों से संस्था लोगों को देहदान व नेत्रदान के लिए प्रेरित कर रही है | जनवरी 2016 से अब तक 14 देहदान करा चुके हैं | देहदान से एमबीबीएस स्टूडेंट को मदद मिलती है। वहीं इतने ही समय में 30 से ज्यादा लोगों के नेत्रदान कराए |

दवाइयां और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में मदद

अस्पताल में इलाज कराने कई लोग एेसे भी आते हैं, जिनके पास पैसे नहीं होते, इन्हें संस्था दवा भी दिलाती है | गरीब परिवार में बेटी की शादी होने पर संस्था की ओर से 50 लोगों के खाने की सामग्री दी जाती है | देश में कहीं भी आपदा जैसी घटनाएं होती है तो संस्था प्रभावित लोगों की मदद के लिए सामग्री लेकर यहां से जाते हैं |

दान से चल रही है संस्था

संस्था के शुरू होने से अब तक सरकार से मदद के नाम पर सिर्फ एक बार एक लाख रुपए मिले हैं | इसके अलावा कोई आर्थिक मदद नहीं मिली | शहरवासियों के दान से ही यह संस्था गरीब लोगों की मदद कर रही है |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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