दिव्यांगो को देखते हीं मन में दया का भाव उभड़ने लगता हैं, पर दिव्यांगों को सहानुभूति नहीं, सहयोग की जरूरत है | इनके भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने का प्रयास किये जाने की जरुरत है, ताकि वे हर स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें | दिव्यांगो के हित के लिए कुछ एसा ही कर रहें है उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जनपद के करन यादव जो अपने सराहनीये कार्यो के वजह से दिव्यांगो के आइकॉन हैं |

खुद भी दिव्यांग हैं करन यादव

जनपद गाजीपुर के करन यादव की जो कि खुद एक दिव्यांग हैं और इनका एक पैर पोलियोग्रस्त है | करन खुद एक दिव्यांग हैं और दिव्यांगों के दर्द को अच्छी तरह से समझते हैं और उनकी समस्याओं से वाकिफ हैं | करन दिव्यांगजनों की मदद के लिये हमेशा आगे रहते हैं और गाँव-गाँव जाकर दिव्यांगों और उनके परिवार वालों को दिव्यांगों को सरकार और अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं से मिलने वाली मदद की जानकारी देते हैं, साथ ही जहाँ भी दिव्यांगों का स्कूल चलते हैं वहां जाकर उनको किताब, कॉपी और अन्य आवश्यकता की चीजें भी बांटते हैं |

विदेश में नही लगा मन

पहले करन यादव लंदन में जॉब में थे पर वहाँ की नौकरी उनको रास नहीं आयी और कहीं न कहीं दिव्यांजनों के लिये कुछ करने की उनकी इच्छा ने उनको स्वदेश आने के लिये विवश किया , और फ़िर लग गयें दिव्यांगो के उत्थान कार्य में एक और आश्चर्यजनक चीज जो करन की महत्वाकांक्षा को दर्शाती है | करन छात्र-छत्राओं को योगा की ट्रेनिंग भी देते हैं और उनका दावा है कि योगा में कोई उनको चैलेंज नहीं कर सकता | करन यादव जो कि खुद एक दिव्यांग हैं वो दिव्यांगों की मदद को लिये दिन रात तैयार रहते हैं और उनके साथ अधिक से अधिक समय व्यतीत करते हैं और उनको उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में लगे रहते हैं |

niraj kumar

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एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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