एक अनपढ़ और देहाड़ी मजदूरी करने वाला पचास वर्षीय मजदुर जिसके कदम पिछले बीस वर्षों से जिंदगियां बचाने के जुनून में कभी नहीं ठिठके | 50 वर्षीय अमर सिंह बेशक एक अनपढ़ देहाड़ी मजदूर हैं पर वह हम जैसे पढ़े-लिखे लोगों को जीवन में इंसानियत का बखूबी  पाठ पढ़ा रहे हैं |

ब्लड मैन के नाम से पहचान मिली

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के श्योदाणपुरा गांव के लोग अमर सिंह को ‘बल्ड मैन’ के नाम से जानते हैं. क्योंकि इस अनपढ़ मजदूर ने अपनी स्वेच्छा से 73 बार रक्तदान किया है, और सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में 330 रक्त दान शिविरों का आयोजन भी कराया है |

बेटे की शादी में भी लगाया रक्तदान शिविर

अमर सिंह ने रक्तदान के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए 2007 में अपने बेटे के विवाह स्थल पर भी रक्तदान शिविर आयोजित किया था जहां उनके परिवार के सदस्यों और मेहमानों ने 114 यूनिट रक्त का दान किया था |

इसके अलावा उन्होंने 2011 में अपनी मां की मृत्यु के बाद भी इसी तरह के शिविर का आयोजन किया था |

एक घटना से मिली प्रेरणा

अमर सिंह बताते हैं कि उनकी जीवन में घटी एक घटना ने इस बात का एहसास दिलाया कि किस तरह रक्तदान करने से लोगों को मौत से बचाया जा सकता है | उन्होंने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि साल 1985 में रोजाना की तरह वो उस दिन भी अपनी साइकिल पर काम करने जा रहे थे तभी उन्होंने रोड पर एक सिख आदमी को पड़ा हुए देखा जिसका एक्सिडेंट हो चुका था | इसके बाद उन्होंने उसे सिरसा (हरियाणा) के एक अस्पताल में भर्ति कराया जहां डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए उनसे रक्त दान करने को कहा. डॉक्टर के कहने के बाद उन्होंने रक्त दान किया जिससे उस सिख की जिंदगी बच गई |

रक्तदान के बाद अमर सिंह को इस काम से बहुत संतुष्टि मिली और तबसे उन्होंने इसे अपना जीवन का मिशन बना लिया है |

कई बार हो चुकें है सम्मानित

अमर सिंह ने 73 बार रक्त दान किया है और 330 रक्त दान शिविरों का आयोजन भी किया है | गौरतलब है कि अमर सिंह को उनके इस बेहतरीन काम के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री,राज्यपाल,बाबा रामदेव,पूर्व मंत्री दिगम्बर सिंह के आलावा जिला स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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