दोस्तों आज की कहानी एक नौजवान की है, जिसके के मन में शिक्षा की अलख जगाने का कुछ ऐसा जुनून पैदा हुआ कि उसने साइकिल को हीं मोबाइल पाठशाला बना डाली | और निकल गया  झुग्गी-झोंपड़ी और मलिन बस्तियों में घूम-घूम कर बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगाने | उस नौजवान के नेक इरादे के साथ की गई उसकी मेहनत रंग लाई, और  आज सैंकड़ों की संख्या में बच्चे उसकी क्लास में शामिल हो रहे हैं | फर्रुखाबाद उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) के सलेमपुर गांव के रहने वाले आदित्य (Aditya Kumar)को बच्चे प्यार से साइकिल वाले गुरु जी (saeekil vaale guroojee) कहता है तो कोई साइकिल वाले सर के नाम से पुकारता है |

Saeekil Vaale Guroojee Aditya Kumar Uttar Pradesh India

साइकिल पर चलता-फिरता स्कूल

आदित्य (Aditya Kumar) स्कूल न जा सकने वाले गरीब, मलिन बस्तियों में कूड़ा बीनने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने में लगे हैं  | एक पुरानी साइकिल के कैरियर पर लगा बैग और आगे हैंडिल पर लगे फ्लैक्स पर लिखा है- साइकिल पर चलता-फिरता स्कूल | बच्चे इन्हें साइकिल वाले गुरु जी के नाम से पुकारते हैं | आदित्य का जीवन संघर्ष से भरा रहा है | गांव सलेमपुर के रहने वाले भूप नारायण के बेटे आदित्य ने स्नातक की उपाधि के लिए कानपुर में रहकर पढ़ाई की | आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने छात्रों को ट्यूशन पढ़ाना शुरु किया और डीएवी कालेज से बी.एस-सी. की डिग्री हासिल की | लेकिन, उनका मन नौकरी के बजाए समाज के गरीब और मलिन बस्तियों के बच्चों को पढ़ाने में लगने लगा |

20 साल से लग रही है साइकिल पाठशाला

कोई संसाधन न होने के कारण आदित्य ने साइकिल पर ही पाठशाला बना डाली। उनके इस संकल्प के पीछे परिवार बाधा न बने इसके लिए वह कानपुर से लखनऊ आ गये | मुंशी पुलिया के पास विनायकपुरम में 1995 से गरीब बच्चों को शिक्षा देने का काम शुरु किया | उनकी साइकिल पाठशाला लखनऊ के विभिन्न इलाकों में पहुंचने लगी | आदित्य ने बताया कि वह उन बच्चों को पढ़ाते हैं जो गरीबी के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। मलिन बस्तियों में आदित्य की साइकिल पाठशाला 20 साल से लग रही है |
आदित्य का यह अभियान लिम्का बुक आफ रिकार्डस में दर्ज हो चुका है |(saeekil vaale guroojee Aditya Kumar) आदित्य की साइकिल पाठशाला ने समाज की मुख्य धारा से कटे परिवारों के बच्चों में तालीम की रोशनी जलाने में कामयाबी पायी है |

आज आर्थिक बदहाली से गुजर रहा है साईकिल पाठशाला

जहाँ एक तरफ सूबे की सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए फ्री लैपटॉप या टैबलेट बांटना, कन्याओं को शिक्षा में योगदान के लिए कन्या विद्यालय योजना जैसी खुशहाल योजनाओं को संचालित कर रही है | वही दूसरी तरफ बच्चों तक खुद चलकर पहुँचने वाली पाठशाला का आस्तित्व खतरे में है | प्रदेश सरकार ने सबको शिक्षा का अधिकार कानून तो लागू कर दिया लेकिन यह साकार कैसे होगा यह पहेली बना हुआ है | ऐसे कैसे पूरा हो सबको शिक्षा का सपना | आज की दुनिया में शिक्षा के बिना सब कुछ अधूरा है | गरीब बच्चों के जीवन में ज्ञान की रोशनी देने वाले शिक्षक आदित्य (Aditya Kumar)कहते है अगर मनुष्य कोई भी शिक्षा और फन, कला सीख लेता है तो दुनिया उसकी कद्र करती है | शिक्षा ही उड़ने के लिए पंख प्रदान करती है |

niraj kumar

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