अंधविश्वास कहे या गंद्विश्वास पर ये ऐसी बीमारी है जिससे हर तीसरा व्यक्ति ग्रसित है चाहे वो पढ़ा लिखा हो या अनपढ़  इस बीमारी के कारण बहुत से लोग अपनी जान से भी हाथ धो बैठते हैं तो कभी जेल की हवा भी खा लेते हैं और इसी अन्धविश्वास  को जड़ से मिटाने का बीड़ा बिहार मधुबनी के एक साहसिक युवा मंटू कुमार  ने उठाया है जो विज्ञान पर आधारित सिद्धांतो  से लोगों को जागरूक करते हैं और कहते हैं कल्पना में नहीं वर्तमान में विश्वास कीजिये |

अपने घर से मिली थी प्रेरणा

मंटू कुमार की अन्धविश्वास  के खिलाफ जंग की शुरुवात खुद के घर से हीं हुई थी | मंटू के पिता ज्योतिष थे और उन्हें इन सब बहुत विश्वास था उन्हें लगता था सपनों की बाते सच हो जाती है |

मंटू के पिता जी को रात को सपने में लगता था की अगर मैं लौटरी खरीदूंगा तो धनवान बन जाऊंगा, और इस चक्कर में वो लौटरी खरीदते गए जिसका परिणाम ये हुआ की उनको अपना मकान तक बेचना पड़ा इन सब बातों से बालक मंटू के जीवन में गहरा प्रभाव पड़ा जो समय के साथ और प्रबल होती गई |

पिछले सोलह वर्षों से कर रहें हैं लोगों को जागरूक

एम कॉम तक की पढाई कर चुके मंटू कुमार के मन में अपने घर की स्थिति देख ख्याल आया की हमारे जैसे तो बहुत से लोग होंगे जो अन्धविश्वास  के कारण सब कुछ गंवा चुके होंगे, तो क्यों न कुछ ऐसा  कुछ किया जाये की आगे भविष्य में कोई परिवार अन्धविश्वास  के कारण बर्बाद न हो | तब उन्होंने सक्सेस साईंस फॉर सोसाईटी के नाम से एक संस्था की नीव डाली जिसके अंतर्गत मंटू कुमार भारत के कोने-कोने में जाकर लोगों को बताते हैं की भुत-प्रेत और कुछ नहीं सिर्फ मन भ्रम है और बाबा लोग जो चमत्कार दिखाते हैं वो असल में विज्ञान है, मंटू कुमार लोगों को खुद करके बताते भी हैं की कैसे लोग ढोंगी बाबाओं के चक्कर में पड़ कर अपना समय और पैसा बर्बाद करते हैं

जान से मारने की धमकी भी मिल चुकी है

मंटू कुमार के इस मुहीम के कारण बहुत से ढोंगी बाबाओं की दुकान बंद होने के कगार पर पहुंची तो वे लोग मंटू को जान से मारने की धमकी भी देने लगें, पर मंटू कुमार ठहरे अपनी धुन के पक्के खांटी बिहारी वो कहाँ पीछे हटने वाले थे  वे अब दूगने  जोश में अपने काम को अंजाम देने लगें और उनके इस मुहीम में उनका भरपूर साथ उनकी 21 लोगों की टीम ने दिया | आज भारत का शायद हीं कोई शहर होगा जहाँ मंटू कुमार और उनकी टीम लोगों को जागरूक करने के लिए न पहुंची हो

खुद के खर्च पर करते हैं लोगों को जागरूक

हम सभी जानते हैं आज के अर्थ युग में एक कदम चलने के लिए भी पैसे की जरुरत पड़ती है, पर आप को जान कर आश्चर्य होगा की मंटू और उनकी टीम को इस सराहनीये कार्य के लिए किसी भी तरह का कोई अनुदान नहीं मिलता है वो ये सब अपने या टीम के सदस्यों के पैसे से संभव हो पाता  है |

राष्ट्रपति से मिला है पुरस्कार

मंटू कुमार जी द्वारा चलाये जा रहे इस जागरूकता अभियान के लिए वर्ष 2006 में तात्कालिक राष्ट्रपति ए.पी जे अब्दुल कलाम के हांथो राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चूका है पुनः वर्ष 2018 में राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से भी मंटू कुमार को नवाजा गया इसके अलावा भी मंटू कुमार को सैकड़ो सम्मान से सम्मानित किया जा चूका है |

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भी हो चुके हैं सम्मानित

मंटू कुमार अपने अनोखे एवं सराहनीये कार्य के लिए उत्तरप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ एवं खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर  के हांथो भी सम्मानित हो चुके हैं

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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