रिश्तों को खून से परिभाषित नहीं किया जा सकता |  हर रिश्ता प्रेम से है, और प्रेम का रिश्ता सबसे बड़ा होता है | इसे खून, रंग, रूप, भाषा, बोली, मजहब… किसी दायरे में नहीं बांधा जा सकता है | इन बातों को सही मायने में परिभाषित कर रहा है उत्तरप्रदेश आगरा का रामलाल वृद्धाश्रम जहाँ प्रेम रिश्तों का मोहताज नहीं है, और न हीं खून का | इस वृद्धाश्रम में बेसहारा बुजुर्ग लावारिस बच्चों का सहारा बन गए | अनाथ बच्चों को दादा-दादी सी देखभाल मिल रही है और तिरस्कृत बुर्जुगों को नाती-पोतों सा स्नेह | 

जीवन के मायने समझा रहे हैं ये बुजुर्ग

यहाँ मौजूद बूढ़ी आंखों ने अपनों को पराया बनते देखा है | अपनों से मिली यातना और तिरस्कार झेलने के बाद ही ये लोग वृद्धाश्रम की शरण में आए हैं | उन तथाकथित अपनों का नाम सुनना भी इन्हें अब पसंदनहीं है | औलाद को सुखी देखना इनके जीवन का परम लक्ष्य था | नि:स्वार्थ प्रेम केवल औलाद तक ही सीमित था बाकी सब पराये थे | लेकिन जब वही अपने परायों से भी बदतर बन बैठे, तो अपने-पराये का भेद भलीभांति समझ में आ गया | इंसान होने का मतलब समझ में आ गया | इंसानियत के मायने समझ आ गए|

मोह-माया, स्वार्थ… सब पीछे छूट गया है | नि:स्वार्थ मन से और पूरे जतन से अनाथ बच्चों की देखभाल करने में रत ये बुजुर्ग और इनकी ये कहानी मानव जीवन के मायने समझा रही है |

यहां सब समझते है अपनी जिम्मेदारी

यहाँ हर बुजुर्ग ने एक-एक अनाथ बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी उठा रखी है | बुजुर्ग महिलाएं इनके खाने-पानी से लेकर स्कूल भेजने और सोने तक का पूरा ध्यान रखती हैं | वे बच्चों को कलेजे से लगाकर रखती हैं तो बच्चे भी उन्हें दादी मां कहकर पुकारते हैं | तीन बेटों के दुत्कारने के बाद बेसहारा हो वृद्धाश्रम आईं राजरानी ने अनाथ पिंटू को गोद लिया है | पिंटू को नहीं पता था कि दादी मां कैसी होती है, लेकिन अब वह राजरानी को ही अपना सब कुछ मानता है | उन्हीं के हाथों से खाना खाताहै, उनके पास ही सोता है | पूछने पर वह ज्यादा बातचीत तो नहीं कर पाता, लेकिन पूछने पर कि मां कहां है? राजरानी से लिपट जाता है |

 भरापूरा रामलाल वृद्धाश्रम का परिवार

रामलाल वृद्धाश्रम में कुल 270 लोग रहते हैं | इनमें 95 वृद्धाएं,102 बुजुर्ग पुरुष और 32 बच्चे शामिल हैं | 30 बच्चे गेंदा लाल मेहरा इंटर कॉलेज में पढ़ने जाते हैं | सभी बच्चों को किसी न किसी बुजुर्ग ने गोद ले रखा है | इनके खर्चे की व्यवस्था आश्रम प्रबंधन की ओर से की जाती है | सभी आपस में ही एक दूसरे की देखरेख करते हैं | रामलाल वृद्धाश्रम का संचालन शहर के उद्योगपति व समाजसेवी मिलकर करते हैं |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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