रावण के दस सिर प्रतीक हैं काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर आदि अवगुणों का प्रतिक है | रावण इन सारे अवगुणों के मिश्रित स्वरूप का नाम है। रावण के बारे में कहा जाता है कि वह प्रकाण्ड विद्वान था। किन्तु उसकी यह विद्वत्ता भी उसके स्वयं के अन्दर स्थित अवगुण रूपी रावण का वध नहीं कर पाई। तब वह ईश्वर अर्थात् प्रभु श्रीराम के सम्मुख आया। मानसकार ने ईश्वर के बारे में कहा है-“सन्मुख होय जीव मोहि जबहिं। जनम कोटि अघ नासहिं तबहिं॥ इसका आशय है जब जीव मेरे अर्थात् ईश्वर के सम्मुख हो जाता है तब मैं उसके जन्मों-जन्मों के पापों का नाश कर देता हूं।

विजयादशमी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि यह प्रतीक है झूठ पर सच्चाई की जीत का, साहस का, नि:स्वार्थ सहायता का और मित्रता का, बुराई पर अच्छाई की हमेशा जीत होती है, इस बात को समझाने के लिए दशहरे के दिन रावण के प्रतीकात्मक रूप का दहन किया जाता है.

अगर सामाजिक तौर पर इस पर्व के महत्तव की बात करें, तो ये पर्व खुशी और सामाजिक मेल-जोल का प्रतीक है. चूंकि रावण के साथ लड़ाई के वक्त शस्त्रों का भी इस्तेमाल हुआ था, इसलिए दशहरे को शस्त्र पूजा का साथ भी जोड़ा जाता है.

दशहरे के दिन लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ किसी सार्वजनिक स्थल पर एकजुट होकर खुशियां मनाते है. कुल मिलाकर इस पर्व का मूल उद्देश्य परिवार और अपनों के साथ समय बिताना होता है.

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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