बिहार मधुबनी के हरलाखी प्रखंड के गंगौर गांव की रहने वाली बिट्टू मिश्रा (Social Activities Bittu Mishra) को समाज सेवा की भावना विरासत में उनके पिता जी से मिली थी जो गांव में हीं एक स्कुल चलाते हैं | आज बिट्टू मिश्रा अपने सेनेटरी नैपकिन और शिक्षा जागरूकता अभियान के कारण स्लम बस्तियों में खासी चर्चित हो चुकी है

मधुबनी के 25 से भी अधिक स्लम बस्तियों को कर चुकी है जागरूक

बिट्टू मिश्रा मधुबनी(Madhubani) जिले के वैसे गांव जहां के लोग शिक्षा से कोसों दूर है और सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग तो दूर उनका नाम तक नहीं जानती, वैसे जगहों को चिन्हित कर बिट्टू मिश्रा (Bittu Mishra) पहुँच जाती है और लोगों को सेनेटरी नैपकिन के प्रयोग से लाभ और प्रयोग न करने के नुकसान के बारे में विस्तार से समझाती है साथ हीं बिट्टू मिश्रा उन लोगों को मुफ्त में सेनेटरी नैपकिन भी देती है, और अगर बाद में फिर जरूरत पड़ने पर बिट्टू मिश्रा उन्हें मामूली सा शुल्क लेकर उन्हें उपलब्ध कराती है तथा जो लोग शुल्क देने में बिल्कूल सक्षम नहीं हैं तो उन्हें वो निःशुल्क ही दे देती है

Social Activities Bittu Mishra Madhubani Bihar

स्कुल में जा कर बच्चियों को करती हैं जागरूक

सेनेटरी नैपकिन के लिए बच्चियों को सरकार द्वारा प्रतिमाह 160 दिया जाता है, पर शायद ही कोई बच्ची होगी जिसे इस बात का पता होगा | बिट्टू मिश्रा(Bittu Mishra) ने जब बच्चियों से इस बारे में पूछा तो उन्हें ये बात मालूम हीं नहीं थी, तब बिट्टू ने ठाना की जितने भी स्कुल है वहां वो और उनकी टीम जाकर बच्चियों को इस जानकारी से अवगत कराएगी | आगे उनकी योजना खुद की सेनेटरी नैपकिन मशीन लगाने की भी है |

Social Activities Bittu Mishra Madhubani Bihar

महिला सशक्तिकरण के लिए चलाती हैं अभियान

बिट्टू मिश्रा (Bittu Mishra) का मानना है की महिलाएं पुरुषों से किसी भी मामले में कम नहीं हैं अगर उनके सही मार्गदर्शन दिया जाये तो वो भी बहुत कुछ कर सकती हैं इन्ही बातों को ध्यान में रखकर बिट्टू (Bittu Mishra)अपनी संस्था जागरूकता अभियान गंगौर के अंतर्गत सिलाई ट्रेनिंग सेंटर चलाती है जहां महिलाओं को मात्रा 100 के मासिक शुल्क पर सिलाई कढ़ाई एवं पेंटिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है | साथ हीं इस सेंटर पर एक छोटी सी लाइब्रेरी की भी व्यवस्था की गई है जहां महिलाएं प्रशिक्षण के अलावा किताबों से भी ज्ञान अर्जित कर सके

आज भी पैदल हीं सफर करती है बिट्टू

एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी बिट्टू के पास आज एक स्कूटी तक नहीं है | इतना कुछ करने के लिए भी वो पैदल हीं सफर करती है | अगर कुछ पैसे उनके पास संग्रहित भी हो जाता है तो वो उन पैसे से गरीब बच्चों के पाठ्य सामग्री खरीदने में खर्च कर देती है |
बिट्टू का मानना है की आज के नेता सिर्फ गरीबी हटाओ के नाम पर खुद की हीं गरीबी हटाते है और गरीब गरीब हीं रह जाता है | ऐसे में हम युवा अपनी जिम्मेवारी समझते हुए आगे आयें और अपनी भागीदारी निभाए |

दस ऊर्जावान लोगों को टीम है बिट्टू के पास

अपनी संस्था जागरूकता अभियान गंगौर के दो वर्ष के सफर में बिट्टू मिश्रा के टीम में दस लोग हैं जो ठीक बिट्टू की तरह हीं सोंचते हैं तथा बिट्टू के साथ कदम से कदम मिला कर चलते हैं

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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