बिहार (Bihar)में गंगा और गंडक नदी के संगम पर ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व वाला सोनपुर मेला (Sonepur Mela)का उद्घाटन हो चूका है | एक महीने तक चलने वाले इस ऐतिहासिक (World Famous Historic) मेले की छटा सबको मंत्रमुग्ध कर देती है | हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले शुरू होने वाले इस विश्व प्रसिद्ध यह मेले में लाखों देसी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं | इस मेले को ‘हरिहर क्षेत्र मेला’ और ‘छत्तर मेला’ के नाम से भी जाना जाता है |

एशिया के सबसे बड़े पशु मेले के रूप में विख्यात है

सोनपुर मेले(Sonepur Mela) की शुरुआत कब से हुई इसकी कोई निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि पूर्व में यहां पशु बाजार लगता था| सारण और वैशाली जिले की सीमा पर लगने वाले इस मेले की प्रसिद्धि यूं तो सबसे बड़े पशु मेले की है, मगर इस मेले में आमतौर पर सभी प्रकार के सामान मिलते हैं | मेले में जहां देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए पहुंचते हैं, वहीं विदेशी सैलानी भी यहां खिंचे चले आते हैं |

World Famous Historic Sonepur Mela Bihar India

पहले विदेशी व्यापारी भी आते थे

अंग्रेजों के जमाने में हथुआ, बेतिया, टेकारी तथा दरभंगा महाराज की तरफ से सोनपुर मेला (Sonepur Mela) के अंग्रेजी बाजार में नुमाइशें लगाई जाती थीं | नुमाइशों में कश्मीर, अफगानिस्तान, ईरान, मैनचेस्टर से बने बेशकीमती कपड़े एवं अन्य बहुमूल्य सामग्रियों की खरीद-बिक्री होती थी | इन बहुमूल्य सामग्रियों में सोने, चांदी, हीरों और हाथी के दांत की बनी वस्तुएं तथा दुर्लभ पशु-पक्षी का बाजार लगता था |

World Famous Historic Sonepur Mela Bihar India

यहां हुई थी ‘गज’ और ‘ग्राह’ की लड़ाई

इस मेले को लेकर एक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है | मान्यता है कि भगवान के दो भक्त हाथी (गज) और मगरमच्छ (ग्राह) के रूप में धरती पर उत्पन्न हुए | कोणाहारा घाट पर जब गज पानी पीने आया तो उसे ग्राह ने मुंह में जकड़ लिया और दोनों में युद्ध शुरू हो गया | यह युद्ध कई दिनों तक चलता रहा | इस बीच गज जब कमजोर पड़ने लगा तो उसने भगवान विष्णु से प्रार्थना की, फिर भगवान विष्णु ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुदर्शन चक्र चलाकर दोनों के युद्ध को खत्म कराया |

यहां पशु की खरीददारी को शुभ माना जाता है

इस स्थान पर दो जानवरों का युद्ध हुआ था, इस कारण यहां पशु की खरीददारी को शुभ माना जाता है | इस मेले में हाथी, घोड़े, ऊंट, कुत्ते, बिल्लियां और विभिन्न प्रकार के पक्षी सहित कई पशु-पक्षियों का बाजार सजता है, इस मेले के इतिहास के विषय में यह भी कहा जाता है कि इस मेले में चंद्रगुप्त मौर्य सेना के लिए हाथी खरीदने के लिए यहां आते थे | स्वतंत्रता आंदोलन में भी सोनपुर मेला क्रांतिकारियों के लिए पशुओं की खरीदारी के उद्देश्य से पहली पसंद रहा था , लेकिन यह मेला केवल पशुओं का कारोबार का बाजार नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था दोनों का मिलाजुला स्वरूप है.इसी स्थान पर हरि (विष्णु) और हर (शिव) का हरिहर मंदिर भी है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों भक्त श्रद्धा से पहुंचते हैं | कुछ लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान राम ने सीता स्वयंवर में जाते समय किया था |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar

Latest posts by niraj kumar (see all)