भारत में अक्सर एसिड हमलों (Acid Attack)के मामले देखने को मिलते हैं, लेकिन इससे जुड़ा कोई विश्वसनीय आंकड़ा मौजूद नहीं है | सरकारी आंकड़ों कि माने तो एक वर्ष में लगभग  1,000 एसिड अटैक (Acid Attack) के  मामले सामने आते हैं, पर  समाजिक कार्यकर्ता इस आंकड़े को एक हास्यपद आंकड़ा बताते हैं | उनका कहना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कई गुना ज़्यादा का है |


Acid Attack Victim


आप जरा कल्पना कीजिये की वे लोग किस शारीरिक और मानसिक वेदना के साथ अपनी जिंदगी गुजारते होंगे, तथा इस पीड़ा से गुज़रने वाले लोगों का इलाज करना कितना चुनौतीपूर्ण काम होगा | लेकिन इस चुनौती भरे काम को अंजाम दे रहे हैं ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा एनएचएस के रिटायर प्लास्टिक सर्जन चार्ल्स वाइवा जो चार दशकों से भी अधिक वक्त से विकासशील देशों में इस तरह से घूमकर लोगों का निःशुल्क इलाज कर रहे हैं |

एक पूरी टीम है इनके पास

इस दल के सदस्य अपनी छुट्टियों का इस्तेमाल दुनिया भर में घूमकर एसिड हमले के शिकार (Acid Attack Victim)ग़रीब लोगों का मुफ्त में प्लास्टिक सर्जरी करने में करते हैं | यह दल ब्रितानी चैरिटी संस्था इंटरप्लास्ट यूके का हिस्सा है | इस दल में सर्जन, डॉक्टर, नर्स, एक फिजियोथेरेपिस्ट और एक फर्मासिस्ट भी शामिल हैं |

खुद के खर्च पर करते हैं मदद

ये मेडिकल टीम अपनी हवाई यात्रा और रहने सहने का खर्च ख़ुद ही उठाते हैं, ये लोग किसी भी जगह पर मौजूद स्थानीय अस्पताल में एक कैंप लगाते हैं फिर मैराथन तरीके से लोगों का दो हफ्तों तक इलाज करते हैं |

मरीजों का साहस देखकर उन्हें मिलती है हिम्मत

वो कहते हैं, “आप ऐसे दौरों से बहुत कुछ पाते हैं, मैं खुद को देखता हूं और सोचता हूं कि अगर मेरे साथ जलने की ऐसी घटना होती है तो मैं क्या करूंगा | मैं नहीं जानता कि मैं इतना हिम्मत रख पाऊंगा कि नहीं, ऐसे हालात में एसिड अटैक (Acid Attack Victim )बहुत प्रेरणा देने वाले हैं क्योंकि वे लोग जीवन से हार नहीं माने | हममें से बहुत सारे लोग जब छुट्टियों पर जाते हैं तो थोड़े दिनों के लिए अपनी ज़िंदगी बदलना चाहते हैं लेकिन दूसरों की ज़िंदगी बदलना ज्यादा बड़ा काम है |

बिहार की अनुपमा भी करा चुकी है सर्जरी

अनुपमा बिहार से एक हज़ार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करके दिल्ली आई हैं अपना इलाज कराने के लिए

ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले अनुपमा ने वाइवा को अपनी सबसे बड़ी क़ीमती चीज़ दिखाई, ये था तस्वीरों का वो अलबम जो हमले से पहले की उनकी तस्वीरों का था | उन्होंने एक तस्वीर अपने हाथ में थाम रखी थी जिसमें वे बिस्तर पर लाल और सुनहरी साड़ी में लिपटी हुई बैठी हुई थी और कैमरे की ओर सिर उठा कर देख रही थी |

बीस साल बाद अनुपमा अभी भी एक खुश और स्वाभिमानी महिला है लेकिन उनका भविष्य बर्बाद हो चुका था |

एसिड हमले (Acid Attack )के मामले में अधिकतर औरतें शिकार (Victim)हुई हैं और इन हमलों को अंजाम देने वाले अधिकतर पुरुष हैं जो अक्सर बदले की कार्रवाई के तहत इन हमलों को अंजाम देते हैं | अनुपमा की भी उनमे से एक है अनुपमा और उनकी बहन पड़ोस में रहने वाले एक परिवार के हाथों यौन उत्पीड़िन का शिकार हो रही थी | पड़ोस के परिवार के दो बेटे और एक बेटी उनके सामने यौन प्रस्ताव रखते थे और उनपर भद्दी-भद्दी टिप्पणियां करते थे | वे उन्हें अपने घर में लाने के लिए लालच देते थे | जब उनके पिता ने उनके ख़िलाफ़ शिकायत की तो वे गुस्सा हो गए | शिकायत करने के कुछ दिनों के बाद वे अनुपमा के घर में आए और अनुपमा और उनकी बहन पर सोते हुए में एसिड फेंककर भाग गए |

अनुपमा की कई बार सर्जरी हुई और उनका कहना है कि हर बार उन्हें कहा गया कि उनका सबसे निम्न दर्जे का इलाज किया गया है अनुपमा और उनका परिवार इतना गरीब था कि वे लोग निजी चिकित्सा सेवा नहीं ले सकते थे | तभी उन्हें वाइवा के नेतृत्व में एक ऊंचे दर्जे की सर्जरी सेवा मुफ्त में मिली और आश्चर्यजनक रूप से एक छोटे से ही ऑपेरेशन में वाइवा और उनकी टीम ने उनके चेहरे को एक नया रूप दिया | दो घंटे के बाद ही वे चाय और बिस्कुट खा रही थी |

niraj kumar

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एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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