स्लम बस्तियों में बच्चों की क्या स्थिति रहती है इस बात से हम सभी परिचित है, और उनके उत्थान का एक मात्र जरिया है, उनको शिक्षित कर दिया जाय, नहीं तो भविष्य में उनकी भी वही स्थिति होगी जो वर्तमान में उन बच्चों के माता-पिता की है | उन बच्चों का भी शिक्षा का अधिकार है और अब सरकार भी इनके लिए ठोस कदम उठा रही है, लेकिन जब तक देश के शिक्षित युवा आगे नहीं आयेंगे तब तक इस समस्या का सम्पूर्ण निवारण संभव नहीं है | और इसी  क्षेत्र में सराहनिय कार्य कर रहे हैं उत्तरप्रदेश के बहराइच (Bahraich-Uttarpradesh) शहर के बख्शीपुरा नई बस्ती के रहने वाले (Social Activist Deepak Srivastav) समाजसेवक दीपक श्रीवास्तव जो शिक्षा के क्षेत्र में किये गए कार्य के कारण एक अलग पहचान बना चुके हैं |

मुस्कुराता बचपन संस्था के माध्यम से जला रहे हैं शिक्षा की ज्योत

स्लम बस्ती के वे बच्चे जो कल तक अपना बचपन बकरी चराने और खेलने में बिता रहे थे, (Social Activist Deepak Srivastav) समाजसेवक दीपक श्रीवास्तव के प्रयास से स्लेट पर क ख ग घ और ABCD सिख रहे हैं | दीपक श्रीवास्तव (Deepak Srivastav ) उन बच्चों को अपने यहाँ कुछ दिन पढ़ा कर उनका नामांकन नजदीक के सरकारी स्कुल में करा देते है | अब तक दीपक पचास से भी अधिक बच्चों का नामांकन सरकारी स्कुल में  करा चुके हैं |

बच्चों के माता पिता को समझाना काफी मुश्किल था

पर दीपक श्रीवास्तव (Deepak Srivastav) के लिए ये सब इतना आसान नहीं था | जब बच्चों के माता पिता को पढने के लिए भेजने की बात करते तो वे साफ मना कर देते, और बोलते थे पढ़-लिख कर क्या करेगा, अभी वो बकरी चराता है तो हम लोगों को कुछ पैसे भी मिलते हैं उसे पढने भेजेंगे तो उसके बदले आप पैसे देंगे |

किसी भी खाली जगह पर लग जाती है मुस्कुराता बचपन की क्लास

दीपक और उनके सहयोगी शिक्षक को बच्चों को पढ़ाने के लिए किसी भवन की आवश्यकता महसूस नहीं होती है, वे हमजापुरा, बख्शीपुरा, घसियारीपुरा, और घोसिनबागके आस-पास सार्वजानिक स्थानों जैसे मंदिर मस्जिद तथा फुटपाथ पर प्लास्टिक शिट या चटाई बिछाकर बच्चों को शिक्षा से अवगत कराते हैं

आज दीपक अपने 20 सहयोगी शिक्षकों की मदद से स्लम के ढाई सौ बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञानं इत्यादि विषयों की एक-एक घंटे निःशुल्क शिक्षा दे रहे हैं |

एक छोटी सी घटना से दीपक को मिली थी प्रेरणा

दीपक जब ग्रेजुएशन कर रहे थे तब कॉलेज जाने के रास्ते में एक बच्चे को स्कुल की पोशाक पहने कचड़ा बीनते देखा, जब दीपक ने उस बच्चे से पूछा तो वो बोला कि स्कुल की फ़ीस जमा न करने के कारण उसे स्कुल से निकाल दिया गया है | उस मासूम के मुख से एसी बात सुन दीपक ने उसी क्षण तय किया कि अपनी पढाई ख़त्म करने के बाद वो उन बच्चों के लिए निःशुल्क विद्यालय खोलेंगे जो पैसे के आभाव में पढ़ नहीं पाते हैं

अन्ना हजारे से भी मिली थी प्रेरणा

वरिष्ठ समाजसेवक अन्ना हजारे ने कहा था, जब समाज साक्षर होगा तभी भ्रष्टाचार मुक्त भारत की नीव रखी जा सकती है |बहराइच उत्तरप्रदेश (Bahraich Uttarpradesh) के दीपक श्रीवास्तव (Deepak Srivastav)आज अन्ना हजारे के इन कथनों को आत्मसाथ करके स्लम बस्तियों में शिक्षा की ज्योत जला रहे हैं | दीपक का सपना है की बहराइच का एक भी बच्चा निरक्षर ना हो और इसके लिए दीपक निरंतर प्रयासरत हैं |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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