बिहार के सबसे पसंदीदा व्यंजनों में से एक है लिट्टी, जिसने बिहार से बाहर तो अपनी धाक जमा ही चुकी है इसके अलावा विदेशियों को भी अपने स्वाद का दीवाना बनाया है | लिट्टी तो है हीं लाजवाब उसके साथ खाए जाने वाले बैंगन टमाटर और आलू का चोखा (भर्ता) जिसे खाना तो दूर देखने मात्र से हीं जीभ से लार टपकने लगता है |

मौर्य शासन काल से हीं प्रचलन में है लिट्टी

मौर्य शासन काल में लड़ाई के दौरान भी सैनिकों को खाने में लिट्टी मिलता था, कारण था लिट्टी पकने के बाद 5-से 7 दिन तक ख़राब नहीं होती और इसमें भरे जाने वाले चने के सत्तू के कारण ये पोषकता से भरपूर होते थे | बदलते समय के अनुसार इसे खाने के तरीके में बदलाव हुआ और लिट्टी को चोखा का साथ मिला |

स्वाद हिट, सेहत फिट वो भी बजट में

भले आज के युवा पीढ़ी पिज्जा बर्गर की दीवानगी में डूबे दिखते हों पर वो भी अब पांच सौ के पिज्जा को छोड़ बिहार पटना के हर चौक-चौराहे पर बीस रूपए में आसानी से मिल जाने वाले लिट्टी का लुत्फ़ उठा रहे हैं |

मसालों का बहुत कम प्रयोग होता है

गिले आंटे में भरने के लिए भुने चने की सत्तू का प्रयोग होता है सत्तू में हीं स्वाद के लिए कुछ मसाले का प्रयोग किया जाता है जैसे नमक, अजवाईन, मंगरैला, कालीमिर्च पावडर, निम्बू का रस, बारीक़ कटा लहसुन अदरक, बारीक़ कटा हरा धनिया और अगर हो सके तो आचार का मसाला और सरसो का तेल  | इन सब सामग्रियों को सत्तू में मिलाईये और तैयार आंटे के बीच  भरिये |

गोइठा (अंगीठी ) की धीमी आंच पर मिलता है लाजवाब स्वाद

वैसे तो लोग आभाव में लिट्टी को गैस चूल्हे  पर लोहे की जाली रख कर या फिर कोयले के आंच पर सेंक लेते हैं, पर   अगर आप लिट्टी का असली स्वाद लेना चाहते हैं तो उसे अंगीठी की धीमी आंच पर रख कर पकाएं तभी आप ले  सकेंगे लिट्टी के असली स्वाद का मजा | साथ हीं बैंगन और टमाटर को भी अंगीठी के आग पर हीं पकाएं | बैंगन को पकाने  से पहले उसमे चिड़ा लगा कर लहसुन की कलियों को डाल दे ताकि बैंगन के साथ उसमे मौजूद लहसुन भी पक जाय, फिर लुत्फ़ उठाइये लिट्टी और चोखा के शुद्ध देशी स्वाद का |

niraj kumar

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