हमारे देश में आज भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा से वंचित है | संविधान के 86वें संशोधन विधेयक में 6 से 14 साल के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया, बावजूद इसके कई गावों में आज भी स्कूलों का अभाव है | पर ख़ुशी इस बात की है कि आज कुछ युवा इस कमी को पूरा करने के लिए आगे आ रहे हैं और अपने स्तर से गरीब छात्रों के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने की मुहिम में जुटे हैं | उन युवाओं में एक नाम बिहार (Bihar) के मधुबनी जिले (Madhubani District)  में रहने वाले युवा सन्नी कुमार (Sunny Kumar) का भी आता है, जो पिछले दस वर्षो से गरीबों और समाज के उपेक्षितों को शिक्षित करने की हरसंभव प्रयास कर रहे हैं |

Bihar Madhubani District Ke Sunny Kumar

स्लम के बच्चों की स्थिति देख कुछ करने का ठाना

मधुबनी जिले (Madhubani District) के सन्नी कुमार (Sunny Kumar) का गरीबी से बहुत करीबी रिश्ता रहा है सन्नी गरीबों की दयनीय स्थिति को देख भावुक हो जाते हैं |  जब सन्नी ने देखा कि गरीबी से बेहाल बच्चे नंगे पैर शिक्षा ग्रहण करने के लिए स्कूल जा रहे हैं, उनके पास न पैर में पहनने के लिए चप्पल थे और न ही शरीर पर कपड़े | इससे द्रवित होकर उन्होंने उन बच्चों के लिए कुछ करने का निश्चय किया |

Bihar Madhubani District Ke Sunny Kumar

इन बच्चों के जीवन को नई दिशा देना सन्नी का मकसद बन गया

सन्नी कुमार (Sunny Kumar) कहते हैं, ‘बच्चों को बुरी हालत में देखकर मुझसे रहा नहीं गया और एक दिन मैं अपने बस्ती के बच्चों  के पास गया और उनके माता-पिता से बच्चों को पाठशाला नहीं भेजने का कारण जानना चाहा | इस पर उन लोगों का कहना था कि उनके सामने पेट भरने का सवाल है और ऐसे में पढ़ाई-लिखाई के बारे में तो वो सोच ही नहीं सकते।’ फिर क्या था, सन्नी कुमार को अपने जीवन का मकसद मिल चुका था। साल 2008 में उन्होंने समाजिक संस्था सक्सेस साइंस फॉर सोसाइटी से जुड़ा जुड़ने के बाद उन्होंने इस सोसाइटी के बैनर तले इन गरीब बच्चों के भविष्य संवारने का बीड़ा उठाया |  सन्नी अब इन बच्चो के लिए दो पाठशाला चलाते हैं साथ हीं उन बच्चों को पठन-पाठन की सामग्री भी निःशुल्क उपलब्ध कराते हैं | इस संस्था के अंतर्गत उन्होंने बच्चों को कॉपी किताबें देने से लेकर टीचर की तनख्वाह तक की व्यवस्था सुनिश्चित की। एक पाठशाला से शुरू होकर अब दो पाठशाला हो गए हैं, जहाँ वर्तमान में 06 टीचर हैं बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

आत्मरक्षा के गुण भी सिखाते हैं सन्नी

बस्ती के सभी परिवारों को हर सम्भव मदद तो करते हीं हैं साथ में पाठशाला में पढ़ने  वाले बच्चों तथा बच्चियों को  को नि: शुल्क वुशू खेल का भी प्रशिक्षण देने का काम करते हैं सन्नी कुमार (Sunny Kumar) जिससे बच्चे आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सके। सन्नी कुमार (Sunny Kumar) और लोगों के बीच शिक्षा के महत्व को लेकर के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी लोगों को जागरूक करते हैं |

Bihar Madhubani District Ke Sunny Kumar

राष्ट्रीय युवा गौरव सम्मान से सम्मानित भी हो चुके हैं सन्नी

मधुबनी जिले (Madhubani District) के सन्नी कुमार (Sunny Kumar) का सपना है कि वह उन सभी गावों में शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे, जहाँ लोग गरीबी और संसाधनों की कमी से अशिक्षित रह जाते। उनकी यह पहल सच में क़ाबिले तारीफ है। इस यूवा के जोश और जुनून को हर कोई करता है सलाम। सन्नी कुमार को इस कार्य के लिए इसी साल राष्ट्रीय युवा गौरव सम्मान से नई दिल्ली में केन्द्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन मंत्री विजय गोयल जी और केन्द्रीय समाजिक न्याय मंत्री रामदास आठवले ने सन्नी कुमार के काम के लिए नई दिल्ली में सम्मानित हो चुके हैं

सचमुच अगर आज के युवा अपने अन्दर सन्नी जैसा विचार रखे तब शायद हीं कोई शिक्षा से वंचित रह जाए, आज हमारे देश को एक नहीं लाखों सन्नी कुमार की जरुरत है |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
niraj kumar