बिन बेटी हम समाज की कल्पना भी नहीं कर सकते, पर इसे विडंबना हीं कहेंगे की आज भी हमारे समाज में बेटी को वो दर्जा नहीं मिल पाया है जिसकी वो हक़दार है | सरकार भले भूर्ण हत्या पर लगा चुकी है, बावजूद आज भी चोरी-छिपे कोख में पल रहे बेटियों की हत्या हो रही है | जो लोग इस घिनौने काम को अंजाम देते हैं, शायद वे उस समय भूल जाते हैं कि वो भी किसी बेटी के कारण ही इस धरती पर आयें हैं | बेटी तो है जग की जननी, हमें रक्षा अब इसकी करनी |

Dr. Shipra Dhar Shrivastav Girls Birth Varanasi Uttarpradesh

समाज के लिए मिसाल है (Dr. Shipra Dhar Shrivastav) डॉ. शिप्रा धर श्रीवास्तव

बेटियों की जान लेने वालों को रोकने और लड़कियों के जन्म को बढ़ाना देने के लिए (Varanasi) वाराणसी के डॉक्टर (Dr. Shipra Dhar Shrivastav) डॉ. शिप्रा धर श्रीवास्तव ने शुरू की एक अनोखी मुहीम  इसके तहत उनके नर्सिंग होम में यदि कोई महिला (Girls Birth ) बच्ची को जन्म देती है, तो उससे कोई डिलिवरी चार्ज नहीं लिया जाता |

अब तक 100 बेटियों के जन्म पर कोई चार्ज नहीं लिया

डॉ. शिप्रा धर श्रीवास्तव (Dr. Shipra Dhar Shrivastav) ने (Girls Birth) बेटियों के जन्म के बाद उनकी जान ले लेने को रोकने के लिए और लोगों की सोच में बदलाव के लिए प्रयास शुरू किया | डॉ. शिप्रा धर श्रीवास्तव (Dr. Shipra Dhar Shrivastav) बताती है कि लोगों में बेटियों के प्रति नकारात्मक सोच अब भी है | जब परिजनों को पता चलता है कि बेटी ने जन्म लिया है तो वह मायूस हो जाते हैं | गरीबी के कारण कई लोग तो रोने भी लगते हैं | इसी सोच को बदलने की वह कोशिश कर रही हैं, ताकि अबोध शिशु को लोग खुशी से अपनाएं | इसीलिए वह (Girls Birth) बेटी के जन्म पर फीस नहीं लेती हैं | बेड चार्ज भी नहीं लिया जाता, यदि ऑपरेशन करना पड़े तो वह भी मुफ्त है |

Dr. Shipra Dhar Shrivastav Girls Birth Varanasi Uttarpradesh

पी एम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

डॉ शिप्राधर द्वारा उनके अस्पताल में बेटी पैदा होने पर कोई भी फीस न लेने की जानकारी होते ही मई में वाराणसी दौरे पर आए पी एम मोदी बहुत प्रभावित हुए थे | पीएम ने बाद में मंच से अपने संबोधन में देश के सभी डॉक्टरों से आह्वान किया था कि वे हर महीने की नौ तारीख को जन्म लेने वाली बच्चियों के लिये कोई फीस ना लें | इससे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं की मुहिम को बल मिलेगा | यही नहीं (Dr. Shipra Dhar Shrivastav) डॉ शिप्रा ने गरीब लड़कियों की शिक्षा का भी बीड़ा उठाया है | वह नर्सिंग होम में ही लड़कियों को पढ़ाती हैं | घरों में काम करने वाली कई बच्चियां उनके पास पढ़ने आती हैं | आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ दिलाने में भी मदद करती हैं | डॉ. शिप्रा ने बताया कि उनके पति डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव फिजीशियन है और वह भी उनका पूरा साथ देते हैं |

अनाज बैंक भी चलाती हैं डॉक्टर साहिबा

बच्चों और परिवारों को कुपोषण से बचाने के लिए डॉ. शिप्रा धर अनाज बैंक भी संचालित करती हैं | अति निर्धन विधवा और असहाय 38 परिवारों को हर माह की पहली तारीख को अनाज उपलब्धत कराती हैं | इसमें प्रत्येक को 10 किग्रा गेहूं और 5 किग्रा चावल दिया जाता है | डॉ. शिप्रा धर का मानना है कि सनातन काल से बेटियों को लक्ष्मी का दर्जा दिया गया | देश-विज्ञान तकनीक की राह पर भी आगे बढ़ रहा है | वैसे भी जहां बेटी के जन्म पर खुशी नहीं, वह पैसा किस काम का, अगर बेटियों के प्रति समाज की सोच बदल सके तो वे खुद को सफल समझें |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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