शिक्षा सब का अधिकार है, पर हमारे बिहार में बहुत से एसे परिवार हैं जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पाते हैं, फलस्वरूप बहुत सी  प्रतिभाएं देश दुनियां में अपनी चमक बिखेरने से पहले हीं गुमनामी के अंधेरों में खो जाते हैं | इन्ही सब समस्याओं को देखते हुए एन.आई.टी पटना ( NIT Patna Bihar)के कुछ युवाओं ने स्लम बस्तियों  के उन परिवारों के बच्चों की जिंदगी सँवारने का बीड़ा उठाया है जो पैसे के अभाव के कारण बेहतर शिक्षा नहीं ले पाते हैं, और सफ़र करीब एक दशक से निरंतर जारी है


Sankalp Ghar Ghar Shiksha Ka NIT Patna Bihar

‘संकल्प घर-घर शिक्षा का’ के माध्यम से बच्चों की संवारते है जिंदगी

एनआइटी, पटना (NIT Patna Bihar) में अपनी सामाजिक दायित्व समझते हुए एन०एस०एस से जुड़े विद्यार्थियों ने 2007 में ‘संकल्प घर-घर शिक्षा का’ (Sankalp Ghar Ghar Shiksha Ka ) स्थापित किया था | इसका उद्देश्य स्लम में रहने वाले गरीब बच्चों के बेहतर शिक्षा मुहैया करवाना था |

यहाँ सोमवार से शनिवार तक प्रतिदिन शाम पांच बजे कक्षा प्रारंभ हो जाती है | इन बच्चों को पढ़ाने के लिए रोज शाम पांच बजते ही(NIT Patna Bihar) एनआइटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) कैंपस के विद्यार्थी शिक्षक की भूमिका में आ जाते हैं | यहाँ कक्षा एक से 10 तक के लिए अलग-अलग बैच में पढ़ाई होती है और औसतन 350 बच्चे हर साल संकल्प से जुड़कर शिक्षित हो रहे हैं |

यहाँ पढने वाले बच्चें आइआइटी तक  में  सफलता हासिल कर चुके हैं

एनआइटी पटना (NIT Patna Bihar) के परिसर में चलने वाली ‘संकल्प घर-घर शिक्षा का’  की कक्षा में पढ़कर निकल रहे ‘गुदड़ी के लाल’ हर साल जवाहर नवोदय विद्यालय, सिमुलतला आवासीय विद्यालय, सैनिक स्कूल आदि की प्रवेश परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं | प्रथम बैच (2007) के विद्यार्थी आशीष सुमन 2016 में जेईई एडवांस में सफल होकर आइआइटी मुंबई में पढ़ाई कर रहे हैं | आशीष के शब्दों में ‘संकल्प’ में पढ़ाया नहीं जाता है, बल्कि पढऩे को प्रेरित किया जाता है | इस साल मैट्रिक में छह विद्यार्थियों को साइंस और मैथ में 100 में 100 अंक मिले हैं।

हमारे बच्चे भी अंग्रेजी बोलेंगे, ये सपना हीं था

पटना (Patna) के गुलबी घाट के रहने वाले रामप्रवेश राम का कहना है कि बच्चे अंग्रेजी में बात करेंगे, इसकी कल्पना भी नहीं करते थे | ‘संकल्प’ ने दो बेटे और बेटियों की जिंदगी संवार दी | पिछले छह साल से उनके बच्चे नियमित(Sankalp Ghar Ghar Shiksha Ka) ‘संकल्प’ में पढ़ाई कर रहे हैं | अंग्रेजी में बात करते और चुटकी में गणित के प्रश्नों को हल करते देख रामप्रवेश और उनकी पत्नी एनआइटी के विद्यार्थियों को दुआ देते हैं |

आसपास के स्लम में रहने वाले ऐसे तमाम परिवार हैं जिन्हें ‘संकल्प’ ने शिक्षा की लौ से रोशन किया है | महेंद्रू के दीपक प्रसाद के बच्चे यहां पढ़ाई करने के बाद नवोदय विद्यालय में दाखिला हो गया |

पठन-पाठन की सारी सामग्री भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है

Sankalp Ghar Ghar Shiksha Ka से हर साल 200 एनआइटी के विद्यार्थी जुड़ते हैं, और सभी को सप्ताह में एक-दो या उनकी इच्छा पर अधिक कक्षाएं आवंटित की जाती हैं | साथ हीं एनआइटी के बच्चे फंड जमा कर बच्चों को पठन-पाठन सामग्री भी मुफ्त उपलब्ध कराते हैं, इसके लिए प्रत्येक छात्र प्रति सेमेस्टर 200 रुपये का योगदान अपनी पॉकेट मनी से करते हैं, पूर्ववर्ती छात्र और शिक्षक भी डोनेशन देते हैं और तो और बच्चों को ड्रेस और किताबें उपलब्ध कराने के लिए पेंटिंग, ड्रेस मेकिंग आदि प्रतियोगिताओं से मिली राशि को भी डोनेट करते हैं |

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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