कहने को तो आज हमारा देश विश्वगुरु बनने की राह पर अग्रसर है, पर एक सच्चाई यह भी है कि आज भी हमारे देश में प्रतिदिन लाखों लोगों को भोजन के आभाव में भूखे सोना पड़ता हैं, और इस सच्चाई का दूसरा पक्ष यह भी है कि हम भारतीय जितना भोजन बर्बाद करते हैं अगर वो सही व्यक्ति के थाली तक पहुँच जाये तो शायद हीं हमारे देश की किसी को भूखा सोना पड़े | इसी सोंच को आगे बढ़ाते हुए राजधानी पटना के  युवा राजीव मिश्रा ने शुरू किया भोजन बैंक |

बचपन से हीं था समाज सेवा की भावना

बचपन से हीं समाज सेवा की भावना रखने वाले राजीव मिश्रा जी एक बार किसी पत्रिका में पढ़े कि आज भी हमारे देश में लगभग बाइस करोड़ लोग किसी न किसी कारण वस् भूखे पेट सोने को मजबूर है | आजादी मिलने के सत्तर साल बाद भी जब हमारी स्थिति यह है कि करोड़ो लोग भूख के दर्द को बरदाश्त कर जिन्दगी काट रहे हैं | इस बात ने राजीव मिश्रा को इतना प्रभावित किया कि वे इस विषय पर गंभीरता से सोंचने पर मजबूर हो गयें, कि आखिर क्या किया जाए और कैसे जिससे लोगों को भोजन के आभाव में भूखा न सोना पड़े |

कुछ इस तरह अपने बेटी के जन्मदिन को बनाया बहुत खास

12 सितंबर के दिन राजीव मिश्रा के बिटिया का अवतरण दिवस था, और राजीव जी इस दिन को बहुत खास बनाना चाहते थे | इस तरह 12 सितंबर 2017 को राजधानी पटना के बेली रोड राजाबाजार पाया नंबर 26 के पास भोजन बैंक की नीव डाली | भोजन बैंक का शुभारम्भ सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद के हांथो हुआ |

लोगों के सहयोग से असहायों की भूख मिटाता है भोजन बैंक

वैसे लोग जो दो वक्त की रोटी जुटाने में सक्षम नहीं है, बेली रोड राजाबाजार पायानंबर 26 के पास स्थित भोजन बैंक आकर अपनी भूख मिटाते हैं | प्रति दिन 150-200 गरीबों और असहायों की भूख मिटाने वाली भोजन बैंक शाम को खुलती है | यह अनोखा भोजन बैंक राजीव मिश्रा खुद के पैसे और कभी-कभी दुसरे व्यक्ति के आर्थिक सहायता ( अन्न, खाद्य सामग्री ) से चलाते हैं | इस नेक कार्य में सहयोग करने वाले वैसे लोग भी शामिल हैं जो अपने माता- पिता की पुण्यतिथि अपने शादी की सालगिरह या फिर अपने या अपने बच्चों के जन्म दिवस को यादगार बनाने के लिए दान स्वरुप भोजन या भोजन सामग्री या फिर आर्थिक रूप से सहायता करते हैं | और बहुत जल्द इसका विस्तार पुरे पटना में करने की योजना है |

पांच लोगों की टीम संचालित करती है भोजन बैंक

वैसे तो भोजन बैंक को श्रमदान और अर्थदान करने वाले दर्जनों लोग हैं, पर पांच लोग जिनमे राजीव मिश्रा जी की धर्मपत्नी बढ़-चढ़ कर भोजन बैंक के संचालन में हांथ बटाती हैं, इनके अलावा पटना कंकरबाग की रहने वाली समाजसेविका ईला वर्मा का भी भरपूर सहयोग एवं मार्ग दर्शन मिलता रहता है | इन लोगों के अलावा राजीव मिश्रा के मित्र हैं जो इस नेक कार्य में सहयोग देते हैं

 

भोजन की बर्बादी रोकने के लिए भी लोगों को करते हैं जागरूक

इसे देश की विडम्बना हीं कहेंगे कि जिस देश में बाइस करोड़ लोग पैसे या भोजन के आभाव में भूखे सोने को मजबूर हैं वहीँ शादी-विवाह एवं अन्य कार्यक्रम में होटल में तथा घर पर भी भोजन को बर्बाद करने वाले की हमारे देश में कमी नहीं है, वैसे लोग शायद भोजन को बर्बाद करने में अपनी शान समझते हैं, पर वे लोग यह बात भूल जाते हैं की जिस अनाज को वे बर्बाद कर रहे होते हैं उसी समय कोई व्यक्ति कहीं भूख से मर रहा होता है अगर इस बात को छोड़ भी दिया जाये तो उस अनाज को उपजाने में जितना देश का पानी खर्च हुआ है, जितना किसान का मेहनत और समर्पण लगा है अगर भोजन को बर्बाद करने वाले से इन सब का हिसाब सही ढंग से बताया जाये तो उन्हें दिन में भी तारे नजर आने लगेंगे |

एक सलाह आज के युवाओं के लिए

जो लोग भोजन बर्बाद करने को अपनी शान समझते हैं, उन लोगों से अनुरोध है जरा अमीरी का चश्मा उतार कर देखिये, जीतने भोजन को आप बर्बाद करते हैं उसमे कई बेसहारों का पेट भर सकता था | साथ हीं जो आप भोजन बर्बाद करते हैं और सोंचते हैं ये मेरे पैसे का है तो गलत है आप सीधे अपने देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं | अतः हो सके तो किसी भूखे का पेट भर दे, पर भोजन को बर्बाद न करें और न करने दें |

niraj kumar

niraj kumar

एक बेहतरीन हिंदी स्टोरी राइटर , और समाज में अच्छीबातोंको ढूंढ कर दुनिया के सामने उदाहरण के तौर पे पेश करते है |
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